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क्रूरता से किया कत्ल: 'पति बार-बार मारता था... हमने एक ही बार मार दिया', पुलिस से बोली हत्यारोपी पत्नी

Sat, 10 Aug 2024 11:27 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 10 Aug 2024 11:27 AM IST
सार

Shahjahanpur News: शाहजहांपुर के हथौड़ा बुजुर्ग में पति की बेरहमी से हत्या करने की आरोपी पत्नी को जेल भेज दिया गया। जेल भेजे जाने से पहले पुलिस ने उससे पूछताछ की। पूछताछ में उसने बताया कि उसका पति बहुत क्रूर था। वह रोज उसे मारता था। उसने एक ही बार में मार दिया। 

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shahjahanpur murder case accused wife says husband used to hit her repeatedly
पत्नी ने बेरहमी से की थी पति की हत्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहजहांपुर के रोजा थाना क्षेत्र में पति की हत्या करने वाली गायत्री को शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। उसकी हरकत से उसके मायके वालों से लेकर सभी स्तब्ध हैं। पुलिस की पूछताछ में गायत्री ने कहा कि उसका पति उसे बार-बार मारता था... हमने तो एक ही बार मार दिया है। माना जा रहा है कि मानसिक रोग से परेशान गायत्री की बीमारी लगातार बढ़ती गई और बृहस्पतिवार को उसने ऐसी खौफनाक वारदात अंजाम दे दी। 

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रोजा थाना क्षेत्र के हथौड़ा बुजुर्ग के रहने वाले सत्यपाल की बृहस्पतिवार दोपहर करीब तीन बजे पत्नी गायत्री ने ईंट से कूंचकर हत्या कर दी थी। घर के चबूतरे पर सत्यपाल के सीने पर बैठकर गायत्री 10 मिनट तक उसका सिर फाड़कर मांस के लोथड़े फेंकती रही। पुलिस की हिरासत में गायत्री ने बताया कि उसका पति बहुत क्रूर था। वह उसे घर में बंद रखता था और बहुत मारता था। 
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बोली- वारदात के दौरान होश नहीं रहा 
बृहस्पतिवार को वह 300 रुपये मांग रहा था। न देने पर मारने के लिए डंडा उठा लिया। तब उसने भी घर में पड़ी ईंट उठाकर उसका सिर फोड़ दिया। इसके बाद उसका गुस्सा बढ़ता चला गया और वह सिर पर ईंट मारती रही। गायत्री के मुताबिक, वारदात के दौरान गुस्से में उसे होश नहीं रहा। 
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पुलिस ने शुक्रवार को उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। शुक्रवार को सत्यपाल की मां के घर आसपास, रिश्तेदारी से आईं महिलाएं रो रहीं थीं। पति की हत्यारोपी गायत्री को शुक्रवार शाम को जिला कारागार में दाखिल किया गया। उसका मानसिक परीक्षण किया जाएगा। 

संबंधित खबर- जल्लादों की तरह पति को मार डाला: डंडा लगते ही खून सवार... हंसिया छूटा तो ईंट से किया वार; वहशीपन देख कांपे लोग

जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने डॉक्टर को निर्देश दिए हैं। महिला को अभी वैकल्पिक जेल की अलग बैरक में रखा गया है। मिजाजी लाल ने बताया कि डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर जेल के अंदर रखने पर विचार किया जाएगा।

कभी शांत हो जाती तो कभी रो पड़ती
रोजा थाने में बंद गायत्री का जब गुस्सा शांत हुआ तो उसे अहसास हुआ कि उसने कितना बड़ा कांड अंजाम दे दिया। वह कभी शांत रहती तो कभी फूटकर रो पड़ती। उसने रात में खाना खाया और सुबह कोर्ट जाने से पहले भी खाना खाया।

