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दुधमुंहे बच्चे की मौत, सदमे में दादा की भी जान गई
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 22 Sep 2018 07:58 PM IST
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नौ माह के दुधमुंहे बच्चे की सांस नली में अटकी केले की गांठ निकालते समय गले में दादा का नाखून चुभना उसके लिए काल बन गया। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। दादा को जब जानकारी हुई तो सदमे से उनकी भी जान चली गई। घटना होशियारपुर (पंजाब) में हुई। शनिवार को दादा-पोते की लाशें गांव दौली जवाहरलाल की गौंटिया पहुंचीं तो परिवार के साथ मोहल्ले में भी मातम पसर गया।
दौली जवाहरलाल की गौंटिया के केदारनाथ (50) पंजाब के होशियापुर में चाट का ठेला लगाकर परिवार का भरण भोषण कर रहे थे। साथ में इकलौता बेटा ओमपाल भी हाथ बंटाता था। डेढ़ साल पहले ओमपाल की शादी की थी। शुक्रवार सुबह केदारनाथ किराए के कमरे में नौ माह के पोते दिनेश को केला खिला रहे थे। बताया जाता है कि केला अधपका था। इससे उसकी गांठ बच्चे के गले में अटक गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर केदारनाथ ने उसके मुंह में अंगुली डालकर गांठ निकालने की कोशिश की तो सांस की नली में नाखून चुभ गया। इसकी वजह से रक्तस्राव होने लगा। यह देख केदारनाथ घबरा गए और उसे लेकर अस्पताल भागे। वहां पहुंचने पर उसे भर्ती कराया, जहां शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई। इकलौते पोते की मौत की सूचना केदारनाथ तक पहुंची तो उन्हें सदमा लग गया। तीन घंटे बाद उनकी भी मौत हो गई। दोनों का शव लेकर ओमपाल शनिवार को गांव पहुंचा तो भारी भीड़ जुट गई। शाम को दोनों की अंत्येष्टि की गई।
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दौली जवाहरलाल की गौंटिया के केदारनाथ (50) पंजाब के होशियापुर में चाट का ठेला लगाकर परिवार का भरण भोषण कर रहे थे। साथ में इकलौता बेटा ओमपाल भी हाथ बंटाता था। डेढ़ साल पहले ओमपाल की शादी की थी। शुक्रवार सुबह केदारनाथ किराए के कमरे में नौ माह के पोते दिनेश को केला खिला रहे थे। बताया जाता है कि केला अधपका था। इससे उसकी गांठ बच्चे के गले में अटक गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर केदारनाथ ने उसके मुंह में अंगुली डालकर गांठ निकालने की कोशिश की तो सांस की नली में नाखून चुभ गया। इसकी वजह से रक्तस्राव होने लगा। यह देख केदारनाथ घबरा गए और उसे लेकर अस्पताल भागे। वहां पहुंचने पर उसे भर्ती कराया, जहां शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई। इकलौते पोते की मौत की सूचना केदारनाथ तक पहुंची तो उन्हें सदमा लग गया। तीन घंटे बाद उनकी भी मौत हो गई। दोनों का शव लेकर ओमपाल शनिवार को गांव पहुंचा तो भारी भीड़ जुट गई। शाम को दोनों की अंत्येष्टि की गई।
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