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वित्त विभाग में भ्रष्टाचार था और है पर अब शिकायत नहीं करेंगे
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बरेली। राजेश अग्रवाल ने वित्त मंत्री का पद छोड़ा तो अब गड़े मुर्दे भी उखड़ने लगे हैं। पिछले साल अगस्त में शहर विधायक डॉ. अरुण और आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने तत्कालीन वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल को चिट्ठी लिखकर वित्त विभाग में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया था। बरेली के मुख्य कोषाधिकारी के भी कई कारनामों का जिक्र करते हुए विजिलेंस जांच कराने को कहा था मगर राजेश अग्रवाल ने इस शिकायत पर ध्यान नहीं दिया। इत्तफाक की बात है कि साल भर बाद अगस्त में ही राजेश ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। डॉ. अरुण का अब कहना है कि उन्हें आज भी इस बात का खेद है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई और वित्त विभाग में भ्रष्ट अफसर जहां के तहां जमे हुए हैं। हालांकि अब दोबारा वह इस मामले में शिकायत नहीं करेंगे।
अगस्त 2018 में शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार और आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने वित्तमंत्री के नाम एक पत्र लिखकर जिला कोषागार और वित्त विभाग में फैले भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए विजिलेंस से जांच कराने और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था। इस पत्र में बरेली के जिला कोषागार को खास तौर पर घेरा गया था। पत्र में कहा गया था कि जिला कोषागार में भ्रष्ट अफसरों का बोलबाला है। सरकार की छवि खराब न हो इसके लिए उनके खिलाफ विजिलेंस जांच कराकर कार्रवाई किया जाना जरूरी है। विधायक ने पत्र में यह भी जिक्र किया था कि बरेली में कार्यरत मुख्य कोषाधिकारी रामपुर में इसी पद पर तैनाती के दौरान दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे। ऐसी ही शिकायतें अब बरेली में भी मिल रही हैं, लिहाजा जांच कराया जाना जरूरी है। वित्त मंत्री रहते हुए राजेश अग्रवाल ने इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की तो धर्मेंद्र कश्यप ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था। इसके बाद अब राजेश अग्रवाल का तो इस्तीफा हो गया मगर आरोपी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पिछले साल अगस्त में मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय और वित्त विभाग में फैले भ्रष्टाचार की कई शिकायतें प्रमाणों के साथ मेरे पास आई थीं। इसके बाद मैंने तत्कालीन वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से विजिलेंस जांच कराने का आग्रह किया था, हालांकि मेरे पत्र पर कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि आरोपी अधिकारी आज भी जहां के तहां जमे हुए हैं। - डॉ. अरुण कुमार, नगर विधायक
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अगस्त 2018 में शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार और आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने वित्तमंत्री के नाम एक पत्र लिखकर जिला कोषागार और वित्त विभाग में फैले भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए विजिलेंस से जांच कराने और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया था। इस पत्र में बरेली के जिला कोषागार को खास तौर पर घेरा गया था। पत्र में कहा गया था कि जिला कोषागार में भ्रष्ट अफसरों का बोलबाला है। सरकार की छवि खराब न हो इसके लिए उनके खिलाफ विजिलेंस जांच कराकर कार्रवाई किया जाना जरूरी है। विधायक ने पत्र में यह भी जिक्र किया था कि बरेली में कार्यरत मुख्य कोषाधिकारी रामपुर में इसी पद पर तैनाती के दौरान दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे। ऐसी ही शिकायतें अब बरेली में भी मिल रही हैं, लिहाजा जांच कराया जाना जरूरी है। वित्त मंत्री रहते हुए राजेश अग्रवाल ने इस पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की तो धर्मेंद्र कश्यप ने मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा था। इसके बाद अब राजेश अग्रवाल का तो इस्तीफा हो गया मगर आरोपी अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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पिछले साल अगस्त में मुख्य कोषाधिकारी कार्यालय और वित्त विभाग में फैले भ्रष्टाचार की कई शिकायतें प्रमाणों के साथ मेरे पास आई थीं। इसके बाद मैंने तत्कालीन वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल से विजिलेंस जांच कराने का आग्रह किया था, हालांकि मेरे पत्र पर कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि आरोपी अधिकारी आज भी जहां के तहां जमे हुए हैं। - डॉ. अरुण कुमार, नगर विधायक
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