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लाल फाटक ओवरब्रिजः रक्षा मंत्रालय से पहुंचा अनुमति पत्र, जल्द शुरू होगा काम
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लाल फाटक पर रेलवे ने शुरू किया काम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कैंट बोर्ड अधिशासी अभियंता ने बताया कि वह प्रशासन को सौंपेंगे पत्र
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बरेली। बरेली-बदायूं रोड पर निर्माणाधीन लालफ ाटक ओवरब्रिज पर अब जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। कैंट बोर्ड के अधिशासी अभियंता आरके माहेश्वरी ने बताया कि लाल फाटक के संबंध में रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया था। रक्षा मंत्रालय ने इसे मंजूरी दे दी है। मंत्रालय का अनुमति पत्र शुक्रवार को कार्यालय में पहुंच गया है।
सेना के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन पर फं से पेच की वजह से सेतु निगम के चार पिलर नहीं बन पा रहे थे। अगस्त 2017 में शुरू हुए ओवरब्रिज को मार्च 2020 में पूरा करना था। ओवरब्रिज के लिए सेतु निगम को कैंट एरिया में करीब 6500 वर्गमीटर भूमि की जरूरत थी। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने लालफ ाटक पर जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे कराया था। रिपोर्ट में करीब 4500 वर्गमीटर जमीन कैंट बोर्ड और बाकी 2000 वर्गमीटर जमीन सेना की मिली थी। इस भूमि के मूल्य के बराबर प्रशासन द्वारा दूसरी जगह जमीन देने पर रजामंदी तो बन गई मगर लेटलतीफ ी के चलते एस्टीमेट रिवाइज करना पड़ा। 955 मीटर लंबे इस पुल के लिए वर्ष 2017 में 82.5 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। सिस्टम की लेटलतीफी के चलते इसका बजट बढ़कर अब 96.67 करोड़ हो गया है। अब अनुमति पत्र मिलने के बाद काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सेतु निगम डीपीएम वीके सेन ने बताया कि उन्हें चार पिलर तैयार करने है। यह काम आठ महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
सेना के अधिकार क्षेत्र में आने वाली जमीन पर फं से पेच की वजह से सेतु निगम के चार पिलर नहीं बन पा रहे थे। अगस्त 2017 में शुरू हुए ओवरब्रिज को मार्च 2020 में पूरा करना था। ओवरब्रिज के लिए सेतु निगम को कैंट एरिया में करीब 6500 वर्गमीटर भूमि की जरूरत थी। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने लालफ ाटक पर जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वे कराया था। रिपोर्ट में करीब 4500 वर्गमीटर जमीन कैंट बोर्ड और बाकी 2000 वर्गमीटर जमीन सेना की मिली थी। इस भूमि के मूल्य के बराबर प्रशासन द्वारा दूसरी जगह जमीन देने पर रजामंदी तो बन गई मगर लेटलतीफ ी के चलते एस्टीमेट रिवाइज करना पड़ा। 955 मीटर लंबे इस पुल के लिए वर्ष 2017 में 82.5 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। सिस्टम की लेटलतीफी के चलते इसका बजट बढ़कर अब 96.67 करोड़ हो गया है। अब अनुमति पत्र मिलने के बाद काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। सेतु निगम डीपीएम वीके सेन ने बताया कि उन्हें चार पिलर तैयार करने है। यह काम आठ महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
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