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चार साल से नहीं हुआ शूटिंग टूर्नामेंट, पांच हजार कारतूसों को लग रहा जंग
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बरेली। जिला राइफल क्लब ने चार साल से शूटिंग टूर्नामेंट ही नहीं कराया है। जबकि प्रशासन ने इस टूर्नामेंट के लिए करीब पांच हजार कारतूस खरीदी थी। बताते हैं कि टूर्नामेंट न होने से कारतूसों में जंग लग रहा है। जबकि अधिकारियों ने अब तक सुध नहीं ली है। मजबूरी में शूटरों को प्राइवेट शूटिंग रेंज में पहुंचकर प्रैक्टिस करनी पड़ रही है। उचित ट्रेनिंग न मिलने से नए निशानेबाजों की पौध भी तैयार नहीं हो पा रही है।
राइफल क्लब की ओर से हर साल ही अंतर्जनपदीय टूर्नामेंट कराने चाहिए तो यहां से निकलने वाले शूटरों को स्टेट और इंटरनेशनल शूटिंग टूर्नामेंट में भी खेलने का मौका मिल सके। करीब पांच साल पहले क्लब के अध्यक्ष रहे तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश ने शूटिंग टूर्नामेंट कराने की कार्ययोजना तैयार की थी। डीएम के आदेश के बाद राइफल क्लब के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद प्रशासन ने शूटरों के लिए करीब पांच हजार कारतूसों की खरीद की थी। बाद में डीएम का तबादला हो गया और उनके जाते ही टूर्नामेंट की तैयारी भी ठंडी पड़ गई। शूटरों की आग्रह के बावजूद प्रशासन ने अब तक टूर्नामेंट कराने की सुूध नहीं ली है। निशानेबाजों का कहना है कि राइफल क्लब में ट्रेनिंग के लिए काफी कम फीस देनी पड़ती है, जबकि शहर में दो जगह सुभाषनगर और सौ फुटा पर पर प्राइवेट शूटिंग रेंज है, यहां क्लब के मुकाबले कहीं ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। बताते हैं कि राइफल क्लब के पास पांच हजार कारतूस देखरेख की कमी की वजह से खराब हो रही हैं। शूटरों का कहना है कि अगर कारतूस चार या पांच साल तक सीलन में रखी है और उन्हें धूप नहीं दिखाई जा रही है तो वे बेहतर रिजल्ट नहीं दे पाती है। कई बार शस्त्रों को भी इससे नुकसान होता है।
नौ लाख से खरीदी गई 12 बोर की गन का भी नहीं हुआ इस्तेमाल
-करीब पांच साल पहले राइफल क्लब को शस्त्र खरीदने के लिए 20 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। इससे दो 12 बोर की गन करीब नौ लाख रुपये से खरीदी गईं लेकिन शूटरों का कहना है कि निशानेबाजी के लिए यह गन अब तक नहीं दी गई है।
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शूटिंग टूर्नामेंट के कई साल से न होने का मामला संज्ञान में आया है। इस संबंध में डीएम से बात करेंगे। कोशिश होगी कि निशानेबाजों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं होती रहीं। -मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट/ जनरल सेक्रेटरी, राइफल क्लब
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राइफल क्लब की ओर से हर साल ही अंतर्जनपदीय टूर्नामेंट कराने चाहिए तो यहां से निकलने वाले शूटरों को स्टेट और इंटरनेशनल शूटिंग टूर्नामेंट में भी खेलने का मौका मिल सके। करीब पांच साल पहले क्लब के अध्यक्ष रहे तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश ने शूटिंग टूर्नामेंट कराने की कार्ययोजना तैयार की थी। डीएम के आदेश के बाद राइफल क्लब के पदाधिकारियों के आग्रह के बाद प्रशासन ने शूटरों के लिए करीब पांच हजार कारतूसों की खरीद की थी। बाद में डीएम का तबादला हो गया और उनके जाते ही टूर्नामेंट की तैयारी भी ठंडी पड़ गई। शूटरों की आग्रह के बावजूद प्रशासन ने अब तक टूर्नामेंट कराने की सुूध नहीं ली है। निशानेबाजों का कहना है कि राइफल क्लब में ट्रेनिंग के लिए काफी कम फीस देनी पड़ती है, जबकि शहर में दो जगह सुभाषनगर और सौ फुटा पर पर प्राइवेट शूटिंग रेंज है, यहां क्लब के मुकाबले कहीं ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। बताते हैं कि राइफल क्लब के पास पांच हजार कारतूस देखरेख की कमी की वजह से खराब हो रही हैं। शूटरों का कहना है कि अगर कारतूस चार या पांच साल तक सीलन में रखी है और उन्हें धूप नहीं दिखाई जा रही है तो वे बेहतर रिजल्ट नहीं दे पाती है। कई बार शस्त्रों को भी इससे नुकसान होता है।
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नौ लाख से खरीदी गई 12 बोर की गन का भी नहीं हुआ इस्तेमाल
-करीब पांच साल पहले राइफल क्लब को शस्त्र खरीदने के लिए 20 लाख रुपये का बजट पास हुआ था। इससे दो 12 बोर की गन करीब नौ लाख रुपये से खरीदी गईं लेकिन शूटरों का कहना है कि निशानेबाजी के लिए यह गन अब तक नहीं दी गई है।
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शूटिंग टूर्नामेंट के कई साल से न होने का मामला संज्ञान में आया है। इस संबंध में डीएम से बात करेंगे। कोशिश होगी कि निशानेबाजों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं होती रहीं। -मदन कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट/ जनरल सेक्रेटरी, राइफल क्लब