ब्यूटी पार्लर भी खोला... न चलने पर बंद करना पड़ा
सत्यपाल की शादी 2001 में खीरी के मोहम्मदी क्षेत्र के गांव मछेछा के भवानीपुर की गायत्री से हुई थी। शादी के बाद सबकुछ ठीक चल रहा था। एक बेटा और एक बेटी हुए। गायत्री घर के कामकाज में भी होशियार थी। उसने दस साल पहले ब्यूटी पार्लर खोला था। पार्लर न चल पाने पर उसे बंद करना पड़ा। इसके बाद वह भोले बाबा के सत्संग में जाने लगी थी। 

बाद में उसका मानसिक संतुलन धीरे-धीरे खराब होना शुरू हो गया। वह अनाप-शनाप बड़बड़ाती रहती थी। घरवालों ने उसका निजी डॉक्टर के पास से इलाज शुरू कराया। बाद में जिला अस्पताल से इलाज लेना शुरू किया। सालभर पहले उसके पति ने दवाई खाने की बजाय फेंकते देखकर उसका इलाज बंद करा दिया था। 

कुंठा से भर गई थी गायत्री 
गायत्री लगातार कुंठा से भरती जा रही थी। ओसीएफ में कार्यरत ससुर की मौत के बाद पेंशन सास शकुंतला को मिलने लगी थी। सत्यपाल का एक भाई अविनाश बंडा में सरकारी शिक्षक है। सत्यपाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में काम करता था और उसे छह हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। वह अपने रुपये मां को दे देता था। उसकी शराब पीने की आदत, उसे कमरे में बंद कर देना, मारपीट से वह कुंठा से भरती जा रही थी। उसे बच्चों से दूर किया गया...पति से भी दूर किया गया।

मां ने बेटी से मिलने से किया इन्कार
शुक्रवार को गायत्री के मायके वालों को जब उसको कोर्ट में पेश किए जाने की जानकारी मिली तो वे लोग उससे मिलने के लिए ऑटो में बैठकर कोर्ट की तरफ चले गए। गायत्री की मां प्रेमवती ने उसका चेहरा देखने तक से इन्कार कर दिया। वह सत्यपाल के घर के पास ही बैठी रहीं।

'आक्रामक व्यवहार को सामान्य न समझें'
बच्चे या बड़े के व्यवहार में आक्रामकता बढ़े तो उसे सामान्य तौर पर न लें। व्यवहार में यह परिवर्तन सिजोफ्रेनिया बीमारी के कारण हो सकता है। बीमारी से ग्रसित व्यक्ति इतना आक्रामक भी हो सकता है कि किसी की जान ले ले। मानसिक रोग विशेषज्ञ का मानना है कि आमतौर पर लोग इसे बीमारी नहीं मानते हैं। बाद में जब हिंसक घटना होती है तो पता चलता है कि बीमारी के कारण व्यक्ति ने ऐसा किया है।

रोजा के हथौड़ा बुजुर्ग में सत्यपाल की ईंट से कूंचकर वीभत्स हत्या को भी मनोरोग विशेषज्ञ मानसिक बीमारी से जोड़कर देख रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मनोविश्लेषक डॉ. रोहताश ईसा बताते हैं कि महिला सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो सकती है। बीमारी में रोगी भ्रम या वहम हो जाता है। उसकी सोचने-समझने या परिणाम के बारे में चिंता करने की ताकत खत्म हो जाती है।

उत्पीड़न, ईर्ष्या के साथ चिंता, गुस्सा, अलगाव आदि इसके कारण हो सकते हैं। भ्रम के शिकार व्यक्ति हिंसक या आत्मघाती हो सकते हैं। हालांकि, समय के साथ उनके स्थिर होने की संभावना रहती है। ऐसे मरीजों में नकारात्मक लक्षण हो सकते हैं। वह कम बोलने के साथ अजीब बातें करने लगता है। 

डॉ. रोहताश ने बताया कि सिजोफ्रेनिया रोग से ग्रसित मरीज का उपचार संभव है। उसका नियमित दवा खाना आवश्यक है। आसपास का माहौल प्रेमपूर्ण होना चाहिए। 

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