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तालाब की जमीन पर कब्जे का मामलाः एक के चक्कर में 35 की खुली पोल, प्रशासन ने भेजे नोटिस
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बदायूं। वजीरगंज में तालाब की जमीन पर एक व्यक्ति ने दुकान का अवैध निर्माण क्या कराया, बाकी कब्जा करने वालों की मुसीबतें बढ़ गई। ऐसे में उन 35 लोगों की भी पोल खुल गई जो तहसील प्रशासन के अनुसार तालाब की जमीन पर कब्जा कर बैठे हैं। इन पर पूर्व में भी 122 बी की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सांठगांठ कर इन लोगों ने मामला वहीं का वहीं दबवा दिया था। अब प्रशासन इन लोगों की गर्दन पर शिकंजा कसने लगा है। शनिवार को 35 कब्जाधारियों को तहसीलदार कोर्ट से नोटिस जारी हो चुके हैं। एडीएम प्रशासन के कड़े रवैये के बाद माना जा रहा है कि ऐसे में जल्द ही अन्य कब्जाधारकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
भाजपा सरकार के आने के बाद सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के लिए एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन भले ही कर दिया गया हो लेकिन यह भी सच्चाई है कि सरकारी जमीनों समेत तालाबों आदि पर सबसे ज्यादा कब्जे इसी सरकार में हो रहे हैं। दरअसल, कुछ जनप्रतिनिधि ही अपने वोट बैंक और आर्थिक लाभ की खातिर ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। वजीरगंज में भी कुछ ऐसा ही हुआ। खुद को एक माननीय का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने तालाब की जमीन को खरीदकर उसे चौगुने दामों पर अन्य लोगों को बेच दिया था, जिसके बाद उस व्यक्ति ने वहां पर दुकान का निर्माण कराना शुरू कर दिया। प्रशासन की निगाहें टेड़ी हुई तो उस व्यक्ति ने शटर, गार्डर आदि हटाकर दुकान को खुद तोड़ने की औपचारिकता तो कर दी, लेकिन इसके बाद मामला और बढ़ गया। दरअसल, जहां पर वह दुकान बनी है वहां पहले काफी बड़ा तालाब था। इसके बाद प्रशासन जब मामले की तह तक गया तो पता चला कि इस जमीन पर निर्माण कराने वाले लोगों पर पूर्व में 122 बी के तहत कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सत्ताधारी नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला जहां का तहां रुक गया। अब यह मामला फिर सामने आ गया है, जिसके बाद प्रशासन ने इन लोगों को नोटिस जारी करते हुए फिर से जांच शुरू करा दी है। नोटिस में 12 फरवरी को इन लोगों को अपना पक्ष रखने को कहा गया है। माना जा रहा है कि इसके बाद प्रशासन बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सकता है।
तालाब पर कब्जा करने वालों के खिलाफ हमारे यहां से पूर्व मेें 122 बी की कार्रवाई की गई थी। जैसे ही मामला संज्ञान में आया, तो उन लोगों को नोटिस जारी कर दिया गया। समय अवधि पूरी होने के बाद में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तो ईओ को अपने स्तर से कार्रवाई करनी है।
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- करनवीर सिंह, तहसीलदार बिसौली
- तहसील स्तर से इस मामले में कार्रवाई होनी है। इसको लेकर एसडीएम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तालाब की जमीन पर कब्जा है, तो उसे हटवाकर रिपोर्ट दें। फिलहाल उनके स्तर से अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
- ऋतु पुनिया, एडीएम, प्रशासन
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भाजपा सरकार के आने के बाद सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के लिए एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन भले ही कर दिया गया हो लेकिन यह भी सच्चाई है कि सरकारी जमीनों समेत तालाबों आदि पर सबसे ज्यादा कब्जे इसी सरकार में हो रहे हैं। दरअसल, कुछ जनप्रतिनिधि ही अपने वोट बैंक और आर्थिक लाभ की खातिर ऐसे कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। वजीरगंज में भी कुछ ऐसा ही हुआ। खुद को एक माननीय का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने तालाब की जमीन को खरीदकर उसे चौगुने दामों पर अन्य लोगों को बेच दिया था, जिसके बाद उस व्यक्ति ने वहां पर दुकान का निर्माण कराना शुरू कर दिया। प्रशासन की निगाहें टेड़ी हुई तो उस व्यक्ति ने शटर, गार्डर आदि हटाकर दुकान को खुद तोड़ने की औपचारिकता तो कर दी, लेकिन इसके बाद मामला और बढ़ गया। दरअसल, जहां पर वह दुकान बनी है वहां पहले काफी बड़ा तालाब था। इसके बाद प्रशासन जब मामले की तह तक गया तो पता चला कि इस जमीन पर निर्माण कराने वाले लोगों पर पूर्व में 122 बी के तहत कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन सत्ताधारी नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला जहां का तहां रुक गया। अब यह मामला फिर सामने आ गया है, जिसके बाद प्रशासन ने इन लोगों को नोटिस जारी करते हुए फिर से जांच शुरू करा दी है। नोटिस में 12 फरवरी को इन लोगों को अपना पक्ष रखने को कहा गया है। माना जा रहा है कि इसके बाद प्रशासन बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सकता है।
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तालाब पर कब्जा करने वालों के खिलाफ हमारे यहां से पूर्व मेें 122 बी की कार्रवाई की गई थी। जैसे ही मामला संज्ञान में आया, तो उन लोगों को नोटिस जारी कर दिया गया। समय अवधि पूरी होने के बाद में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तो ईओ को अपने स्तर से कार्रवाई करनी है।
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- करनवीर सिंह, तहसीलदार बिसौली
- तहसील स्तर से इस मामले में कार्रवाई होनी है। इसको लेकर एसडीएम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तालाब की जमीन पर कब्जा है, तो उसे हटवाकर रिपोर्ट दें। फिलहाल उनके स्तर से अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
- ऋतु पुनिया, एडीएम, प्रशासन