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कल चमन था.. आज इक सहरा हुआ
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बरेली। कैंट इलाके में रेलवे जंक्शन के पास सिंचाई विभाग के वीआईपी गेस्ट हाउस की रौनक दो दिन पहले तक देखने लायक हुआ करती थी, लेकिन बुधवार को यह गेस्ट हाउस सन्नाटे में डूबा नजर आया। चार कमरों वाले इस खूबसूरत गेस्ट हाउस पर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के कुछ रिश्तेदारों और नजदीकी लोगों का स्थायी तौर पर कब्जा था। गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड के मुताबिक ढाई साल का वक्त गुजर चुका है जबसे यहां किसी गेस्ट को ठहरना नसीब नहीं हुआ। चर्चा आम थी कि सिंचाई विभाग के ट्रांसफर-पोस्टिंग और टेंडरों के बड़े मामले यही निपटते हैं। मगर मंगलवार को अचानक इस गेस्ट हाउस की सारी रौनक जाती रही। पता चला कि देर रात सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के इस्तीफे की खबर आम होते ही यहां सालों से डेरा जमाए लोग अपना बोरियाबिस्तर समेटकर चुपचाप निकल गए।
चारों तरफ हरियाली से घिरे कैंट के एकांत माहौल में स्थित इस गेस्ट हाउस में एक बड़ा सा लॉन है। अब तक यहां पूरे दिन चहल-पहल रहती थी। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह खुद यहां सप्ताह में शनिवार और रविवार को पहुंचते थे। शनिवार को देर शाम यहां पहुंचने के बाद वह अगले दिन तय कार्यक्रम के मुताबिक लोगों से मिलते थे। कभी-कभार यहां बैठक होने की औपचारिकता भी पूरी होती थी। फिर सिंचाई मंत्री अपने पैतृक गांव आंवला के गुलड़िया गौरीशंकर निकल जाते थे। सिंचाई मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद धर्मपाल सिंह ने यह गेस्ट हाउस किसी भी वीआईपी या गेस्ट को एलॉट करने पर पाबंदी लगा दी थी। इससे पहले जिला प्रशासन गेस्ट हाउस के तीन कमरे अपने स्तर से एलॉट करते थे जबकि एक कमरा विभागीय अफसरों के कब्जे में रहता था, लेकिन मंत्री की हिदायत के बाद पिछले 30 महीनों से इस गेस्ट हाउस में बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई। बुधवार सुबह इस गेस्ट हाउस में सन्नाटा छाया हुआ था। इधर-उधर सिंचाई विभाग के कुछ माली और कर्मचारी जरूर काम करते नजर आए। एक कार गेस्ट हाउस परिसर में खड़ी थी जो मंत्री के किसी नजदीकी की थी। गेस्ट हाउस में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि गेस्ट हाउस में ठहरे ज्यादातर लोग मंगलवार देर रात ही सारे कमरे खाली करके चुपचाप निकल गए। अब गेस्टहाउस में कोई भी नहीं है।
40 किलो दूध रोज खर्च होता था चाय-कॉफी बनाने में
सिंचाई विभाग के इस गेस्ट हाउस में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के इस्तीफे से पहले किस कदर रौनक रहती थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोजाना करीब 40 किलो दूध सिर्फ चाय और कॉफी बनाने के लिए मंगाया जाता था। गेस्ट हाउस के कर्मचारियों के मुताबिक तड़के से देर रात तक गेस्ट हाउस का किचन व्यस्त रहता था। कई कर्मचारियों की यहां शिफ्टों में ड्यूटी रहती थी। पता चला कि गेस्ट हाउस के रखरखाव पर खर्च करने के लिए भी कोई बजट नहीं था लेकिन फिर भी सिंचाई मंत्री के प्रोटोकॉल और लोगों की आवभगत के लिए गेस्ट हाउस का महीने का खर्च लाखों में था। ये सारा पैसा विभागीय इंजीनियरों की जेब से निकलता था।
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आरटीआई: चीफ इंजीनियर से पूछा, ढाई सालों में गेस्ट हाउस पर कितना खर्च
