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कर्मचारी तो आ रहे हैं, मगर कामकाज ढर्रें पर नहीं
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बरेली। लॉकडाउन-पांच में कर्मचारियों का भले ही वर्क फ्रॉम होम खत्म हो गया है लेकिन सरकारी दफ्तरों में अभी कामकाज का पुराना ढर्रा ही दिखाई दे रहा है। कर्मचारी कागजों पर ड्यूटी कर रहे हैं लेकिन सीट पर कम ही बैठ गए हैं। अभी कलक्ट्रेट और तहसील में पब्लिक भी कम आ रही है। इससे ज्यादातर कार्यालयों में लोगों की अभी कोई गतिविधि नहीं दिखाई दे रही है।
शासन ने सभी कर्मचारियों को अब शिफ्ट के आधार पर कार्यालय में ड्यूटी देनी है, ताकि लॉकडाउन में काफी पिछड़ चुके कामकाज को पटरी पर लाया जा सके। इस आदेश के बाद कर्मचारी ड्यूटी पर तो आ रहे हैं मगर सीट पर कम ही बैठ रहे है। ज्यादातर इधर-उधर खड़े होकर समय काट रहे हैं। कलक्ट्रेट में डीएम कार्यालय, एफएसडीए, रिकार्ड रूम सहित दूसरे कार्यालयों में स्टाफ कम दिखाई दे रहा है। ऐसे में बाहर से आने वाले लोगों को कर्मचारी न मिलने से उनके काम नहीं हो पा रहे। रिकार्ड रूम तो खुल गया है लेकिन वहां पर नकल लेने वाले वकील और लोगों की संख्या लगभग न के बराबर है। उधर तहसील में भी यही हाल है। यहां नजारत अनुभाग में लोगों ने लोगों को अंदर आने से रोकने के लिए बैरियर लगा दिया है। हालांकि दूसरे कोर्ट में स्टाफ बैठना शुरू कर दिया है लेकिन वहां मुव्वकिल नहीं आ रहे हैं।
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शासन ने सभी कर्मचारियों को अब शिफ्ट के आधार पर कार्यालय में ड्यूटी देनी है, ताकि लॉकडाउन में काफी पिछड़ चुके कामकाज को पटरी पर लाया जा सके। इस आदेश के बाद कर्मचारी ड्यूटी पर तो आ रहे हैं मगर सीट पर कम ही बैठ रहे है। ज्यादातर इधर-उधर खड़े होकर समय काट रहे हैं। कलक्ट्रेट में डीएम कार्यालय, एफएसडीए, रिकार्ड रूम सहित दूसरे कार्यालयों में स्टाफ कम दिखाई दे रहा है। ऐसे में बाहर से आने वाले लोगों को कर्मचारी न मिलने से उनके काम नहीं हो पा रहे। रिकार्ड रूम तो खुल गया है लेकिन वहां पर नकल लेने वाले वकील और लोगों की संख्या लगभग न के बराबर है। उधर तहसील में भी यही हाल है। यहां नजारत अनुभाग में लोगों ने लोगों को अंदर आने से रोकने के लिए बैरियर लगा दिया है। हालांकि दूसरे कोर्ट में स्टाफ बैठना शुरू कर दिया है लेकिन वहां मुव्वकिल नहीं आ रहे हैं।
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