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‘पुचकार’ ने अफसरों को भुलाई ‘थप्पड़’ की गूंज
बरेली।
Updated Sat, 16 Dec 2017 02:27 AM IST
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राजेश्ा अग्रवाल
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लखनऊ से संगठन के दिग्गजों की पैरवी होने पर जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर और पीसीएस अफसरों के बीत चल रहा विवाद वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने सरकारी आवास पर बैठकर निपटा दिया। वित्तमंत्री ने डीएम के जरिए भाजपा जिलाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को बुलाकर पहले समझाकर शांत किया। उनसे कहा कि सत्ता से जुड़े नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों में विवाद की वजह से सरकार की छवि खराब होती है। बरेली की भी इससे बदनामी हो रही है। इसलिए ऐेसे मामलों को ज्यादा बढ़ाना नहीं चाहिए। गलतियां जिसकी भी हैं, यह अच्छा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह मामला अब यहीं निपटाकर काम करिए। अफसर भी वित्तमंत्री के समझाने पर राजी होकर घर लौट आए।
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह 17 दिसंबर तक लखनऊ में आईएएस वीक में शामिल होने गए हैं। बृहस्पतिवार दोपहर डीएम ने अचानक फोन करके एडीएम सिटी ओपी वर्मा, एसडीएम नवाबगंज राजेश कुमार, एसीएम अरुणमणि त्रिपाठी, एसडीएम बहेड़ी ममता मालवीय के अलावा एसडीएम आंवला, नवाबगंज और मीरगंज को बुला लिया। एडीएम के साथ सभी अधिकारी वित्तमंत्री के आवास पर पहुंच गए। वहां भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर पहले से ही मौजूद थे। वित्तमंत्री ने दोनों पक्षों में वार्ता कराई तो एक-दूसरे पर आरोप लगने लगे। जिलाध्यक्ष को इस बात का दुख था कि उन पर थप्पड़ मारने का गलत आरोप लगाया गया। सत्ता से जुड़े होने के बावजूद प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। विरोधियों की बात मतगणना के दिन भी सुनी जा रही थी। अधिकारियों ने भी वित्तमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि सत्ता के नेता ही अधिकारियों का सम्मान नहीं करेंगे तो विपक्ष को और अधिक मौका मिलेगा, इसलिए भाजपा नेताओं को इसका ख्याल रखना चाहिए। वित्तमंत्री ने दोनों की पक्षों को समझाकर शांत कर दिया।
एफआईआर पर कोई बात नहीं हुई
जिलाध्यक्ष और पीसीएस अफसरों में समझौते के दौैरान एफआईआर पर कोई बात नहीं हुई है। लिखित में समझौता होने के बाद ही एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लग पाएगी, इसलिए इस मुद्दे पर फिर से एक बार बात होनी है। इसके बाद ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ लिखे गए मुकदमे को खत्म किया जा सकेगा।
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नवाबगंज प्रकरण में वित्तमंत्री ने दोनों पक्षों में बैठाकर समझौता करा दिया है। इसके बाद हमारा आंदोलन खत्म हो गया है। इसलिए पीसीएस अफसरों ने काली पट्टी बांधकर काम करना बंद कर दिया है। -ओपी वर्मा, प्रभारी डीएम
भाजपा जिलाध्यक्ष और एसडीएम नवाबगंज के बीच मामूली विवाद था। किसी की बड़ी गलती नहीं थी। दोनों को बैठाकर गलत फहमियां दूर करा दी गई हैं। अब दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है। - राजेश अग्रवाल, वित्तमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
मैं अभी लखनऊ से घर नहीं पहुंच पाया हूं। नवाबगंज मामले में कुछ नहीं कहूंगा। बड़े नेता ही इस मामले में बोलेंगे। वित्तमंत्री जी ही कुछ बता सकते हैं। उनसे ही पूछ लीजिए। -रवींद्र सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
यह था नवाबगंज प्रकरण
नगर पालिका परिषद, नवाबगंज की मतगणना के दौरान एसडीएम राजेश कुमार और भाजपा जिलाध्यक्ष में विवाद हो गया था। जिलाध्यक्ष ने एडीएम नवाबगंज पर अपने भाई की पत्नी प्रेमलता राठौर को पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव हराने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया था। जिलाध्यक्ष ने गुस्से में एसडीएम ने हाथ खींचने की कोशिश की थी, लेकिन जिलाध्यक्ष पर थप्पड़ मारने का आरोप लगाकर पीसीएस अधिकारियोें ने आंदोलन शुरू कर दिया था। एसडीएम की ओर से भाजपा जिलाध्यक्ष, उनके भाई और समर्थकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमले और एससी एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज है।
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह 17 दिसंबर तक लखनऊ में आईएएस वीक में शामिल होने गए हैं। बृहस्पतिवार दोपहर डीएम ने अचानक फोन करके एडीएम सिटी ओपी वर्मा, एसडीएम नवाबगंज राजेश कुमार, एसीएम अरुणमणि त्रिपाठी, एसडीएम बहेड़ी ममता मालवीय के अलावा एसडीएम आंवला, नवाबगंज और मीरगंज को बुला लिया। एडीएम के साथ सभी अधिकारी वित्तमंत्री के आवास पर पहुंच गए। वहां भाजपा जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर पहले से ही मौजूद थे। वित्तमंत्री ने दोनों पक्षों में वार्ता कराई तो एक-दूसरे पर आरोप लगने लगे। जिलाध्यक्ष को इस बात का दुख था कि उन पर थप्पड़ मारने का गलत आरोप लगाया गया। सत्ता से जुड़े होने के बावजूद प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। विरोधियों की बात मतगणना के दिन भी सुनी जा रही थी। अधिकारियों ने भी वित्तमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि सत्ता के नेता ही अधिकारियों का सम्मान नहीं करेंगे तो विपक्ष को और अधिक मौका मिलेगा, इसलिए भाजपा नेताओं को इसका ख्याल रखना चाहिए। वित्तमंत्री ने दोनों की पक्षों को समझाकर शांत कर दिया।
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एफआईआर पर कोई बात नहीं हुई
जिलाध्यक्ष और पीसीएस अफसरों में समझौते के दौैरान एफआईआर पर कोई बात नहीं हुई है। लिखित में समझौता होने के बाद ही एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लग पाएगी, इसलिए इस मुद्दे पर फिर से एक बार बात होनी है। इसके बाद ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ लिखे गए मुकदमे को खत्म किया जा सकेगा।
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नवाबगंज प्रकरण में वित्तमंत्री ने दोनों पक्षों में बैठाकर समझौता करा दिया है। इसके बाद हमारा आंदोलन खत्म हो गया है। इसलिए पीसीएस अफसरों ने काली पट्टी बांधकर काम करना बंद कर दिया है। -ओपी वर्मा, प्रभारी डीएम
भाजपा जिलाध्यक्ष और एसडीएम नवाबगंज के बीच मामूली विवाद था। किसी की बड़ी गलती नहीं थी। दोनों को बैठाकर गलत फहमियां दूर करा दी गई हैं। अब दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है। - राजेश अग्रवाल, वित्तमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
मैं अभी लखनऊ से घर नहीं पहुंच पाया हूं। नवाबगंज मामले में कुछ नहीं कहूंगा। बड़े नेता ही इस मामले में बोलेंगे। वित्तमंत्री जी ही कुछ बता सकते हैं। उनसे ही पूछ लीजिए। -रवींद्र सिंह, जिलाध्यक्ष, भाजपा
यह था नवाबगंज प्रकरण
नगर पालिका परिषद, नवाबगंज की मतगणना के दौरान एसडीएम राजेश कुमार और भाजपा जिलाध्यक्ष में विवाद हो गया था। जिलाध्यक्ष ने एडीएम नवाबगंज पर अपने भाई की पत्नी प्रेमलता राठौर को पालिकाध्यक्ष पद का चुनाव हराने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया था। जिलाध्यक्ष ने गुस्से में एसडीएम ने हाथ खींचने की कोशिश की थी, लेकिन जिलाध्यक्ष पर थप्पड़ मारने का आरोप लगाकर पीसीएस अधिकारियोें ने आंदोलन शुरू कर दिया था। एसडीएम की ओर से भाजपा जिलाध्यक्ष, उनके भाई और समर्थकों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमले और एससी एसटी एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज है।