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Bareilly News: मूक-बधिर प्रमाणपत्रों के सत्यापन की तैयारी
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बरेली। हरियाणा के युवक का बरेली से फर्जी मूक-बधिर प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अलर्ट हो गए हैं। पूर्व में जारी प्रमाणपत्रों के सत्यापन की तैयारी है। संदिग्ध प्रतीत होने पर संबंधित लाभार्थी की जांच भी कराई जा सकती है।
फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने सीएमओ कार्यालय के दिव्यांग पटल के ऑपरेटर कुलदीप यादव को साथी ललित कुमार के साथ हिरासत में लिया था। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने प्रकरण में सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह से भी जानकारी ली थी। प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने वाले जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. एलके सक्सेना, नोडल डॉ. राकेश के भी बयान दर्ज किए थे।
डॉक्टरों ने मूक-बधिरता की जांच की व्यवस्था नहीं होने से बाहर से प्रमाणपत्र बनने की बात कही थी। आवेदकों के निवास, शहर, जिला, राज्य का सत्यापन आधार कार्ड और ऑनलाइन दर्ज ब्योरे से होता है। नियमानुसार हरियाणा के युवक का बरेली से दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बन सकता। बावजूद इसके सर्टिफिकेट बना। इसी आधार पर पूर्व में जारी प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा।
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यह है सर्टिफिकेट जारी होने की पूरी प्रक्रिया
यूडीआईडी पोर्टल पर आवेदन के बाद अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन करती है। मानक पूरे न होने या कोई अन्य खामी पाए जाने पर उसे सुधारने का सुझाव देते हैं। किसी अन्य जिले के निवासी का आवेदन मिलने पर उसे संबंधित जिले की मेडिकल अथॉरिटी को भेजा जाता है। इसके बाद मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता के दावे की जांच कर मूल्यांकन रिपोर्ट देता है। फिर प्रमाणपत्र जारी होता है।
सपोर्ट स्टाफ पर ठेकेदारी तक के काम
प्रकरण के आरोपी आउटसोर्स कर्मी कुलदीप को हिरासत में लिए जाने के बाद कार्यालय का अन्य सपोर्ट स्टाफ भी संदेह के दायरे में है। सपोर्ट स्टाफ यानी चतुर्थ श्रेणी पद पर तैनात कुलदीप को दिव्यांग प्रमाणपत्र पटल पर डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम दिया गया। कई नोडल अफसर और लिपिक बदलेए पर कुलदीप डटा रहा। पटल पर तैनात रहे दो लिपिकों की भूमिका भी संदिग्ध है। बताते हैं कि कार्यालय के अन्य सपोर्ट स्टाफ पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलों से लेकर एनएचएम के सामान की सप्लाई तक के काम कराए जाते हैं। एक सपोर्ट स्टाफ पर खुद की फर्म बनाकर एनएचएम के तहत सामान सप्लाई करने की शिकायतें हैं। अब इन्हें कार्यों से हटाने, मूल तैनाती पर भेजने की चर्चाएं हैं।
वर्जन
प्रकरण संज्ञान में आने पर पूर्व में जारी सर्टिफिकेट का सत्यापन कराया जाएगा। प्रमाणपत्र संदिग्ध प्रतीत होने पर कार्ड धारक की जांच भी कराई जा सकती है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने सीएमओ कार्यालय के दिव्यांग पटल के ऑपरेटर कुलदीप यादव को साथी ललित कुमार के साथ हिरासत में लिया था। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने प्रकरण में सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह से भी जानकारी ली थी। प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने वाले जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. एलके सक्सेना, नोडल डॉ. राकेश के भी बयान दर्ज किए थे।
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डॉक्टरों ने मूक-बधिरता की जांच की व्यवस्था नहीं होने से बाहर से प्रमाणपत्र बनने की बात कही थी। आवेदकों के निवास, शहर, जिला, राज्य का सत्यापन आधार कार्ड और ऑनलाइन दर्ज ब्योरे से होता है। नियमानुसार हरियाणा के युवक का बरेली से दिव्यांग सर्टिफिकेट नहीं बन सकता। बावजूद इसके सर्टिफिकेट बना। इसी आधार पर पूर्व में जारी प्रमाणपत्रों का सत्यापन होगा।
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यह है सर्टिफिकेट जारी होने की पूरी प्रक्रिया
यूडीआईडी पोर्टल पर आवेदन के बाद अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन करती है। मानक पूरे न होने या कोई अन्य खामी पाए जाने पर उसे सुधारने का सुझाव देते हैं। किसी अन्य जिले के निवासी का आवेदन मिलने पर उसे संबंधित जिले की मेडिकल अथॉरिटी को भेजा जाता है। इसके बाद मेडिकल बोर्ड दिव्यांगता के दावे की जांच कर मूल्यांकन रिपोर्ट देता है। फिर प्रमाणपत्र जारी होता है।
सपोर्ट स्टाफ पर ठेकेदारी तक के काम
प्रकरण के आरोपी आउटसोर्स कर्मी कुलदीप को हिरासत में लिए जाने के बाद कार्यालय का अन्य सपोर्ट स्टाफ भी संदेह के दायरे में है। सपोर्ट स्टाफ यानी चतुर्थ श्रेणी पद पर तैनात कुलदीप को दिव्यांग प्रमाणपत्र पटल पर डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम दिया गया। कई नोडल अफसर और लिपिक बदलेए पर कुलदीप डटा रहा। पटल पर तैनात रहे दो लिपिकों की भूमिका भी संदिग्ध है। बताते हैं कि कार्यालय के अन्य सपोर्ट स्टाफ पर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइलों से लेकर एनएचएम के सामान की सप्लाई तक के काम कराए जाते हैं। एक सपोर्ट स्टाफ पर खुद की फर्म बनाकर एनएचएम के तहत सामान सप्लाई करने की शिकायतें हैं। अब इन्हें कार्यों से हटाने, मूल तैनाती पर भेजने की चर्चाएं हैं।
वर्जन
प्रकरण संज्ञान में आने पर पूर्व में जारी सर्टिफिकेट का सत्यापन कराया जाएगा। प्रमाणपत्र संदिग्ध प्रतीत होने पर कार्ड धारक की जांच भी कराई जा सकती है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