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Bareilly News: सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर महिला को 42 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, 70 लाख रुपये मांगे
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बरेली। साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त महिला बैंक मैनेजर को 42 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा। महिला के तार आतंकवादी संगठनों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने का आरोप लगाते हुए 70 लाख रुपये की मांग की। सोमवार दोपहर से बुधवार दोपहर तक महिला ठगों के चुंगल में फंसकर डिजिटल अरेस्ट रही। बुधवार को एसपी सिटी मानुष पारीक ने महिला को मुक्त कराया।
प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एकता नगर निवासी गुलशन कुमारी बैंक ऑफ बड़ौदा की सेवानिवृत्त मैनेजर हैं। वह अविवाहित हैं और अपने भाई महेंद्र अरोरा के परिवार के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर उनके पास अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम पुलिस स्टेशन का अधिकारी होना बताते हुए धमकाया।
उसने कहा कि उनके तार पहलगाम आतंकवादी हमले से जुड़े हुए हैं। बैंक मैनेजर रहते हुए उन्होंने आतंकवादियों को फंडिंग की। जांच के दौरान उनकी संलिप्तता मनी लॉन्ड्रिंग में भी पाई गई है। उनके आधार कार्ड के जरिए आईएसआईएस आतंकी संगठन ने मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदे हैं। इनका इस्तेमाल आतंकवादी हमलों में किया गया।
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कॉल करने वाले से उनसे कहा कि मामले में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास जाने वाली है। अगर वह खुद को बचाना चाहती हैं तो 70 लाख रुपये देने होंगे। इसके बाद से गुलशन गुमशुद रहने लगीं। भाई महेंद्र ने बहन को परेशान देखा तो उनसे कारण पूछा। महेंद्र ने बुधवार दोपहर 112 को कॉल करके इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद एसपी सिटी मानुष पारीक और इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी गुलशन के घर पहुंचे। उन्होंने गुलशन को मुक्त कराया। संवाद
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कहा- पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े तार महिला को डिजिटल अरेस्ट करने वाले से कॉल पर यह कहते हुए धमकाया कि पहलगाम आतंकवादी हमले से उसके तार जुड़ रहे हैं। इस मामले में जांच जम्मू-कश्मीर का पहलगाम पुलिस स्टेशन कर रहा है। सुरक्षा और खुफिया कारणों का हवाला देते हुए यह भी हिदायत दी कि वह जांच पूरी होने तक इस संबंध में किसी से कोई चर्चा न करे। आतंकवादी हमले में कई गिरफ्तारियां होने की बात भी महिला से कही गई।
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न आएं झांसे में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि गुलशन कुमारी को धमकाने और डिजिटल अरेस्ट करने वालों की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति से अपना ओटीपी, पासवर्ड आदि साझा न करें। किसी अनजान कॉल करने वाले के झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल या मेसेज की दशा में टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें।
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प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एकता नगर निवासी गुलशन कुमारी बैंक ऑफ बड़ौदा की सेवानिवृत्त मैनेजर हैं। वह अविवाहित हैं और अपने भाई महेंद्र अरोरा के परिवार के साथ रहती हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार दोपहर उनके पास अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम पुलिस स्टेशन का अधिकारी होना बताते हुए धमकाया।
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उसने कहा कि उनके तार पहलगाम आतंकवादी हमले से जुड़े हुए हैं। बैंक मैनेजर रहते हुए उन्होंने आतंकवादियों को फंडिंग की। जांच के दौरान उनकी संलिप्तता मनी लॉन्ड्रिंग में भी पाई गई है। उनके आधार कार्ड के जरिए आईएसआईएस आतंकी संगठन ने मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदे हैं। इनका इस्तेमाल आतंकवादी हमलों में किया गया।
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कॉल करने वाले से उनसे कहा कि मामले में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के पास जाने वाली है। अगर वह खुद को बचाना चाहती हैं तो 70 लाख रुपये देने होंगे। इसके बाद से गुलशन गुमशुद रहने लगीं। भाई महेंद्र ने बहन को परेशान देखा तो उनसे कारण पूछा। महेंद्र ने बुधवार दोपहर 112 को कॉल करके इस बारे में जानकारी दी। इसके बाद एसपी सिटी मानुष पारीक और इंस्पेक्टर आशुतोष रघुवंशी गुलशन के घर पहुंचे। उन्होंने गुलशन को मुक्त कराया। संवाद
कहा- पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े तार महिला को डिजिटल अरेस्ट करने वाले से कॉल पर यह कहते हुए धमकाया कि पहलगाम आतंकवादी हमले से उसके तार जुड़ रहे हैं। इस मामले में जांच जम्मू-कश्मीर का पहलगाम पुलिस स्टेशन कर रहा है। सुरक्षा और खुफिया कारणों का हवाला देते हुए यह भी हिदायत दी कि वह जांच पूरी होने तक इस संबंध में किसी से कोई चर्चा न करे। आतंकवादी हमले में कई गिरफ्तारियां होने की बात भी महिला से कही गई।
न आएं झांसे में डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि गुलशन कुमारी को धमकाने और डिजिटल अरेस्ट करने वालों की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति से अपना ओटीपी, पासवर्ड आदि साझा न करें। किसी अनजान कॉल करने वाले के झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल या मेसेज की दशा में टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें।