Bareilly News: प्रियांगी के कातिल इमरान को उम्रकैद की सजा, शादी करने से इनकार पर की थी हत्या
बरेली के प्रेम नगर क्षेत्र में 10 साल पहले प्रियांगी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अदालत ने इमरान को दोषी पाया। बुधवार को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सजा सुनते ही इमरान के चेहरे पर पसीना आ गया।
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बरेली में 10 साल पूर्व हुए शहर के चर्चित प्रियांगी हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश कुमारी अफशॉ की अदालत ने दोषी इमरान को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या के बाद जब से इमरान पकड़ा गया है तबसे जेल में ही है।
प्रेमनगर के शास्त्रीनगर निवासी राजेश गंगवार की बीएड पास बेटी प्रियांगी 5 नवंबर 2014 को दवा लेने घर से निकली थी। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल सका। पिता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन की। इसके बाद पुलिस ने तिलियापुर गांव के इमरान खां को पकड़ा। पहले तो इमरान पुलिस को गुमराह करता रहा, जिस पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया।
पिता राजेश गंगवार के आरोपी को पकड़ने की मांग पर प्रेमनगर पुलिस ने दोबारा इमरान को पकड़कर छानबीन की। इसके बाद इमरान के खिलाफ साक्ष्य मिले, जिस पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। सख्ती करने पर प्रियांगी के आत्महत्या करने की बात कहते हुए प्रियांगी की लाश को किला नदी के पास बिलवा पुल किनारे एक गड्ढे से बरामद कराया।
पोस्टमार्टम में हुआ था हत्या का खुलासा
पोस्टमार्टम के दौरान पता चला कि प्रियांगी की गला दबाकर हत्या की गई थी। इस मामले में पुलिस की तरफ से इमरान के भाई सलमान, दोस्त अकील उर्फ गुड्डू, मोहम्मद अहमद को भी आरोपी बनाया गया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनूप कोहरवाल की तरफ से कहा गया कि इमरान ने 23 साल की युवती को फंसाकर उस पर शादी के लिए दबाव बनाया। शादी करने से इनकार पर दुपट्टे से गला दबाकर उसकी ऑफिस में हत्या कर दी।
साक्ष्य मिटाने के लिए शव को गड्ढे में दबा दिया। इसलिए दोषी का कठोर दंड दिया जाए। अदालत ने साक्ष्य व गवाहों के आधार पर इमरान को दोषी करार दिया जबकि चारों सह आरोपियों को बरी कर दिया। बुधवार को इमरान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस दौरान इमरान अदालत में कटघरे में ही मौजूद रहा। सजा सुनते ही उसके चेहरे पर पसीना आ गया।
बमुश्किल गवाही देने को राजी हुई थी प्रियांगी की दोस्त: एडीजीसी
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनूप कोहरवाल ने बताया शुरू से ही वह इस मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। मुकदमे में प्रियांगी की दोस्त की भी गवाही थी। अदालत में जब गवाही चल रही थी इसी दौरान उसकी शादी होने वाली थी। इस कारण वह गवाही देने से बच रही थी।
तब उन्होंने उसे बहुत समझाया व हिम्मत बंधाई। अपनी दोस्त को न्याय दिलाने की बात कही तब वह मानी और अदालत में गवाही दी। बताया कि प्रियांगी उसे लेकर ही इमरान के कार्यालय में गई थी। करीब डेढ़ घंटे तक वह उसके साथ बैठी रही। यही से तय हो गया कि हत्या कार्यालय में ही हुई है।
इमरान का डीडीपुरम के पास फाइनेंस कंपनी का कार्यालय था। प्रियांगी उसी में काम करती थी। छानबीन के दौरान पुलिस ने जब कार्यालय के आसपास के सीसीटीवी देखे तो पता चला कि सुबह 6.20 बजे क्रिकेट बैग में रखकर ये लोग प्रियांगी की लाश को ऑटो से ले गए। सुबह लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। उन्हें लगा लड़के क्रिकेट खेलने जा रहे हैं।
बोले पिता- न्याय मिला, लेकिन साथियों का छूटने का मलाल
प्रियांगी के पिता राजेश गंगवार ने बताया कि मुकदमे में उन्होंने व उनकी पत्नी ने गवाही दी। पुलिस ने पहले इमरान को पकड़कर छोड़ दिया था लेकिन जब बाद में अधिकारियों से शिकायत की तब उसे दोबारा पकड़ा। इसी इमरान ने लाश बरामद कराई। राजेश ने कहा कि मुख्य आरोपी को सजा मिली इससे संतुष्टि है लेकिन साथियों के बचने का मलाल रहेगा।