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संक्रमित नहीं हुए तो एंटीबॉडीज कैसे बन गईं
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बरेली। बगैर संक्रमित हुए कितने लोगों में कोविड-19 से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनी, यह पता लगाने के लिए सीरो सर्विलांस का तीसरे चरण का सर्वे पूरा हो गया। आईसीएमआर की टीम ने जिले में बनाए गए दस क्लस्टर में चार सौ लोगों के सैंपल लिए। सौ ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों के भी सैंपल लिए गए जो कोविड ड्यूटी पर रहने के बाद भी संक्रमित नहीं हुए। ये सैंपल जांच के लिए दिल्ली की आईसीएमआर लैब में जाएंगे। जांच पूरी होने में करीब सप्ताह भर का वक्त लग सकता है।
कोरोना संक्रमण को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की 16 सदस्यीय टीम तीन दिन पहले बरेली पहुंची थी। इसके पहले भी टीम ने बरेली में सर्वे किया था मगर दूसरे चरण के सर्वे का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया। माना जा रहा है कि उस दौरान जब कोरोना पीक पर था, तब लिए गए चार सौ लोगों के सैंपल में करीब 20 फीसदी लोगों में किसी संक्रमित के संपर्क में आए बगैर एंटीबॉडी पाई गई थीं। अब तीसरे चरण के सर्वे में भी यही प्रक्रिया कुछ बदलाव के साथ दोहराई गई है। इस बार सौ स्वास्थ्यकर्मियों के भी ब्लड सैंपल लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि सैंपल की रिपोर्ट से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की कामयाबी के साथ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी आकलन किया जाएगा।
आईसीएमआर की टीम की अगुवाई कर रहे डॉ. गणेश मेहता के मुताबिक जब जांच रिपोर्ट आएगी तो उससे अंदाजा लगाया जा सकेगा कि कितने लोगों में कितने प्रतिशत एंटीबॉडी बनी है। ब्लड सैंपल को जांच के लिए आगरा भेजा गया है और वहां आवश्यक जांच के बाद कुछ जांच चेन्नई में भी होनी है।
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सैंपल लिए और कई सवाल भी पूछे
इस बार जिन लोगों के सैंपल लिए गए हैं, उनसे कुछ सवालों के जवाब भी लिए गए। पूछा गया है कि कोरोना संक्रमण जब चरम पर था तब क्या उन्हें कभी संक्रमित होने की आशंका थी। उस दौरान तबियत कैसी लग रही थी। बता दें कि दूसरे और तीसरे चरण में आगरा की नेशनल जालमा इंस्टीट्यूट फॉर लेप्रोसी एंड अदर माइक्रो बैक्टीरियल डिजीज को जिम्मेदारी मिली। टीम लीडर के अनुसार गुरुवार की शाम तक वह उन्नाव पहुंच जाएंगे। वहां से सैंपल इकट्ठे कर औरैया रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि सैंपल को सुरक्षित लैब तक पहुंचाने के लिए उन्हें शून्य से 18 डिग्री कम तापमान पर रखा गया है।
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कोरोना संक्रमण को लेकर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की 16 सदस्यीय टीम तीन दिन पहले बरेली पहुंची थी। इसके पहले भी टीम ने बरेली में सर्वे किया था मगर दूसरे चरण के सर्वे का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया। माना जा रहा है कि उस दौरान जब कोरोना पीक पर था, तब लिए गए चार सौ लोगों के सैंपल में करीब 20 फीसदी लोगों में किसी संक्रमित के संपर्क में आए बगैर एंटीबॉडी पाई गई थीं। अब तीसरे चरण के सर्वे में भी यही प्रक्रिया कुछ बदलाव के साथ दोहराई गई है। इस बार सौ स्वास्थ्यकर्मियों के भी ब्लड सैंपल लिए गए हैं। बताया जा रहा है कि सैंपल की रिपोर्ट से कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की कामयाबी के साथ उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी आकलन किया जाएगा।
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आईसीएमआर की टीम की अगुवाई कर रहे डॉ. गणेश मेहता के मुताबिक जब जांच रिपोर्ट आएगी तो उससे अंदाजा लगाया जा सकेगा कि कितने लोगों में कितने प्रतिशत एंटीबॉडी बनी है। ब्लड सैंपल को जांच के लिए आगरा भेजा गया है और वहां आवश्यक जांच के बाद कुछ जांच चेन्नई में भी होनी है।
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सैंपल लिए और कई सवाल भी पूछे
इस बार जिन लोगों के सैंपल लिए गए हैं, उनसे कुछ सवालों के जवाब भी लिए गए। पूछा गया है कि कोरोना संक्रमण जब चरम पर था तब क्या उन्हें कभी संक्रमित होने की आशंका थी। उस दौरान तबियत कैसी लग रही थी। बता दें कि दूसरे और तीसरे चरण में आगरा की नेशनल जालमा इंस्टीट्यूट फॉर लेप्रोसी एंड अदर माइक्रो बैक्टीरियल डिजीज को जिम्मेदारी मिली। टीम लीडर के अनुसार गुरुवार की शाम तक वह उन्नाव पहुंच जाएंगे। वहां से सैंपल इकट्ठे कर औरैया रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि सैंपल को सुरक्षित लैब तक पहुंचाने के लिए उन्हें शून्य से 18 डिग्री कम तापमान पर रखा गया है।