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सेटेलाइट फ्लाईओवर- हाईटेंशन लाइन हटाने की दोहरी चुनौती से प्रोजेक्ट लटकने का डर
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बरेली। सेटेलाइट फ्लाईओवर का डिजाइन बदलकर उसकी एक लेन पीलीभीत रोड पर बनाने के लिए सीएम को भेजी गई केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार की चिट्ठी के बाद से सेतु निगम के अफसरों की टेंशन दोगुनी हो गई है। वर्तमान नक्शे के हिसाब से अभी केवल चौराहे के ऊपर ही बिजली की लाइन और खंभों की शिफ्टिंग होनी है, जबकि पीलीभीत रोड पर भी एक फ्लाईओवर की एक लेन बनानी पड़ी तो उस तरफ भी ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करना होगा, जबकि सेतु निगम के अफसर सालभर की मशक्कत के बाद भी अभी सेटेलाइट चौराहे से ही बिजली लाइन नहीं हटवा सके हैं।
अभी यह फ्लाईओवर बरेली-शाहजहांपुर रोड पर ही बनाया जा रहा है। यह काम पूरा करने के लिए चौराहे के ऊपर निकली बिजली की लाइन और कई खंभों को भी हटाया जाना है। अधिकारियों ने इसका एस्टीमेट काफी पहले शासन में भेजा था, जिसकी मंजूरी न मिलने से यह काम अब भी फंसा हुआ है। हाल में फिर से संशोधित करीब छह करोड़ का एस्टीमेट फिर से भेजा जा चुका है। इस बीच केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने फ्लाईओवर की एक लेन को पीलीभीत रोड पर बनाने के लिए चिट्ठी मुख्यमंत्री को भेज दी। इससे सेतु निगम के अधिकारियों की टेंशन कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी चौराहे के ऊपर से गुजरी लाइन को ही हटाने में काफी समय लगेगा। इसके बाद कहीं पीलीभीत रोड पर भी 300 मीटर लंबी फ्लाईओवर की एक और लाइन बनानी पड़ी तो वहां से भी हाईटेंशन लाइन को हटाना होगा। इसके लिए फिर से एस्टीमेट को बदलकर शासन को भेजना होगा। इससे फ्लाईओवर बनाने का काम और लंबा खिंचने की संभावना है।
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अभी यह फ्लाईओवर बरेली-शाहजहांपुर रोड पर ही बनाया जा रहा है। यह काम पूरा करने के लिए चौराहे के ऊपर निकली बिजली की लाइन और कई खंभों को भी हटाया जाना है। अधिकारियों ने इसका एस्टीमेट काफी पहले शासन में भेजा था, जिसकी मंजूरी न मिलने से यह काम अब भी फंसा हुआ है। हाल में फिर से संशोधित करीब छह करोड़ का एस्टीमेट फिर से भेजा जा चुका है। इस बीच केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने फ्लाईओवर की एक लेन को पीलीभीत रोड पर बनाने के लिए चिट्ठी मुख्यमंत्री को भेज दी। इससे सेतु निगम के अधिकारियों की टेंशन कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
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अधिकारियों का कहना है कि अभी चौराहे के ऊपर से गुजरी लाइन को ही हटाने में काफी समय लगेगा। इसके बाद कहीं पीलीभीत रोड पर भी 300 मीटर लंबी फ्लाईओवर की एक और लाइन बनानी पड़ी तो वहां से भी हाईटेंशन लाइन को हटाना होगा। इसके लिए फिर से एस्टीमेट को बदलकर शासन को भेजना होगा। इससे फ्लाईओवर बनाने का काम और लंबा खिंचने की संभावना है।
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