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Bareilly News: डिजिटल अरेस्ट कर सेवानिवृत्त वैज्ञानिक से 1.29 करोड़ की ठगी
Sat, 28 Jun 2025 02:51 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jun 2025 02:51 AM IST
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) परिसर में रह रहे सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने 1.29 करोड़ रुपये ठग लिए। पीड़ित ने सप्ताहभर तक किसी से इसका जिक्र तक नहीं किया। अब उन्होंने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पश्चिम बंगाल के हुगली के मूल निवासी वैज्ञानिक यहां आईवीआरआई में तैनात रहे। वह जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं, पर अभी परिसर स्थित आवास में ही रह रहे हैं। उन्होंने साइबर थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा को बताया कि 17 जून को उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने खुद को बंगलूरू सिटी पुलिस का अधिकारी बताया। कहा कि उनके आधार कार्ड से सिम निकालकर नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी व मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं। उनके यहां सदाकत खां नाम का शख्स पकड़ा गया है जिसने उनका नाम लिया है।
आरोपी ने उनको एक मोबाइल नंबर देकर कहा कि यह नंबर सीबीआई अधिकारी दया नायक का है। बचना चाहते हो तो इनसे बात कर लो। वैज्ञानिक ने बात की तो उसने कहा कि उनके बैंक खातों में अवैध धन आया है। इसकी जांच के लिए उन्हें अपने खाते की पूरी रकम एक खाते में ट्रांसफर करनी होगी। जांच के बाद रकम लौटा दी जाएगी। इसके बाद वह 18 जून को बैंक जाकर अपने खाते से 1.10 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
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इस पर आरोपियों ने अन्य खातों की रकम भी ट्रांसफर करने के लिए कहा। वैज्ञानिक को भरोसे में लेने के लिए ठगों ने उनके ग्रामीण बैंक खाते में एक लाख रुपये लौटा भी दिए। 19 जून को ठगों ने उनके दो और खातों से 10 लाख और नौ लाख रुपये अपने इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। ब्यूरो
संदेह होने पर बंगलूरू पुलिस से किया संपर्क तो खुली पोल
संदेह होने पर वैज्ञानिक ने संबंधित नंबरों को गूगल पर तलाशा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। तब उन्होंने बंगलूरू पुलिस का नंबर तलाश कर कॉल की। असली अधिकारी ने उनकी बात सुनी और बताया कि वह साइबर ठगी के शिकार हो गए हैं। तब उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई।
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पश्चिम बंगाल के हुगली के मूल निवासी वैज्ञानिक यहां आईवीआरआई में तैनात रहे। वह जनवरी में सेवानिवृत्त हुए हैं, पर अभी परिसर स्थित आवास में ही रह रहे हैं। उन्होंने साइबर थाने के इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा को बताया कि 17 जून को उनके पास व्हाट्सएप कॉल आई। कॉलर ने खुद को बंगलूरू सिटी पुलिस का अधिकारी बताया। कहा कि उनके आधार कार्ड से सिम निकालकर नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी व मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध किए गए हैं। उनके यहां सदाकत खां नाम का शख्स पकड़ा गया है जिसने उनका नाम लिया है।
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आरोपी ने उनको एक मोबाइल नंबर देकर कहा कि यह नंबर सीबीआई अधिकारी दया नायक का है। बचना चाहते हो तो इनसे बात कर लो। वैज्ञानिक ने बात की तो उसने कहा कि उनके बैंक खातों में अवैध धन आया है। इसकी जांच के लिए उन्हें अपने खाते की पूरी रकम एक खाते में ट्रांसफर करनी होगी। जांच के बाद रकम लौटा दी जाएगी। इसके बाद वह 18 जून को बैंक जाकर अपने खाते से 1.10 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
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इस पर आरोपियों ने अन्य खातों की रकम भी ट्रांसफर करने के लिए कहा। वैज्ञानिक को भरोसे में लेने के लिए ठगों ने उनके ग्रामीण बैंक खाते में एक लाख रुपये लौटा भी दिए। 19 जून को ठगों ने उनके दो और खातों से 10 लाख और नौ लाख रुपये अपने इंडसइंड बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। ब्यूरो
संदेह होने पर बंगलूरू पुलिस से किया संपर्क तो खुली पोल
संदेह होने पर वैज्ञानिक ने संबंधित नंबरों को गूगल पर तलाशा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। तब उन्होंने बंगलूरू पुलिस का नंबर तलाश कर कॉल की। असली अधिकारी ने उनकी बात सुनी और बताया कि वह साइबर ठगी के शिकार हो गए हैं। तब उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कराई।