Bareilly News: मुख्यमंत्री का आदेश बेअसर, बरेली में दिवाली तक गड्ढामुक्त नहीं हो सकीं सड़कें
बरेली जिले में लोक निर्माण विभाग की 184 सड़कें तो ऐसी हैं, जिनमें एक भी गड्ढा नहीं भरा गया। गन्ना विभाग की 100 से अधिक सड़कें यातायात के लायक नहीं हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिवाली से पहले सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का मुख्यमंत्री का आदेश बरेली में असरदार नहीं रहा। दिवाली बीत गई, लेकिन कुछेक सड़कों को छोड़ दीजिए तो अधिकांश में गड्ढे जस के तस हैं। शहर से लेकर जिले के गांवों तक गड्ढा मुक्ति अभियान की हवा निकली हुई है। समीक्षा बैठकों में किए गए जिम्मेदार विभागों के अफसरों के वायदे पूरे नहीं हो सके।
सड़कें सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने 11 सितंबर को निर्देश दिए थे। इसके बाद जिले में लोक निर्माण, नगर विकास व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अफसरों ने सड़कों के गड्ढे गिनवाए थे। अभियंताओं से एस्टीमेट तैयार कराए गए, लेकिन शहर व जिले की 500 से अधिक सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। लोक निर्माण विभाग की 184 सड़कें तो ऐसी हैं, जिनमें एक भी गड्ढा नहीं भरा गया। गन्ना विभाग की 100 से अधिक सड़कें यातायात के लायक नहीं हैं। लोगों को त्योहार पर खतरे भरा सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ये है जमीनी हकीकत
1- चार वर्ष में चार बार एस्टीमेट बने, सड़क एक बार भी नहीं बनी
धौरा से तजुआ तक की 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क वर्ष 2019 से टूटी पड़ी है। चार बार एस्टीमेट बने। मंजूरी के लिए मुख्य अभियंता तक प्रस्ताव भेजे गए लेकिन एक बार भी निर्माण नहीं किया गया। न गड्ढे भरे गए। इस मार्ग पर कई राइस मिल हैं। दस हजार से अधिक लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है।
2- कहने को स्मार्ट सिटी, हालत गांव से भी खराब
द गुरु स्कूल से गांधीपुरम फेज टू के लिए गए मुख्य मार्ग पर खतरनाक गड्ढे हैं। धर्मवीर सिंह का कहना है कि कहने को तो हम स्मार्ट सिटी में रहते हैं, लेकिन सड़कों की हालत गांव से भी खराब है। सांसद और विधायक जब-जब वोट मांगने आए तब-तब सड़क समस्या को उठाया, लेकिन समाधान अभी तक नहीं हो सका।
3- फरीदपुर भुता मार्ग के निर्माण का कीजिए और इंतजार
फरीदपुर-भुता मार्ग तीन वर्ष से टूटा पड़ा है। जब-जब निर्माण की मांग हुई, अभियंताओं ने कहा कि मंजूरी का इंतजार कीजिए। अब अधिशासी अभियंता का कहना है कि मार्ग के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। दिवाली के बाद काम शुरू होगा जाएगा।
फरीदपुर-भुता मार्ग
अफसरों को क्यों नहीं दिखती गांधीपुरम की सड़कें
गांधीपुरम के तेजपाल ने कहा कि गांधीपुरम फेज टू की सड़क में गड्ढे होने की वजह से मैं गिर चुका हूं। मेरा सवाल यही है कि सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का दावा करने वाले अफसरों को यह सड़क क्यों नहीं दिखती।
सीएम के निर्देश का पालन नहीं कर रहे अफसर
गांधीपुरम फेज टू के अखिलेश मिश्रा ने कहा कि सीएम के निर्देश हैं कि गड्ढे भरे जाएं, किसी सड़क पर जल भराव न होने पाए। कहीं जलभराव हो रहा है तो जल निकासी कराई जाए, लेकिन अफसर एसी कमरों में बैठकर सड़कों के गड्ढा मुक्त होने के दावे कर रहे हैं और हम परेशानी झेल रहे हैं।
अफसरों के तर्क
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नारायण का कहना है कि 232 सड़कें गड्ढा मुक्ति अभियान में चयनित की गईं थीं। अधिकतर में काम पूरा हो चुका है। थोड़ा बहुत काम जहां रह गया है, उसे 30 नवंबर तक पूरा करा देंगे। सड़कें जो पूरी तरह से टूटी हैं, उनके नव निर्माण और पुनर्निर्माण के लिए एस्टीमेट भेजे गए हैं। मंजूरी आने के साथ ही काम शुरू हो जाएंगे।
अपर नगर आयुक्त बोले- प्रक्रिया जारी है
शहर के गांधीपुरम, डीडीपुरम और संजय नगर में सड़कें टूटी हैं। जलभराव होता है। न तो जल निकासी का इंतजाम किया गया, न ही सड़कों का निर्माण हुआ। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि टेंडर निकाले गए थे। कोई फर्म आगे नहीं आई। दोबारा टेंडर निकाले जाएंगे। शहर में 42 किलोमीटर सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाना था, लेकिन 50 फीसदी तक काम हो चुका है। शेष के लिए प्रक्रिया चल रही है।