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बरेली के पर्यावरण विज्ञानी की रिसर्च के जरिये धुंध की समस्या से निपटेगी नोएडा अथॉरिटी

Fri, 21 Sep 2018 05:09 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Fri, 21 Sep 2018 05:09 PM IST
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Noida authority to tackle fog problem by finding from bareilly scientist
- फोटो : ani
धुंध यानी प्रदूषण का एक नया रूप। बेतहाशा ट्रैफिक की वजह से दिल्ली जैसे कुछ शहरों से शुरू हुई इस समस्या से पिछले साल अपना शहर भी दो-चार हुआ था। बरेली के पर्यावरण विज्ञानी डॉ. डीके सक्सेना ने इस समस्या से पार पाने का उपाय ढूंढा है, जिसे नोएडा में इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। डॉ. सक्सेना का रिसर्च प्रोजेक्ट लागू होने के बाद जल्द ही नोएडा में सड़क के दोनों ओर घास के गलीचे बिछे नजर आएंगे।
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बरेली कॉलेज के शिक्षक डॉ. डीके सक्सेना की रिसर्च के मुताबिक अगर कुछ खास तरह की घास और मॉस (काई) का इस्तेमाल किया जाए तो धुंध जैसी समस्या से बचा जा सकता है। सड़क किनारे और घरों के सामने खाली जमीन पर घास उगाई जा सकती है। डॉ. सक्सेना ने अपने शोध के नतीजों की जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ इनवायरमेंट एंड फॉरेस्ट को दी थी। मंत्रालय के इसमें दिलचस्पी दिखाने के बाद कई सरकारी संस्थाओं को यह प्रोजेक्ट लागू करने के प्रस्ताव भेजे गए। अब नोएडा अथॉरिटी ने इसे अपने यहां लागू करने की मंजूरी दी है। अथॉरिटी सड़कों के दोनों तरफ दस-दस फुट हिस्से में घास उगाएगा। डॉ. सक्सेना ने 30 अगस्त को नोएडा अथारिटी के साथ हुई बैठक में मॉस और घास के दस-दस नाम सुझाए हैं। डॉ. सक्सेना ने बताया कि सितंबर के अंत में होने जा रहे नोएडा अथारिटी के आर्किटेक्ट और इंजीनियरों के साथ उनके प्रेजेंटेशन प्रोग्राम में इस प्रोजेक्ट को लागू करने के बारे में भी बातचीत होगी। 
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यह करेगी घास
शहरी जीवनशैली में आबादी के बीच पेड़ तो कोई लगाता नहीं, घरों के सामने भी जमीन पर प्लास्टर करा दिया जाता है। सूखापन रहने की वजह से ही धूल के कण उड़कर आसमान में छा जाते हैं। इसी धुंध ने दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण स्तर में जबर्दस्त वृद्धि की है। डॉ. सक्सेना का कहना है कि घास वाष्पोत्सर्जन की अच्छी वाहक होती हैं। घास से आसपास नमी रहती है और धूल के कण हवा में नहीं उड़ते। घास बारिश का पानी भी रोकेगी और जमीन को रिचार्ज करने का काम करेगी। डॉ. सक्सेना के मुताबिक अबूधाबी और दुबई में भी घास का इस्तेमाल नमी बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। वहां घास को जमीन और मॉस को दीवारों पर उगाया गया है। 
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