{"_id":"6742825844997968320663e6","slug":"ruhilkhands-environment-is-favorable-for-film-city-rajpal-bareilly-news-c-4-lko1064-527662-2024-11-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिल्म सिटी के अनुकूल है रुहेलखंड का वातावरण : राजपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिल्म सिटी के अनुकूल है रुहेलखंड का वातावरण : राजपाल
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बरेली। रुहेलखंड का क्षेत्र जल, जंगल से आच्छादित है। ऐसा क्षेत्र फिल्म सिटी के लिए अनुकूल होता है। मेरा सपना है कि यहां फिल्म सिटी बने। अभिनेता राजपाल यादव ने शनिवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित पुरा छात्र सम्मेलन ''रुआ उवाच'' में ये बातें कहीं।
विवि के एमबीए सभागार में राजपाल यादव की झलक पाने के लिए युवाओं की भीड़ उमड़ी। संगीत क्लब की अपर्णा मिश्रा ने झुमका गिरा रे...., तेरी आंखें भूल भुलैया... गीत गाए। राजपाल ने कहा कि रुहेलखंड में फिल्म सिटी के लिए सरकार का सहयोग मिल रहा है। इससे यहां के लोगों को रोजगार के साथ ही हुनर दिखाने का मौका मिलेगा। यह एक शाखा होगी। मदर फिल्म सिटी गोरेगांव ईस्ट मुंबई ही रहेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को अभिनय के गुर सिखाएं। अपने फिल्मी सफर साझा किया।
हिंदुस्तान के चार्ली चैपलिन हैं राजपाल
वरिष्ठ इतिहासकार सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि यह रुहेलखंड वासियों के लिए गर्व की बात है कि शाहजहांपुर के बंडा निवासी राजपाल ने दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वह हिंदुस्तान के चार्ली चैपलिन हैं। सुधीर ने अंधेर नगरी चौपट राजा व मुंगेरी का भाई नौरंगी नाटक से जुड़े राजपाल के संस्मरण साझा किए। वरिष्ठ रंगकर्मी जरीफ मलिक आनंद ने कहा कि युवा धर्म की दीवार तोड़कर एकता और अखंडता पर ध्यान दे रहा है।
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तीन पुरस्कार जीवनभर रहेंगे याद
संबोधन के दौरान युवा शोर मचाने लगे तो राजपाल ने डायलॉग के रूप में कहा, ''मैं प्यार से समझता हूं, प्यार से ही समझाता हूं।'' बोले- मुझे कितना भी बड़ा सम्मान मिल जाए, लेकिन तीन पुरस्कार जीवनभर याद रहेंगे। इसमें शाहजहांपुर में कक्षा तीन में जब कविता सुनाई तो इरेजर मिला था। सार्वजनिक मंच पर चुटकुला सुनाया तो पेंसिल मिली और बाद में तौलिया इनाम के रूप में मिली। अब पेंसिल से लिखता हूं और रबर से मिटाता हूं। तौलिया हमेशा साथ रहती है। मैंने यहां से स्नातक की पढ़ाई की है। यहां माथा भी रख दू, फिर भी इसका कर्ज नहीं चुका पाउंगा। त्योहार पर हमेशा घर आता हूं। कद को लेकर टिप्पणी करने पर बचपन में मैंने गांव के लड़के को पीट दिया था। संचालन सांस्कृतिक केंद्र की समन्वयक डॉ. ज्योति पांडे ने किया। समापन पर कुलसचिव संजीव कुमार ने अभिनेता, वरिष्ठ इतिहासकार व वरिष्ठ रंगकर्मी को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. इंद्रप्रीत कौर, रुआ समन्वयक प्रो. आलोक श्रीवास्तव, प्रो. संजय गर्ग, डॉ. अमित कुमार सिंह, तपन वर्मा, सुधांशु शर्मा उपस्थित रहे।
मैं हूं छोटा डॉन
राजपाल बोले- मैं हूं छोटा डॉन। उन्होंने चुप-चुप के, भूल-भुलैया, हेरा-फेरी के डायलॉग सुनाए। मंदिर का घंटा वाले डायलॉग पर हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। संवाद
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विवि के एमबीए सभागार में राजपाल यादव की झलक पाने के लिए युवाओं की भीड़ उमड़ी। संगीत क्लब की अपर्णा मिश्रा ने झुमका गिरा रे...., तेरी आंखें भूल भुलैया... गीत गाए। राजपाल ने कहा कि रुहेलखंड में फिल्म सिटी के लिए सरकार का सहयोग मिल रहा है। इससे यहां के लोगों को रोजगार के साथ ही हुनर दिखाने का मौका मिलेगा। यह एक शाखा होगी। मदर फिल्म सिटी गोरेगांव ईस्ट मुंबई ही रहेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को अभिनय के गुर सिखाएं। अपने फिल्मी सफर साझा किया।
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हिंदुस्तान के चार्ली चैपलिन हैं राजपाल
वरिष्ठ इतिहासकार सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि यह रुहेलखंड वासियों के लिए गर्व की बात है कि शाहजहांपुर के बंडा निवासी राजपाल ने दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वह हिंदुस्तान के चार्ली चैपलिन हैं। सुधीर ने अंधेर नगरी चौपट राजा व मुंगेरी का भाई नौरंगी नाटक से जुड़े राजपाल के संस्मरण साझा किए। वरिष्ठ रंगकर्मी जरीफ मलिक आनंद ने कहा कि युवा धर्म की दीवार तोड़कर एकता और अखंडता पर ध्यान दे रहा है।
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तीन पुरस्कार जीवनभर रहेंगे याद
संबोधन के दौरान युवा शोर मचाने लगे तो राजपाल ने डायलॉग के रूप में कहा, ''मैं प्यार से समझता हूं, प्यार से ही समझाता हूं।'' बोले- मुझे कितना भी बड़ा सम्मान मिल जाए, लेकिन तीन पुरस्कार जीवनभर याद रहेंगे। इसमें शाहजहांपुर में कक्षा तीन में जब कविता सुनाई तो इरेजर मिला था। सार्वजनिक मंच पर चुटकुला सुनाया तो पेंसिल मिली और बाद में तौलिया इनाम के रूप में मिली। अब पेंसिल से लिखता हूं और रबर से मिटाता हूं। तौलिया हमेशा साथ रहती है। मैंने यहां से स्नातक की पढ़ाई की है। यहां माथा भी रख दू, फिर भी इसका कर्ज नहीं चुका पाउंगा। त्योहार पर हमेशा घर आता हूं। कद को लेकर टिप्पणी करने पर बचपन में मैंने गांव के लड़के को पीट दिया था। संचालन सांस्कृतिक केंद्र की समन्वयक डॉ. ज्योति पांडे ने किया। समापन पर कुलसचिव संजीव कुमार ने अभिनेता, वरिष्ठ इतिहासकार व वरिष्ठ रंगकर्मी को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. इंद्रप्रीत कौर, रुआ समन्वयक प्रो. आलोक श्रीवास्तव, प्रो. संजय गर्ग, डॉ. अमित कुमार सिंह, तपन वर्मा, सुधांशु शर्मा उपस्थित रहे।
मैं हूं छोटा डॉन
राजपाल बोले- मैं हूं छोटा डॉन। उन्होंने चुप-चुप के, भूल-भुलैया, हेरा-फेरी के डायलॉग सुनाए। मंदिर का घंटा वाले डायलॉग पर हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। संवाद