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Bareilly News: जमीन के अधिग्रहण में अटका रिंग रोड का प्रस्ताव
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बरेली। शहर में यातायात को रफ्तार देने के लिए लखनऊ की तर्ज पर 1500 करोड़ रुपये की लागत से ऑउटर रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव 2021 में तैयार किया गया, लेकिन जमीन का अधिग्रहण दो वर्ष बाद भी नहीं हो सका। इस देरी की वजह से जहां परियोजना की लागत बढ़ने की आशंका है, वहीं शहर को जाम से निजात नहीं मिल पा रही है। यह स्थिति तब है बरेली-बदायूं मार्ग के लिए फोरलेन की मंजूरी मिल चुकी है। इसमें दोनों बाईपास भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने बरेली से बदायूं तक 68.4 किलोमीटर मार्ग प्रस्तावित किया है। इसी प्रोजेक्ट के साथ रिंग रोड को भी जोड़ा है। चौबारी मुस्तकिल से रजऊ परसपुर तक 13 किलोमीटर लंबा बाईपास बनना है। दूसरा बाईपास 19.2 किलोमीटर लंबा है और धंतिया से शुरू होकर चौबारी मुस्तकिल तक जाएगा। दोनों बाईपास बन जाने पर बदायूं की ओर से आने वाले तमाम वाहनों को शहर के भीतर घुसने की मजबूरी नहीं होगी।
प्रभावित हो रही 25 हजार से अधिक वाहनों की रफ्तार
रिंगरोड बनने में देरी की वजह से दूसरे शहरों से बरेली होकर गुजरने वाले 25,000 से अधिक वाहनों को बेवजह शहर के भीतर आना-जाना पड़ता है। रिंग रोड बनने पर वाहनों को बाहर ही बाहर रास्ता मिल जाएगा। बरेली शहर के भीतर भी यातायात को रफ्तार मिलेगी।
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अब तक क्या-क्या हुआ
एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण समिति के पास प्रस्ताव गया है। समिति से मंजूरी के बाद भूमि की कीमत को लेकर एनएचएआई की वित्तीय समिति परीक्षण करेगी। दोनों समितियों से स्वीकृति मिलने के बाद निविदाएं निकाली जाएंगी। इसके बाद काम शुरू होगा। प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं पड़ी तो छह महीने में अनुमति मिल जाएगी। इसके निर्माण में भी दो से ढाई वर्ष लगेंगे।
कोट
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने रिंग रोड के साथ बाईपास को भी मंजूरी दी है। औपचारिक मंजूरी के बाद जमीन का अधिग्रहण होगा और मार्ग का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। - बीपी पाठक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने बरेली से बदायूं तक 68.4 किलोमीटर मार्ग प्रस्तावित किया है। इसी प्रोजेक्ट के साथ रिंग रोड को भी जोड़ा है। चौबारी मुस्तकिल से रजऊ परसपुर तक 13 किलोमीटर लंबा बाईपास बनना है। दूसरा बाईपास 19.2 किलोमीटर लंबा है और धंतिया से शुरू होकर चौबारी मुस्तकिल तक जाएगा। दोनों बाईपास बन जाने पर बदायूं की ओर से आने वाले तमाम वाहनों को शहर के भीतर घुसने की मजबूरी नहीं होगी।
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प्रभावित हो रही 25 हजार से अधिक वाहनों की रफ्तार
रिंगरोड बनने में देरी की वजह से दूसरे शहरों से बरेली होकर गुजरने वाले 25,000 से अधिक वाहनों को बेवजह शहर के भीतर आना-जाना पड़ता है। रिंग रोड बनने पर वाहनों को बाहर ही बाहर रास्ता मिल जाएगा। बरेली शहर के भीतर भी यातायात को रफ्तार मिलेगी।
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अब तक क्या-क्या हुआ
एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण समिति के पास प्रस्ताव गया है। समिति से मंजूरी के बाद भूमि की कीमत को लेकर एनएचएआई की वित्तीय समिति परीक्षण करेगी। दोनों समितियों से स्वीकृति मिलने के बाद निविदाएं निकाली जाएंगी। इसके बाद काम शुरू होगा। प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं पड़ी तो छह महीने में अनुमति मिल जाएगी। इसके निर्माण में भी दो से ढाई वर्ष लगेंगे।
कोट
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने रिंग रोड के साथ बाईपास को भी मंजूरी दी है। औपचारिक मंजूरी के बाद जमीन का अधिग्रहण होगा और मार्ग का निर्माण भी शुरू हो जाएगा। - बीपी पाठक, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई