{"_id":"5d585c4a8ebc3e89c14a5408","slug":"old-home-bareilly-news-bly3727025151","type":"story","status":"publish","title_hn":"वृद्धाश्रम लाइव- अपनों की हुई बात तो छलक पड़ीं बूढ़ी आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वृद्धाश्रम लाइव- अपनों की हुई बात तो छलक पड़ीं बूढ़ी आंखें
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बरेली। लालफाटक स्थित वृद्धाश्रम में तमाम बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके परिवार तो हैं लेकिन उन्हें दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया। रक्षाबंधन का त्योहार आया तो उन्हें भी परिवार की बहुत याद आई। अपनों की याद में आखें छलकीं तो अनाथालय वाले ही उनका परिवार बन गए। अमर उजाला से बातचीत में ऐसे बुजुर्ग बच्चों के बेसहारा छोड़ने से आहत तो दिखे लेकिन बच्चों के लिए उनके मुंह से बद्दुआ नहीं निकलती।
लालफाटक स्थित वृद्धाश्रम में इस समय करीब 80 बुजुर्ग महिला-पुरुष निवास कर रहे हैं। इनमें से कुछ वास्तव में बेसहारा हैं तो कुछ अपनों के सताए और ठुकराए हैं। बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन का त्योहार था और कुछ बुजुर्गों के बच्चे उनसे मिलने पहुंचे तो अपनों की याद में दूसरों की आंखें डबडबा आईं। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम इनसे मिलने पहुंचीं तो उनका दर्द आंसुओं के रूप में सैलाब बनकर फूट पड़ा।
65 वर्षीय सुरेश मौर्य ने बताया कि वह पेट्रोलपंप पर मैनेजर थे। परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं लेकिन काम छूटा तो परिवार भी छूट गया। बेटे से ज्यादा वह पत्नी के व्यवहार से आहत थे और डेढ़ साल पहले घर छोड़ दिया। बोले, अब तो होली, दिवाली और राखी.. सुबकुछ यहीं है। ऐसे ही रामकली के साथ हुआ। पति की मौत के बाद बेटों ने मकान बेच दिया और उन्हें भटकने को छोड़ दिया। नाती की शादी थी तो बेटा बदनामी के डर से बुलाकर ले गया लेकिन वह खुद ही लौट आईं। महारानी के चार मकान थे लेकिन बेटे ने घर बेचकर उन्हें भटकने को छोड़ दिया। दामाद अपने साथ ले जाने को आया लेकिन वह नहीं गईं। उन्हें तो मलाल बेटे की बेरुखी का है।
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गलत संगत में पड़ा बेटा तो छूट गया घर
दिवारी लाल मौर्य की उम्र 72 साल हो चुकी है, तीन साल से वृद्धाश्रम में ही रहते हैं। बोले- एक बेटा है, गलत संगत में पड़कर उसने जमीन बेच दी। पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है और अब वह काम नहीं कर सकते तो यहां आ गए। अब रोटी की कोई समस्या नहीं है। परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। रक्षाबंधन पर घर गए थे और फिर शाम को ही लौट आए।
अनजान महिला बनी भगवान
आगरा की मीरा देवी का एक बेटा है लेकिन देवरानियों से घरेलू कलह में वह मरने को घर से निकली थीं। बताया मथुरा में एक महिला मिल गई और आठ दिन उन्हें घुमाने बाद यहां वृद्धाश्रम में छोड़ गई। अपनों को याद करके उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े लेकिन अनजान महिला को दुआएं दे रही थीं।
पोती से फोन पर बात करके फफक पड़ी नत्थो
