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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Politicians now have less leaders in politics.

सियासत में अब नेता कम हैं.. इन्वेस्टर बढ़ गए

Sat, 11 Nov 2017 02:03 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sat, 11 Nov 2017 02:03 AM IST
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हमारा दौर बिल्कुल अलग था.. सात बार चुनाव लड़ा तीन बार आंवला से सांसद चुना गया, लेकिन 50 हजार रुपये भी कभी खर्च नहीं हुए। भाजपा के कैडर से जुड़ा था। बरेली से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बहुत सम्मान मिलता था। जब सांसद था तब कई बार मोटी रकम के ऑफर भी मिले, लेकिन ठुकरा दिए। डर लगता था कि दोबारा चुनाव मैदान में जनता के सामने क्या मुंह लेकर जाऊंगा, लेकिन आजकल की सियासत की बातें सुनकर तो उलझन होने लगती है। अब तो नेता नहीं इन्वेस्टर चुनाव लड़ रहे हैं। वह इतना पैसा चुनाव में खर्च कर देते हैं कि उन्हें कमाने में ही पांच साल गुजर जाते हैं। 
यह कहना है कि आंवला के पूर्व सांसद राजवीर सिंह का। संजय कम्युनिटी हाल के सामने रह रहे राजवीर सिंह 1989, 1991 और 1998 में तीन बार बीजेपी से सांसद रहे हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि बीजेपी बदलकर मोदीमय हो गई है। स्थानीय निकाय जैसे लोकल चुनाव के टिकट सेंट्रल लेबल से होना आश्चर्य की बात है। भाजपा में किसी को बोलते की इजाजत नहीं है, जो बोलेगा निकाल दिया जाएगा। मुलायम पर यह कहकर तंज किया कि आज के दौर में बाप बेटे को पार्टी से निकाल रहा है। 
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उन्होंने कहा कि भाजपा के चुनाव मैदान में होने के बाद भी उन्हें मुस्लिमों और यादवों के वोट मिलते थे। कल्याण सिंह के दौैर में फरीदपुर की एक चुनावी जनसभा में उन्होंने मंच से ही कह दिया कि मेरी कोई एक गलती बताकर दिखाओ। भीड़ में से एक बुजुर्ग उठकर आ गए। इस पर कल्याण सिंह भी घबरा गए थे। बुजुर्ग ने कहा कि राजवीर तुम्हारी कोई गलती नहीं है। तब जनता से रिश्ते बनाकर चुनाव लड़ा जाता था। फरीदपुर इलाके की एक महिला ने उनके चुनाव के लिए थैली में पैसा इकट्ठा कर रखा था। नामांकन भरने के अगले ही दिन वह उन्हें देकर जाती थी। थैली में वह रोज एक रुपया डालती थी। जनसभा के दौैरान मंच से उतरकर वह जनता से चंदा मांग लेते थे। जनता के पैसे ही चुनाव लड़कर संसद तक पहुंचते थे। इसके बाद उनके लिए ही काम करते थे। आजकल बिना पैसा इन्वेस्ट किए सियासत करना मुश्किल है। इसलिए कोई काम नहीं हो पाता है। सियासत में पैसा इन्वेस्ट करने वाला पहले अपना पैसा निकालता है। सियासत में अच्छे लोगों को आना चाहिए।   
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