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कागज कुछ, हकीकत कुछ और बयां कर रही

Tue, 06 Mar 2018 06:55 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 06 Mar 2018 06:55 PM IST
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ODF: papers showing progress but in realty its different
इस साल दो अक्तूबर तक जिले को ओडीएफ घोषित किया जाना है, लेकिन अभी भी हजारों घरों में शौचालय नहीं बने हैं। ओडीएफ की हकीकत जानने के लिए सांसद धर्मेंद्र कश्यप के गोद लिए आदर्श गांव क्यारा ब्लॉक के रौंधा की तस्वीर देखी तो हकीकत कुछ और ही निकली। बदायूं रोड से करीब एक किमी अंदर बसे शहर से सटे सात हजार की आबादी वाले इस गांव को आदर्श बनाने के लिए चयनित किया गया तो यहां ओडीएफ के लिए 430 घरों में शौचालयों के निर्माण होने हैं। मगर, यहां अभी भी बड़ी संख्या में घरों में शौचालय नहीं है। हकीकत देखने अमर उजाला की टीम गांव पहुंची तो पानी की टंकी के पास दिन में ही कुछ महिलाएं बोतल लेकर खेतों में शौच के लिए जाती दिखाई दीं। गांव के लोगों ने ज्यादातर घरों में शौचालय न होने की बात कही। आगे प्राइमरी स्कूल के पास हुलसी देवी पत्नी माखनलाल के शौचालय में ताला पड़ा था। यही हाल गांव में बने कुछ अन्य शौचालयों का था। कई लोगों का कहना था कि जिन लोगों के घरों में शौचालय बने भी हैं, वे भी इनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने यह शिकायत की कि फार्म जमा करने के बावजूद शौचालय बनवाने की रकम नहीं मिल रही है। उनसे सुविधा शुल्क मांगा जा रहा है। 
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लोगों की कहानी उन्हीं की जुबानी 
  
12 हजार लेना है तो दो हजार लाओ 
गांव की क्रांति पत्नी वीरपाल कहती हैं कि शौचालय बनवाने के लिए 12 हजार रुपये मिलते हैं। उनका चेक आ गया है लेकिन उसे देने के लिए उनसे दो हजार रुपये मांग जा रहे हैं। पति मजदूरी करती हैं तो इतना पैसा कहां से लाए। 
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दौड़ लगाई, नहीं मिली शौचालय को रकम
सोमपाल का कहना है कि शौचालय की रकम के लिए प्रधान, सेक्रेटरी के पास चक्कर लगाते थक चुके हैं लेकिन अब तक सब्सिडी नहीं मिली। मजबूरी में उनके परिवार को खुले में शौच जानी पड़ रही है। 
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महिलाओं को होना पड़ता है शर्मसार
शारदा कहती हैं कि घर में शौचालय न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत गांव की महिलाओं को हो रही है। फिर भी कोई उनकी दिक्कत समझने तो तैयार नहीं। उनके घर में भी शौचालय नहीं बना है। 
 
प्रधान नहीं दिला रहे पैसा
लेखराज ने बताया कि वह मजदूरी करता है। शौचालय के लिए वह कई बार प्रधान जी से मिल चुका है लेकिन वह पैसा नहीं दिला पा रहे। हर बार कहते हैं कि जल्द दिला दूंगा। इससे वह शौचालय भी नहीं बनवा पा रहे। 


सांसद जी ने गांव गोद लिया लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया। अभी 330 घरों में शौचालय बनवाने हैं। बजट भी समय से नहीं मिल पा रहा है। गांव के कुछ लोगों को निर्माण सामग्री उधार भी दिलानी पड़ी है।  

- मंजूर अहमद, ग्राम प्रधान 
 
1632 गांवों को ओडीएफ बनाना बड़ी चुनौती 
दो अक्तूबर से पहले जिले के सभी 1843 गांवों को ओडीएफ घोषित करना है, जबकि अब तक केवल 123 गांवों को खुले में शौचमुक्त किया जा सका है। जिला प्रशासन के सामने 1632 गांवों को ओडीएफ करने का काम जितना बड़ा है, उसके पास उसकी समय-सीमा उतनी ही कम बची है। इससे स्वच्छ भारत मिशन में काम कर रही टीम पर भी सवाल लग रहे हैं। 
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