90 वर्षीय नत्थो देवी के चार बेटे थे लेकिन सबकी मौत हो गई। बहू को बेटे की जगह नौकरी मिल गई लेकिन पूर्व में उनसे हुई लड़ाई के चलते बहू ने सहारा नहीं दिया। हार्टमन पुल के नीचे रहती थीं और भीख मांगकर गुजारा करने लगीं तो एक दिन पोती उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ गई। अब पोती की बहुत याद आती है। शनिवार को वृद्धाश्रम की सहायक प्रबंधक कांता गंगवार और केयर गिवर्स रचना चौहान ने पोती से मोबाइल पर बात कराई तो फफक कर रो पड़ीं। बोली, बेटा बहुत याद आती है, कब आएगा तुम्हारा इतवार लेकिन पोती ने जल्दी आने की बात कहकर फोन काट दिया।
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लालफाटक स्थित वृद्धाश्रम में इस समय करीब 80 बुजुर्ग महिला-पुरुष निवास कर रहे हैं। इनमें से कुछ वास्तव में बेसहारा हैं तो कुछ अपनों के सताए और ठुकराए हैं। बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन का त्योहार था और कुछ बुजुर्गों के बच्चे उनसे मिलने पहुंचे तो अपनों की याद में दूसरों की आंखें डबडबा आईं। शनिवार को जब अमर उजाला की टीम इनसे मिलने पहुंचीं तो उनका दर्द आंसुओं के रूप में सैलाब बनकर फूट पड़ा।
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65 वर्षीय सुरेश मौर्य ने बताया कि वह पेट्रोलपंप पर मैनेजर थे। परिवार में पत्नी, एक बेटा और दो बेटियां हैं लेकिन काम छूटा तो परिवार भी छूट गया। बेटे से ज्यादा वह पत्नी के व्यवहार से आहत थे और डेढ़ साल पहले घर छोड़ दिया। बोले, अब तो होली, दिवाली और राखी.. सुबकुछ यहीं है। ऐसे ही रामकली के साथ हुआ। पति की मौत के बाद बेटों ने मकान बेच दिया और उन्हें भटकने को छोड़ दिया। नाती की शादी थी तो बेटा बदनामी के डर से बुलाकर ले गया लेकिन वह खुद ही लौट आईं। महारानी के चार मकान थे लेकिन बेटे ने घर बेचकर उन्हें भटकने को छोड़ दिया। दामाद अपने साथ ले जाने को आया लेकिन वह नहीं गईं। उन्हें तो मलाल बेटे की बेरुखी का है।
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गलत संगत में पड़ा बेटा तो छूट गया घर
दिवारी लाल मौर्य की उम्र 72 साल हो चुकी है, तीन साल से वृद्धाश्रम में ही रहते हैं। बोले- एक बेटा है, गलत संगत में पड़कर उसने जमीन बेच दी। पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है और अब वह काम नहीं कर सकते तो यहां आ गए। अब रोटी की कोई समस्या नहीं है। परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। रक्षाबंधन पर घर गए थे और फिर शाम को ही लौट आए।
अनजान महिला बनी भगवान
आगरा की मीरा देवी का एक बेटा है लेकिन देवरानियों से घरेलू कलह में वह मरने को घर से निकली थीं। बताया मथुरा में एक महिला मिल गई और आठ दिन उन्हें घुमाने बाद यहां वृद्धाश्रम में छोड़ गई। अपनों को याद करके उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े लेकिन अनजान महिला को दुआएं दे रही थीं।
पोती से फोन पर बात करके फफक पड़ी नत्थो
90 वर्षीय नत्थो देवी के चार बेटे थे लेकिन सबकी मौत हो गई। बहू को बेटे की जगह नौकरी मिल गई लेकिन पूर्व में उनसे हुई लड़ाई के चलते बहू ने सहारा नहीं दिया। हार्टमन पुल के नीचे रहती थीं और भीख मांगकर गुजारा करने लगीं तो एक दिन पोती उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ गई। अब पोती की बहुत याद आती है। शनिवार को वृद्धाश्रम की सहायक प्रबंधक कांता गंगवार और केयर गिवर्स रचना चौहान ने पोती से मोबाइल पर बात कराई तो फफक कर रो पड़ीं। बोली, बेटा बहुत याद आती है, कब आएगा तुम्हारा इतवार लेकिन पोती ने जल्दी आने की बात कहकर फोन काट दिया।