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Bareilly: फर्जी एनकाउंटर मामले में रिटायर्ड दरोगा को उम्रकैद, 31 साल बाद मृतक के परिवार को मिला इंसाफ

Fri, 31 Mar 2023 05:26 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 31 Mar 2023 05:26 PM IST
सार

अदालत ने बरेली के चर्चित फर्जी एनकाउंटर के मामले में शुक्रवार को रिटायर्ड दरोगा युधिष्ठिर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस मामले में मुकेश जौहरी के परिवार ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। 

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Retired inspector sentenced to life imprisonment in fake encounter case
रिटायर्ड दरोगा को जेल ले जाता पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली के साहूकारा मोहल्ला निवासी मुकेश जौहरी उर्फ लाली के फर्जी एनकाउंटर मामले में 31 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इनमें हत्याकांड का आरोपी मानते हुए रिटायर्ड दरोगा युधिष्ठिर सिंह को उम्रकैद और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश पशुपति नाथ मिश्रा ने किया।

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शहर के बड़ा बाजार में 23 जुलाई 1992 की शाम साहूकारा के निवासी मुकेश जौहरी उर्फ लाली को तत्कालीन दरोगा युधिष्ठिर सिंह ने गोली मार हत्या कर दी थी। दरोगा ने कोतवाली में मृतक के खिलाफ पिंक सिटी वाइन शॉप लूटने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। 
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सीबीसीआईडी ने की थी विवेचना 

घटना के बाद मृतक की मां चंद्रा जौहरी ने दरोगा युधिष्ठिर सिंह व तत्कालीन एसओ किला वीके उपाध्याय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीसीआईडी ने विवेचना की। 

इसमें दरोगा युधिष्ठिर सिंह को दोषी मानते हुए कोतवाली में उसके खिलाफ 20 नवंबर 1997 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में दरोगा को कोर्ट ने 29 मार्च को दोषी करार दे दिया था। कोर्ट ने शुक्रवार को सेवानिवृत्त युधिष्ठिर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

कोर्ट के फैसले से सुकून मिला

दरोगा युध्ष्ठिर सिंह को कोर्ट से सजा मिलने के बाद मुकेश उर्फ लाली के भाइयों ने संतुष्टि जाहिर की। उनका कहना था कि लड़ाई लंबी थी, लेकिन उनके भाई अरविंद जौहरी ने लड़ी। अरविंद वकील थे।  

पिछले वर्ष जब उनका देहांत हुआ तो मुकदमा अपने अंतिम चरण में था। फैसला सुनने के लिए मुकेश उर्फ लाली के तीन भाई अनिल जौहरी, राकेश जौहरी व अनूप जौहरी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उनकी मां इस दिन का इंतजार करते करते चल बसीं।

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