रामपुर सीआरपीएफ कैंप हमला: बीस हजार रुपये जुर्माना जमा कर मोहम्मद शरीफ भी रिहा, बरेली सेंट्रल जेल में था बंद
रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर हमले के मामले में दोषी मोहम्मद शरीफ को सात साल कैद की सजा हुई थी। वह अपनी सजा पूरी कर चुका था, लेकिन जुर्माना राशि जमा न करने पर उसकी रिहाई रुकी हुई थी।
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रामपुर के सीआरपीएफ कैंप पर हमले के मामले में सजा पूरी कर चुके मोहम्मद शरीफ को भी बरेली सेंट्रल जेल से मंगलवार शाम सात बजे रिहा कर दिया गया। परिवार के लोगों ने वकील और जेल प्रशासन की मदद से बीस हजार रुपये जुर्माना जमा कराया तो उसकी रिहाई संभव हो सकी।
सीआरपीएफ कैंप पर हमले के मामले में दो आरोपी जंग बहादुर खान और मोहम्मद शरीफ कई साल से सेंट्रल जेल बरेली में बंद थे। सोमवार शाम जंग बहादुर की रिहाई हो गई, वह एक ही मुकदमे में निरुद्ध था। जबकि मोहम्मद शरीफ दो मुकदमों में निरुद्ध था। विस्फोटक अधिनियम के मुकदमे में उसे सात साल की सजा व बीस हजार रुपये जुर्माना हुआ था। यह सजा वह पूरी कर चुका था।
वकील के जरिये जमा कराई जुर्माना राशि
सोमवार को उसकी रिहाई में जुर्माने का पेंच फंस गया था। मंगलवार को उसके परिजनों ने बीस हजार रुपये वकील के जरिये जेल प्रशासन को उपलब्ध कराए। यह रकम स्टेट बैंक के संबंधित खाते में जमा कराने के बाद कोर्ट की अनुमति से रिहाई परवाना जारी किया गया। शाम सात बजे परिवार के लोग उसे साथ लेकर चले गए।
जेल प्रशासन के मुताबिक मोहम्मद शरीफ उर्फ सुहैल उर्फ साजिद उर्फ अनवर उर्फ अली मूल रूप से रामपुर जिले के खजुरिया थाने के बदनपुरी गांव का निवासी है। जेलर नीरज कुमार ने बताया कि सेंट्रल जेल में शरीफ का आचरण संतोषजनक रहा।