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तीसरी लहर की चेतावनी पर सैंपलिंग घटकर रह गई आधी
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जिला अस्पताल में कोरोना की जांच कराते मरीज।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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टोल प्लाजा पर सुरक्षा न मिलने से बहुत कम हो रही जांच
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बरेली। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तीसरी लहर की चेतावनी के बावजूद जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। दूसरे राज्यों से आने वालों की जांच में अनदेखी शहरवासियोें के लिए बड़े खतरे की आहट दे रही है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक महीने भर पहले रोजाना छह से सात हजार सैंपल हो रहे थे, लेकिन अब चार हजार से कम हो रहे हैं।
पहली लहर के बाद से ही लगातार फतेहगंज पश्चिमी स्थित टोल प्लाजा पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आने वालों की एंटीजन, आरटीपीसीआर जांच कर रही हैं। करीब दो माह पहले तक हर दिन साढ़े तीन सौ से चार सौ जांचें हो रही थीं, लेकिन अब प्रतिदिन सौ या उससे भी कम जांच हो रही हैं। अब सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक करीब तीन घंटे ही टोल प्लाजा पर दूसरे राज्यों से आने वालों की जांच हो रही है। बाकी 21 घंटे बाहर से आने वालों की जांच न होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बयां कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो 15 मई से पहले हर दिन सात हजार से ज्यादा सैंपल की जांच हो रही थी। सभी सीएचसी, पीएचसी समेत शहर के तमाम इलाकों में भी कैंप लगाकर जांच की जा रही थी। मगर, अब सैंपलिंग में टीमें लापरवाही बरत रही हैं। हालांकि अफसर अब भी शहर में जांच शिविर लगने और एमएमयू के सैंपलिंग करने की बात कह रहे हैं।
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पहली लहर के बाद से ही लगातार फतेहगंज पश्चिमी स्थित टोल प्लाजा पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आने वालों की एंटीजन, आरटीपीसीआर जांच कर रही हैं। करीब दो माह पहले तक हर दिन साढ़े तीन सौ से चार सौ जांचें हो रही थीं, लेकिन अब प्रतिदिन सौ या उससे भी कम जांच हो रही हैं। अब सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक करीब तीन घंटे ही टोल प्लाजा पर दूसरे राज्यों से आने वालों की जांच हो रही है। बाकी 21 घंटे बाहर से आने वालों की जांच न होना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही बयां कर रही है।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो 15 मई से पहले हर दिन सात हजार से ज्यादा सैंपल की जांच हो रही थी। सभी सीएचसी, पीएचसी समेत शहर के तमाम इलाकों में भी कैंप लगाकर जांच की जा रही थी। मगर, अब सैंपलिंग में टीमें लापरवाही बरत रही हैं। हालांकि अफसर अब भी शहर में जांच शिविर लगने और एमएमयू के सैंपलिंग करने की बात कह रहे हैं।
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