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रुहेलखंड डिपो...बिना दाम यहां नहीं होता कोई काम
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बरेली। रुहेलखंड डिपो के बाबू की गिरफ्तारी और मामले में एआरएम की संलिप्तता के आरोपों के बाद डिपो का काफी स्टाफ कोतवाली में जमा था। कर्मचारियों ने यहां एआरएम को निशाने पर लेते हुए खुलकर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए। कहा कि हर काम का यहां रुपया तय है। कई कर्मचारियों ने खुलकर आरोप लगाए कि एआरएम ने ही यहां सब गड़बड़ी फैलाई है। बाबू के साथ ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर वे यहां तैनात रहे तो उन लोगों की शामत आनी तय है।
नियमित परिचालक सबेग सिंह का कहना था कि नियमित रूप से सही मेंटिनेंस वाली बस देने के बदले उनके समेत बाकी लोगों से पांच हजार रुपये लिए गए हैं। हर महीने भी वही बस अलॉट रहने के एक हजार रुपये देने पड़ते हैं। उन्होंने शुरू में यह रुपये देने का विरोध किया तो एआरएम सतेंद्र कुमार वर्मा ने उन्हें हटा दिया, सेटिंग होने पर फिर सही बस पकड़ा दी गई। परिचालक रवि प्रकाश सहमे हुए थे। बताया कि वह ईटीएम पटल पर तैनात हैं। इसी पटल पर लगे रहने के एआरएम ने उससे पांच हजार रुपये मांगे। न देने पर हटा दिया और मनगढ़ंत आरोपों की चार्जशीट बना दी। उनसे सरेआम गालीगलौज की गई। वह उस वक्त काफी सदमे में थे। एआरएम के डर से उन्होंने दिन की ड्यूटी छोड़कर रात की शुरू की। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हाल ही में एक बेहद जिम्मेदार पद पर काम कर रहे अधिकारी को साहब ने हटा दिया, उनकी जगह ऐसे अधिकारी को बैठाया गया है जो पहले गंभीर आरोपों में घिरे हैं। आरोप था कि ईटीएम कम हो गई हैं। दिल्ली-जलालाबाद रूट के परिचालकों से ईटीएम देने के बदले हजार रुपये महीने की वसूली हो रही है।
आरोपी बाबू बोला- हम तो जरिया, सब माल साहब का
- शहर के सुर्खा बानखाना निवासी बाबू राजीव सक्सेना ने रुपये लेने के मीडिया के सामने आरोपों को स्वीकार किया। साथ ही ये भी कहा कि एआरएम साहब ने उनसे ये रुपये लेने को कहा था। यह एक मामला नहीं है। रोडवेज में यह पुरानी व्यवस्था है कि तमाम तरीके की कार्रवाई सेटिंग से निपट जाती हैं। दोषी कर्मचारी इस मामले में सीधे या किसी माध्यम से साहब से बात करते हैं। काम का रुपया तय होता है जिसे साहब सीधे नहीं लेते। यही रुपया उन लोगों को दिया जाता है। वे लोग शाम को या अगले दिन साहब को इसका हिसाब देते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही था।
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बाबू जी लपेटे में आए, एआरएम हैं असली कसूरवार
- शिकायतकर्ता कुणाल राय ने साफ कहा कि बाबू राजीव का कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने वो रुपये लिए जो एआरएम ने उन्हें देने को कहा है। इसलिए वे असली कसूरवार एआरएम को ही मानते हैं। वे उनके खिलाफ सबूत जुटा रहे हैं जो एंटी करप्शन टीम को देंगे ताकि सही कार्रवाई हो सके।
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नियमित परिचालक सबेग सिंह का कहना था कि नियमित रूप से सही मेंटिनेंस वाली बस देने के बदले उनके समेत बाकी लोगों से पांच हजार रुपये लिए गए हैं। हर महीने भी वही बस अलॉट रहने के एक हजार रुपये देने पड़ते हैं। उन्होंने शुरू में यह रुपये देने का विरोध किया तो एआरएम सतेंद्र कुमार वर्मा ने उन्हें हटा दिया, सेटिंग होने पर फिर सही बस पकड़ा दी गई। परिचालक रवि प्रकाश सहमे हुए थे। बताया कि वह ईटीएम पटल पर तैनात हैं। इसी पटल पर लगे रहने के एआरएम ने उससे पांच हजार रुपये मांगे। न देने पर हटा दिया और मनगढ़ंत आरोपों की चार्जशीट बना दी। उनसे सरेआम गालीगलौज की गई। वह उस वक्त काफी सदमे में थे। एआरएम के डर से उन्होंने दिन की ड्यूटी छोड़कर रात की शुरू की। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हाल ही में एक बेहद जिम्मेदार पद पर काम कर रहे अधिकारी को साहब ने हटा दिया, उनकी जगह ऐसे अधिकारी को बैठाया गया है जो पहले गंभीर आरोपों में घिरे हैं। आरोप था कि ईटीएम कम हो गई हैं। दिल्ली-जलालाबाद रूट के परिचालकों से ईटीएम देने के बदले हजार रुपये महीने की वसूली हो रही है।
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आरोपी बाबू बोला- हम तो जरिया, सब माल साहब का
- शहर के सुर्खा बानखाना निवासी बाबू राजीव सक्सेना ने रुपये लेने के मीडिया के सामने आरोपों को स्वीकार किया। साथ ही ये भी कहा कि एआरएम साहब ने उनसे ये रुपये लेने को कहा था। यह एक मामला नहीं है। रोडवेज में यह पुरानी व्यवस्था है कि तमाम तरीके की कार्रवाई सेटिंग से निपट जाती हैं। दोषी कर्मचारी इस मामले में सीधे या किसी माध्यम से साहब से बात करते हैं। काम का रुपया तय होता है जिसे साहब सीधे नहीं लेते। यही रुपया उन लोगों को दिया जाता है। वे लोग शाम को या अगले दिन साहब को इसका हिसाब देते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही था।
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बाबू जी लपेटे में आए, एआरएम हैं असली कसूरवार
- शिकायतकर्ता कुणाल राय ने साफ कहा कि बाबू राजीव का कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने वो रुपये लिए जो एआरएम ने उन्हें देने को कहा है। इसलिए वे असली कसूरवार एआरएम को ही मानते हैं। वे उनके खिलाफ सबूत जुटा रहे हैं जो एंटी करप्शन टीम को देंगे ताकि सही कार्रवाई हो सके।