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Bareilly News: मनरेगा के तहत हुए कार्यों का बिना बिल के कर दिया भुगतान
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बरेली। विकासखंड शेरगढ़ की ग्राम पंचायत हल्दी कला में मनरेगा के तहत हुए कार्यों का बिना बिल के दो लाख रुपये से अधिक का भुगतान भी करा लिया। मामले की शिकायत पर जिला लोकपाल मनरेगा ने जब स्थलीय निरीक्षण किया तो मौके पर कोई कार्य नहीं पाए गए। इसके बाद लोकपाल शिशुपाल मौर्य ने ब्लॉक स्तर पर सभी को दोषी पाते हुए धनराशि वसूलने आदेश दिए हैं।
जिला लोकपाल शिशुपाल मौर्य ने बताया कि भगवान दास और नरेंद्र की ओर से ग्राम प्रधान पर मनरेगा योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। पत्रावलियों के अनुसार कार्यों के सत्यापन के लिए ग्राम पंचायत हल्दी कला में जाकर 10 जनवरी 2025 को स्थलीय निरीक्षण किया तो पाया कि नागरिक सूचना बोर्ड के बिल नहीं हैं। भुगतान होने के बाद भी बोर्ड नहीं लगाए गए। लोकपाल ने ब्लॉक स्तर पर सभी को दोषी पाया। बताया कि एक बोर्ड का भुगतान पांच हजार रुपये है। चार बोर्डों का कुल 20,000 हजार रुपये बन रहा है, लेकिन शासन के आदेशानुसार मनरेगा में रिकवरी चार गुना यानी 80 हजार रुपये की किए जाने के निर्देश दिए।
यह वसूली सचिव, तकनीकी सहायक ,अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाधिकारी, खंड विकास अधिकारी सभी से समान रूप से 16 हजार रुपए वसूली की जाएगी। वहीं, यह भी पाया गया है कि 97,692 फलदार एवं छायादार पौधे निजी एजेंसी से खरीदे गए हैं। लेकिन यह भी मनरेगा की सूची में नहीं है। इसका मूल्य करीब 1,48542 रुपये है। यह वसूली ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक से की जाएगी। पूरी धनराशि को मनरेगा खाते में जमा किया जाएगा। मामले में जिलाधिकारी को जांच एवं प्रति प्रेषित कर दी गई है। साथ ही रिपोर्ट को मनरेगा अपर आयुक्त को भेज दिया गया है। संवाद
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जिला लोकपाल शिशुपाल मौर्य ने बताया कि भगवान दास और नरेंद्र की ओर से ग्राम प्रधान पर मनरेगा योजना में शासकीय धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। पत्रावलियों के अनुसार कार्यों के सत्यापन के लिए ग्राम पंचायत हल्दी कला में जाकर 10 जनवरी 2025 को स्थलीय निरीक्षण किया तो पाया कि नागरिक सूचना बोर्ड के बिल नहीं हैं। भुगतान होने के बाद भी बोर्ड नहीं लगाए गए। लोकपाल ने ब्लॉक स्तर पर सभी को दोषी पाया। बताया कि एक बोर्ड का भुगतान पांच हजार रुपये है। चार बोर्डों का कुल 20,000 हजार रुपये बन रहा है, लेकिन शासन के आदेशानुसार मनरेगा में रिकवरी चार गुना यानी 80 हजार रुपये की किए जाने के निर्देश दिए।
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यह वसूली सचिव, तकनीकी सहायक ,अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, लेखाधिकारी, खंड विकास अधिकारी सभी से समान रूप से 16 हजार रुपए वसूली की जाएगी। वहीं, यह भी पाया गया है कि 97,692 फलदार एवं छायादार पौधे निजी एजेंसी से खरीदे गए हैं। लेकिन यह भी मनरेगा की सूची में नहीं है। इसका मूल्य करीब 1,48542 रुपये है। यह वसूली ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक से की जाएगी। पूरी धनराशि को मनरेगा खाते में जमा किया जाएगा। मामले में जिलाधिकारी को जांच एवं प्रति प्रेषित कर दी गई है। साथ ही रिपोर्ट को मनरेगा अपर आयुक्त को भेज दिया गया है। संवाद
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