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UP: 30 तारीख..फिर वैसा ही भीषण हादसा, झकझोर गई बाप-बेटे की मौत; दोनों हादसों में चालक की गोद में बैठा था पुत्र

Wed, 31 Jan 2024 09:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 31 Jan 2024 09:29 AM IST
सार

Budaun Road Accident News: बदायूं के उझानी कोतवाली इलाके में मंगलवार सुबह इको वैन की कैंटर से टक्कर हो गई। इसी दौरान पीछे आई रोडवेज बस भी दोनों वाहनों से टकरा गई। हादसे में वैन चालक, उसके मासूम बेटे और एक छात्र की मौत हो गई। छह बच्चे घायल हुए हैं।  

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Same horrific accident again in Badaun and death of father and daughter shocked
Road Accident - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक बार फिर जिले में हृदय कंपाने वाला उसावां जैसा हादसा हुआ। उसावां हादसा 30 अक्तूबर को हुआ था। उस दिन भी वैन बच्चों को लेकर स्कूल जा रही है। चालक की गोद में उसका बेटा बैठा था। आमने-सामने की भिड़ंत में दोनों पिता-पुत्र समेत तीन अन्य बच्चों की मौत हो गई थी। 
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पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने काफी प्रयास किए कि ऐसी घटना दोबारा न हो। कई जांचें कराई गईं और तमाम वाहन चेकिंग अभियान चलाए गए लेकिन माह के अंत में फिर उसी तरह का हादसा हो गया। 30 जनवरी को उझानी में जुनइया मोड़ पर हादसा हो गया। इसमें पिता-पुत्र समेत चार की मौत हो गई। इस घटना में भी वैन चालक की गोद में उसका बेटा बैठा हुआ था। 
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विगत 30 अक्तूबर 2023 को म्याऊ-हजरतपुर रोड पर सत्यदेव विद्या पीठ इंटर कॉलेज की बस और एसआरपीएस इंग्लिश मीडियम स्कूल की वैन आमने सामने से टकरा गई। यह हादसा इतना जबरदस्त था कि वैन चालक ग्राम लभारी निवासी ओमेंद्र, उसका बेटा हर्षित, कौशल्या पुत्री हरवंश, प्रदीप पुत्र मदनलाल और खुशी पुत्री प्रदीप की अस्पताल ले जाते-जाते मौत हो गई। 
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इस हादसे में 20 से ज्यादा छात्र-छात्राएं घायल हुए थे। उस दौरान सभी बच्चे वैन में सवार होकर अपने स्कूल जा रहे थे। पांच वर्षीय हर्षित अपने चालक पिता ओमेंद्र की गोद में बैठा था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उनकी मौत से पूरा परिवार टूट गया था। आसपास के लोगों को भी काफी दुख पहुंचा था।

ओमेंद्र की तरह कुछ उमेश की भी कहानी रही। वो भी अपने इकलौते बेटे दुष्यंत को गोद में बैठाकर मंगलवार सुबह स्कूली बच्चों को छोड़ने जा रहा था। जब वह सुबह गाड़ी लेकर घर से निकला था, तब दुष्यंत ने भी गाड़ी में बैठने की जिद की थी।

इससे उमेश ने उसे गोद में बैठा लिया था। उसे क्या पता था कि अब वह लौटकर घर नहीं आएंगें। फिर वही हुआ जो ईश्वर को मंजूर था। करुआ पुल के नजदीक हादसे में दोनों पिता-पुत्र की जान चली गई। उनके साथ मासूम आलेख और छात्रा स्वाति की भी मौत हो गई। उसावां की तरह यह दूसरा हादसा है।

तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी उसावां हादसे की जांच
उसावां सड़क हादसे की जांच तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी। इस जांच में लोक निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग, जल निगम और परिवहन विभाग की घोर लापरवाही निकलकर सामने आई थी। लोक निर्माण विभाग की लापरवाही यह थी कि जल जीवन मिशन द्वारा गड्ढा खोदवाने के बावजूद सड़क को ठीक नहीं कराया गया था। जिस स्कूल के बच्चों की मौत हुई थी।

वह स्कूल ही फर्जी तरह से चल रहा था। कभी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने उधर झांककर भी नहीं देखा था। जिस वैन का हादसा हुआ था, उसकी फिटनेस नहीं कराई गई थी। इसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी, लेकिन वहां से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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