धर्मपाल सिंह ने मंगलवार को सिंचाई मंत्री पद से इस्तीफा दिया और बुधवार को ही उनके विरोधी सक्रिय हो गए। बुधवार को एक शख्स ने आरटीआई के तहत यह जानकारी देने के लिए आवेदन कर दिया कि पिछले ढाई सालों में गेस्ट हाउस में किन मदों में कितना खर्च हुआ है। यह आरटीआई चीफ इंजीनियर प्रवीण कुमार के कार्यालय में दाखिल की गई है। दरअसल सिंचाई विभाग के अफसर इस बात की जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं कि गेस्ट हाउस में अलग-अलग मदों में कितना पैसा खर्च हुआ है।
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चारों तरफ हरियाली से घिरे कैंट के एकांत माहौल में स्थित इस गेस्ट हाउस में एक बड़ा सा लॉन है। अब तक यहां पूरे दिन चहल-पहल रहती थी। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह खुद यहां सप्ताह में शनिवार और रविवार को पहुंचते थे। शनिवार को देर शाम यहां पहुंचने के बाद वह अगले दिन तय कार्यक्रम के मुताबिक लोगों से मिलते थे। कभी-कभार यहां बैठक होने की औपचारिकता भी पूरी होती थी। फिर सिंचाई मंत्री अपने पैतृक गांव आंवला के गुलड़िया गौरीशंकर निकल जाते थे। सिंचाई मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद धर्मपाल सिंह ने यह गेस्ट हाउस किसी भी वीआईपी या गेस्ट को एलॉट करने पर पाबंदी लगा दी थी। इससे पहले जिला प्रशासन गेस्ट हाउस के तीन कमरे अपने स्तर से एलॉट करते थे जबकि एक कमरा विभागीय अफसरों के कब्जे में रहता था, लेकिन मंत्री की हिदायत के बाद पिछले 30 महीनों से इस गेस्ट हाउस में बुकिंग पूरी तरह बंद कर दी गई। बुधवार सुबह इस गेस्ट हाउस में सन्नाटा छाया हुआ था। इधर-उधर सिंचाई विभाग के कुछ माली और कर्मचारी जरूर काम करते नजर आए। एक कार गेस्ट हाउस परिसर में खड़ी थी जो मंत्री के किसी नजदीकी की थी। गेस्ट हाउस में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि गेस्ट हाउस में ठहरे ज्यादातर लोग मंगलवार देर रात ही सारे कमरे खाली करके चुपचाप निकल गए। अब गेस्टहाउस में कोई भी नहीं है।
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40 किलो दूध रोज खर्च होता था चाय-कॉफी बनाने में
सिंचाई विभाग के इस गेस्ट हाउस में सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के इस्तीफे से पहले किस कदर रौनक रहती थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रोजाना करीब 40 किलो दूध सिर्फ चाय और कॉफी बनाने के लिए मंगाया जाता था। गेस्ट हाउस के कर्मचारियों के मुताबिक तड़के से देर रात तक गेस्ट हाउस का किचन व्यस्त रहता था। कई कर्मचारियों की यहां शिफ्टों में ड्यूटी रहती थी। पता चला कि गेस्ट हाउस के रखरखाव पर खर्च करने के लिए भी कोई बजट नहीं था लेकिन फिर भी सिंचाई मंत्री के प्रोटोकॉल और लोगों की आवभगत के लिए गेस्ट हाउस का महीने का खर्च लाखों में था। ये सारा पैसा विभागीय इंजीनियरों की जेब से निकलता था।
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आरटीआई: चीफ इंजीनियर से पूछा, ढाई सालों में गेस्ट हाउस पर कितना खर्च
धर्मपाल सिंह ने मंगलवार को सिंचाई मंत्री पद से इस्तीफा दिया और बुधवार को ही उनके विरोधी सक्रिय हो गए। बुधवार को एक शख्स ने आरटीआई के तहत यह जानकारी देने के लिए आवेदन कर दिया कि पिछले ढाई सालों में गेस्ट हाउस में किन मदों में कितना खर्च हुआ है। यह आरटीआई चीफ इंजीनियर प्रवीण कुमार के कार्यालय में दाखिल की गई है। दरअसल सिंचाई विभाग के अफसर इस बात की जानकारी होने से इनकार कर रहे हैं कि गेस्ट हाउस में अलग-अलग मदों में कितना पैसा खर्च हुआ है।