बरेली के कुतुबखाने: यहां हाथों में मोबाइल नहीं, किताबें मिलेंगी; आप भी हैं पढ़ने के शौकीन तो चले आइए
इंटरनेट के दौर में बरेली के कुतुबखानों यानि पुस्तकालयों में किताबें पढ़ने वाले लोगों की अच्छी खासी भीड़ रहती है। कैंट स्थित युग्वीणा लाइब्रेरी, जिला पुस्तकालय में कई लोग अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा बिताते हैं।
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किताब...कई पन्नों के साथ एक लंबे अनुभव को खुद में सहेजे हुआ एक ऐसा आईना है, जिसमें देखकर हर शख्स खुद को संवार सकता है, लेकिन बदलते वक्त के साथ किताब की जगह मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे उपकरणों ने ली है। बावजूद इसके आज भी बरेली के कुतुबखानों यानि पुस्तकालयों में लोगों की अच्छी खासी भीड़ रहती है।
कैंट स्थित युग्वीणा लाइब्रेरी, जिला पुस्तकालय में कई लोग अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा बिताते हैं। ये लाइब्रेरी आज भी सफल हैं। इसकी बड़ी वजह है कि वक्त के साथ प्रबंधन ने इन्हें अपडेट किया। रख-रखाव बेहतर रखा। नए लेखकों की किताबों को जगह दी।
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जिला पुस्तकालय की प्रभारी श्वेता बताती हैं कि काफी लोग किताबें पढ़ने नियमित आते हैं। पूरा-पूरा दिन रहकर पढ़ते हैं। इसमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले ज्यादा रहते हैं। कई लोग साहित्य को भी पढ़ना पसंद करते हैं। लोग पुराने लेखकों के बजाय नए को पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसी लाइब्रेरी लोगों की पसंद रहती हैं, जिनमें वक्त के साथ नई रचनाएं, संपादित लेख शामिल किए जाते रहें।
नए की तलाश में गुजरता है वक्त
शारिक शबाब जैदी ने बताया कि नए शब्दों की तलाश, नया लहजा, या यूं कहूं की कलात्मकता की तलाश में लाइब्रेरी में बैठता हूं। हर दिन जब तमाम नए लेखकों को पढ़कर लाइब्रेरी से निकलता हूं तो तो काफी कुछ सीखने को मिलता है। तर्क करने के लिए सही ज्ञान हासिल होता है।वंश चतुर्वेदी का कहना है कि किताबें व्यक्ति की अच्छी दोस्त होती हैं। कोई भी व्यक्ति जब किताब पढ़ता है तो उसकी सभी इंद्रियां उस किताब को पढ़ रही होती हैं। उस वक्त वह किताब सजीव हो जाती है। मुझे किताब को पढ़ने से ज्यादा उसे जीना पसंद है।
अंशिका जौहरी कहती हैं कि वक्त के साथ डिजिटल लाइब्रेरी का क्रेज बढ़ा है। हालांकि स्वास्थ्य के लिहाज से यह सही नहीं है, लेकिन बाकी कई चीजों में यह ठीक भी है। लाइब्रेरी के लिए एक बेहतर रख-रखाव चाहिए। व्यवस्था चाहिए। समय चाहिए। इसकी तुलना में सहज है उन्हें फोन में डाउनलोड करके पढ़ना। तकनीकी ने पॉडकास्ट और शॉर्ट स्टोरी के जरिये तमाम विकल्प दिए हैं जो कि बेहतर हैं।
शहर के स्कूलों में किताब पसंदगी का हाल
शहर के स्कूलों में लाइब्रेरी और उन्हें पसंद करने वालों का हाल कुछ खास अच्छा नहीं है। माध्यमिक शिक्षा से जुड़े करीब 145 स्कूलों में लाइब्रेरी हैं, लेकिन उन्हें बेहतर रख-रखाव की दरकार है। छात्र-छात्राओं को विषयपरक किताबों के अलावा साहित्य आदि से जुड़ी किताबें पढ़ने में ज्यादा रुचि नहीं है।इस्लामियां इंटर कॉलेज
इस्लामियां इंटर कॉलेज में लाइब्रेरी में मशहूर लेखिका इस्मत चुगताई की कुछेक किताबें मौजूद हैं। इस्मत आपा का स्कूल से एक जुड़ाव भी रहा है। उसके बाद भी उन किताबों से छात्राएं रूबरू नहीं हुईं। पुस्तकालय की ज्यादातर किताबों में दीमक लग चुकी है। स्कूल की प्रधानाचार्य चमन जहां का कहना है कि स्कूल में इस्मत चुगताई की बहुत कम किताबें ही बची हैं, जो लोग ले गए उन्होंने वापस नहीं कीं।द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज
द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज में भी वर्षों पुरानी एक लाइब्रेरी बनी हुई है। लोग बताते हैं कि लाइब्रेरी में मधुशाला जैसी कालजयी रचनाएं हैं, लेकिन लंबे समय से उन्हें किसी ने खोलकर देखा तक नहीं। स्कूल की छात्राएं कोर्स की किताबों में ही मशगूल रहती हैं। शिक्षकों को भी खास रुचि नहीं है। कांच के शोकेस में बंद किताबें मानो कहती हों कभी हमारे भी पन्ने उलट लिए जाएं।
जीआईसी
जीआईसी में भी लाइब्रेरी का कोई रखरखाव नहीं है। किताबें जिन अलमारियों में बंद हैं, उन्हें सालों से खोला नहीं गया। धूल की एक मोटी परत चारों ओर जमी है। लंबे समय से अच्छे लेखकों ने लाइब्रेरी में दस्तक भी नहीं दी। बरसों पुरानी किताबें अलमारियों में कैद हैं। कुछ एक किताबें बढ़ती भी हैं तो किसी संस्था के द्वारा दान किए जाने पर। यही हाल बाकी माध्यमिक स्कूलों का भी है।
अब नहीं आता रख-रखाव के लिए बजट
माध्यमिक स्कूलों को काफी समय पहले तक रखरखाव के लिए बजट दिया जाता था, जो कि अब लंबे समय से मिलना बंद हो गया है। विभाग का कहना है कि अब कंपोजिट ग्रांट दी जाती है उसी से विद्यालय के जरूरी काम पूरे करने होते हैं।
इसलिए मनाते हैं राष्ट्रीय पठन दिवस
देश में पुस्तकालय आंदोलन के जनक कहे जाने वाले पीएन पैनिकर की पुण्यतिथि 19 जून को होती है। उनके सम्मान के तौर पर इस दिन को राष्ट्रीय पठन दिवस के तौर पर मनाया जाता है। पीएन पैनिकर केरल के रहने वाले थे। एक मार्च 1909 को पैदा हुए। 19 जून 1995 में मृत्यु हुई।