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बकरीद के लिए मस्जिदों से भी जारी हुई अपील
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बरेली। सावन के चौथे सोमवार पर बकरीद पड़ने से पैदा हुए तनाव कम करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। इस तनावपूर्ण मौके पर शहर का सौहार्द बनाए रखने के लिए अब मस्जिदों के इमाम और उलमा भी आगे आए हैं। जुमे की नमाज के दौरान कई मस्जिदों से अपील की गई है कि बकरीद के दौरान ऐसा कोई काम न किया जाए जिससे शहर के अमन पर कोई असर पड़े। उलमा ने लोगों से बकरीद पर दूसरे लोगों की धार्मिक भावनाओं का भी ख्याल रखने की गुजारिश की है। कई दूसरे मुस्लिम संगठनों ने भी शहर में अमन का माहौल बनाए रखने की अपील की है।
किला की शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने ईदुल अजहा पर खास तकरीर की। उन्होंने इसमें कुर्बानी का महत्व बताते हुए अमन से यह त्योहार मनाने की अपील की। कहा, हमें अपना त्योहार मनाने के साथ दूसरे मजहब वालों का भी ख्याल रखना है। लिहाजा कुर्बानी के अलाइस और खून आदि किसी भी हालत में सड़कों और नालियों में न डाला जाए। अगर कोई ऐसा करता है तो यह मजहबी एतबार से भी गलत होगा। जामा मस्जिद के अलावा शहर और पुराना शहर की दूसरी मस्जिदों से भी इसी तरह की अपील जारी की गई। इमामों ने ईदुल अजहा का महत्व तफसील बताते हुए कहा कि लोग अपना त्योहार उत्साह के साथ मनाएं मगर दूसरे मजहबों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखें।
इसके साथ मुस्लिम राबता कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष हामिद लतीफ बब्बू ने भी ईदुल अजहा पर मुसलमानों से अपील की है कि वे अपना त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाएं लेकिन इसके साथ बिरादराने वतन की भी भावनाओं का सम्मान करें। कुर्बानी के जानवर की नुमाइश करने से परहेज करें और उनके अवशेष सार्वजनिक स्थान पर न फेंके। कुर्बानी के हिस्से शाम को बांटे जाएं तो बेहतर होगा। उन्होंने यह भी अपील की कि अगर कहीं कोई दिक्कत आए तो खुद उससे निपटने के बजाय प्रशासन को सूचना दें। कुर्बानी का वीडियो बनाकर भी वायरल न करें।
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फैजाने नियाजिया वेलफेयर सोसाइटी ख्वाजाकुतुब के कार्यालय पर हुई बैठक में भी बकरीद को अमन से मनाने की अपील की गई। सदारत करते हुए डॉ. कमाल मियां नियाजी ने कहा कि बकरीद हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। इसी वजह से हम अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार सावन का आखिरी सोमवार भी उसी दिन पड़ रहा है लिहाजा एहतियात बरत्ते हुए त्योहार के अरकान आदा करें और अफसरों का सहयोग करें। यह त्योहार अमनो अमान के साथ मनाया जाना चाहिए। बैठक में जैन मियां नियाजी, आफताब नियाजी, राशिद नियाजी, मुस्लिम नियाजी, हसीन नियाजी, हाफिज साजिद, सूफी नसीमुर्रहमान नियाजी आदि मौजूद रहे।
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किला की शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने ईदुल अजहा पर खास तकरीर की। उन्होंने इसमें कुर्बानी का महत्व बताते हुए अमन से यह त्योहार मनाने की अपील की। कहा, हमें अपना त्योहार मनाने के साथ दूसरे मजहब वालों का भी ख्याल रखना है। लिहाजा कुर्बानी के अलाइस और खून आदि किसी भी हालत में सड़कों और नालियों में न डाला जाए। अगर कोई ऐसा करता है तो यह मजहबी एतबार से भी गलत होगा। जामा मस्जिद के अलावा शहर और पुराना शहर की दूसरी मस्जिदों से भी इसी तरह की अपील जारी की गई। इमामों ने ईदुल अजहा का महत्व तफसील बताते हुए कहा कि लोग अपना त्योहार उत्साह के साथ मनाएं मगर दूसरे मजहबों की भावनाओं का पूरा ख्याल रखें।
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इसके साथ मुस्लिम राबता कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष हामिद लतीफ बब्बू ने भी ईदुल अजहा पर मुसलमानों से अपील की है कि वे अपना त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाएं लेकिन इसके साथ बिरादराने वतन की भी भावनाओं का सम्मान करें। कुर्बानी के जानवर की नुमाइश करने से परहेज करें और उनके अवशेष सार्वजनिक स्थान पर न फेंके। कुर्बानी के हिस्से शाम को बांटे जाएं तो बेहतर होगा। उन्होंने यह भी अपील की कि अगर कहीं कोई दिक्कत आए तो खुद उससे निपटने के बजाय प्रशासन को सूचना दें। कुर्बानी का वीडियो बनाकर भी वायरल न करें।
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फैजाने नियाजिया वेलफेयर सोसाइटी ख्वाजाकुतुब के कार्यालय पर हुई बैठक में भी बकरीद को अमन से मनाने की अपील की गई। सदारत करते हुए डॉ. कमाल मियां नियाजी ने कहा कि बकरीद हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। इसी वजह से हम अल्लाह की रजा के लिए कुर्बानी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार सावन का आखिरी सोमवार भी उसी दिन पड़ रहा है लिहाजा एहतियात बरत्ते हुए त्योहार के अरकान आदा करें और अफसरों का सहयोग करें। यह त्योहार अमनो अमान के साथ मनाया जाना चाहिए। बैठक में जैन मियां नियाजी, आफताब नियाजी, राशिद नियाजी, मुस्लिम नियाजी, हसीन नियाजी, हाफिज साजिद, सूफी नसीमुर्रहमान नियाजी आदि मौजूद रहे।