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ओ निगेटिव खून की किल्लत, शहर के सभी ब्लड बैंक खाली
बरेली।
Updated Wed, 08 Mar 2017 01:11 AM IST
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O negative blood deficiency, all the blood banks in the city are empty
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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शहर के सभी ब्लड बैंकों में ओ निगेटिव खून की किल्लत है। मंगलवार को आईएमए में अचानक दो मामले ओ निगेटिव खून के लिए आ गए। न तो आईएमए में खून था और न ही जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में। गंगाशील का ब्लड बैंक भी ओ निगेटिव खून की किल्लत से जूझ रहा है।
जिला अस्पताल में तो एक भी ब्लड ग्रुप निगेटिव नहीं है। पिछले दिनों हुए रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल को 30 रक्तदाताओं में सिर्फ दो ही निगेटिव ग्रुप के डोनर मिले वह भी एबी निगेटिव ग्रुप के थे। आईएमए ब्लड बैंक में जहां एक दिन में 250 यूनिट से ज्यादा रक्त की खपत होती है वहां भी निगेटिव खून की किल्लत चल रही है। मंगलवार को गंगाशील से पूरनपुर की सुखविंदर कौर और एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट से दूसरा केस ओ निगेटिव का आ गया। एसआरएमएस से आए तीमारदार अपने साथ डोनर लाए थे, लेकिन सुखविंदर के पास कोई डोनर नहीं निगेटिव का नहीं था। आईएमए ब्लड बैंक में मौजूद टीम के लोगों ने तमाम ओ निगेटिव वाले रक्तदाताओं को फोन किया लेकिन तुरंत पहुंचने में उन्होंने असमर्थता जताई। इससे पहले तीमारदारों ने अन्य ब्लड बैंकों से भी संपर्क किया था।
मीटिंग छोड़कर नगर आयुक्त पहुंचे खून देने, बचाई महिला की जान
पूरनपुर से आई एक अंजान महिला की जान नगर आयुक्त ने बचा ली। महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग हो चुकी थी, उसे तुरंत ‘ओ निगेटिव’ खून की आवश्यकता थी, जो शहर के ब्लड बैकों में मंगलवार को मौजूद नहीं था। सुखविंद कौर (46) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थानीय डॉक्टरों की सलाह पर घरवाले उन्हें बरेली ले आए और एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। खून की जरूरत थी लेकिन महिला का ब्लड ग्रुप ‘ओ निगेटिव’ किसी ब्लड बैंक में नहीं था। आईएमए के मेडिकल आफीसर डॉ. जेपीएस सेठी के कहने पर तीमारदारों ने इकबाल सिंह बाले से संपर्क किया। कई लोगों से प्रयास करने के बाद अंत में नगर आयुक्त शीलधर यादव से बात की गई, चूंकि उनका ब्लड ग्रुप ‘ओ निगेटिव’ ही था, तो वह तुरंत एक बैठक छोड़कर रक्तदान के लिए आईएमए पहुंच गए। रक्तदान के बाद आईएमए ने उन्हें सर्टिफिकेट और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। नगर आयुक्त ने इससे पहले भी एक महिला की जान ऐसे ही बचाई थी।
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ओ निगेटिव के अलावा अन्य निगेटिव ग्रुप भी काफी कम है। जरूरतमंद लोगों को समस्या न हो इसलिए निगेटिव रक्तदाता मदद कर सकते हैं।
डॉ. अंजू उप्पल, निदेशक, आईएमए ब्लड बैंक
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जिला अस्पताल में तो एक भी ब्लड ग्रुप निगेटिव नहीं है। पिछले दिनों हुए रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल को 30 रक्तदाताओं में सिर्फ दो ही निगेटिव ग्रुप के डोनर मिले वह भी एबी निगेटिव ग्रुप के थे। आईएमए ब्लड बैंक में जहां एक दिन में 250 यूनिट से ज्यादा रक्त की खपत होती है वहां भी निगेटिव खून की किल्लत चल रही है। मंगलवार को गंगाशील से पूरनपुर की सुखविंदर कौर और एसआरएमएस मेडिकल इंस्टीट्यूट से दूसरा केस ओ निगेटिव का आ गया। एसआरएमएस से आए तीमारदार अपने साथ डोनर लाए थे, लेकिन सुखविंदर के पास कोई डोनर नहीं निगेटिव का नहीं था। आईएमए ब्लड बैंक में मौजूद टीम के लोगों ने तमाम ओ निगेटिव वाले रक्तदाताओं को फोन किया लेकिन तुरंत पहुंचने में उन्होंने असमर्थता जताई। इससे पहले तीमारदारों ने अन्य ब्लड बैंकों से भी संपर्क किया था।
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मीटिंग छोड़कर नगर आयुक्त पहुंचे खून देने, बचाई महिला की जान
पूरनपुर से आई एक अंजान महिला की जान नगर आयुक्त ने बचा ली। महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग हो चुकी थी, उसे तुरंत ‘ओ निगेटिव’ खून की आवश्यकता थी, जो शहर के ब्लड बैकों में मंगलवार को मौजूद नहीं था। सुखविंद कौर (46) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थानीय डॉक्टरों की सलाह पर घरवाले उन्हें बरेली ले आए और एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। खून की जरूरत थी लेकिन महिला का ब्लड ग्रुप ‘ओ निगेटिव’ किसी ब्लड बैंक में नहीं था। आईएमए के मेडिकल आफीसर डॉ. जेपीएस सेठी के कहने पर तीमारदारों ने इकबाल सिंह बाले से संपर्क किया। कई लोगों से प्रयास करने के बाद अंत में नगर आयुक्त शीलधर यादव से बात की गई, चूंकि उनका ब्लड ग्रुप ‘ओ निगेटिव’ ही था, तो वह तुरंत एक बैठक छोड़कर रक्तदान के लिए आईएमए पहुंच गए। रक्तदान के बाद आईएमए ने उन्हें सर्टिफिकेट और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। नगर आयुक्त ने इससे पहले भी एक महिला की जान ऐसे ही बचाई थी।
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ओ निगेटिव के अलावा अन्य निगेटिव ग्रुप भी काफी कम है। जरूरतमंद लोगों को समस्या न हो इसलिए निगेटिव रक्तदाता मदद कर सकते हैं।
डॉ. अंजू उप्पल, निदेशक, आईएमए ब्लड बैंक