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Bareilly News: खुले नालों से झांक रही बेपरवाही, मासूमों पर मंडरा रहा खतरा
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बरेली। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद शहर के नाले ढके नहीं गए। आबादी के बीच खुले 50 नाले खतरों का सबब बने हुए हैं। सबसे ज्यादा खतरा मासूमों की जान को है। दो जून को संजयनगर में डूबने से नौ साल के विराट की जान चली गई थी। इधर, सैदपुर हाकिंस में नर्सरी रोड पर छह दिनों के भीतर दो बच्चे नाले में गिरे। गनीमत रही कि उनकी जान बच गई। आसपास के लोग अनहोनी की आशंका से परेशान हैं। जबकि, जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं।
सैदपुर हाकिंस में नर्सरी रोड पर पांच से छह फुट गहरे और खुले नाले के किनारे आबादी है। यहां दीपक मौर्य का दो साल का बेटा शिवा रविवार को खेलते-खेलते नाले में गिर गया। पास में खेल रही उसकी बड़ी बहन अदिति (12) ने उसे बचा लिया। इसी मोहल्ले के आनंद की छह साल की बेटी पल्लवी शुक्रवार को खेलते-खेलते अचानक नाले में गिर गई थी। उसे भी अदिति ने ही बचाया।
पल्लवी की मां सुरभि ने बताया कि एक साल पहले उनका बेटा भी नाले में गिर गया था। तब पति ने उसे निकाला था। एक साल से नाला ढकने की मांग कर रहे हैं, पर कोई देखने तक नहीं आया। पार्षद ने बताया कि नाले ढकने में देरी जानलेवा हो सकती है। ब्यूरो
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हवा में तैर रहा आदेश
नगर आयुक्त ने आबादी के बीच नाले ढकने के निर्देश दिए थे, लेकिन सैदपुर हाकिंस में नर्सरी रोड पर इसका कोई असर नहीं है। अब मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने दो दिन में सभी नालों का निरीक्षण कर खतरनाक स्थलों पर बचाव के उपाय करने के निर्देश अभियंताओं को दिए हैं।
ये है हाल
फाल्तूनगंज में समोसे वाली गली के पास नाला दस साल से खुला है। बेनीपुर चक में रेलवे क्रॉसिंग के निकट स्थित खुला नाला भी खतरनाक है। सहसवानी टोला के सतीपुर में स्टाइलिश सैलून के बाहर नाले का मैनहोल खुला है। इसी वार्ड में पीलीभीत बाइपास से गंगासहाय के मकान तक का नाला अधूरा और खुला है। बिहारीपुर में सिटी रेलवे स्टेशन के करीब जीजीआईसी मोड़ पर नाला सफाई के लिए खोला गया था। उसे एक महीने से ढका नहीं गया। दूल्हा मियां की मजार के सामने नाला खुला पड़ा है। जसौली स्कूल के बच्चे यहीं से होकर गुजरते हैं। मालियों की पुलिया पर नाले के एक हिस्से पर स्लैब नहीं है।
पार्षदों की पहल के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
मेरे वार्ड में दो नाले खुले हैं। दो सालों में दस बार नगर निगम को लिखकर दिया, पर कार्रवाई नहीं हुई। -हरीशंकर लोधी पार्षद
मैंने एक साल में कई बार जेई से कहा कि नाले खतरनाक हैं। जेई ने कहा कि स्लैब डालेंगे, पर कुछ नहीं हुआ। - नवल किशोर मौर्य, पार्षद
मैंने एक महीने में कई बार नाले पर स्लैब डालकर ढकने की मांग की, लेकिन कोई काम नहीं हो सका। - संतोष कश्यप, पार्षद
नाला सड़क के बराबर है। बारिश के दौरान जलभराव होने पर नाला दिखता नहीं है और लोग गिरते रहते हैं। - सलीम पटवारी, पार्षद
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स्कूल, अस्पताल या किसी अन्य सार्वजनिक स्थल के पास खुले नालों का निरीक्षण कराने के साथ ही बचाव के इंतजाम कराए जा रहे हैं। - संंजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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सैदपुर हाकिंस में नर्सरी रोड पर पांच से छह फुट गहरे और खुले नाले के किनारे आबादी है। यहां दीपक मौर्य का दो साल का बेटा शिवा रविवार को खेलते-खेलते नाले में गिर गया। पास में खेल रही उसकी बड़ी बहन अदिति (12) ने उसे बचा लिया। इसी मोहल्ले के आनंद की छह साल की बेटी पल्लवी शुक्रवार को खेलते-खेलते अचानक नाले में गिर गई थी। उसे भी अदिति ने ही बचाया।
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पल्लवी की मां सुरभि ने बताया कि एक साल पहले उनका बेटा भी नाले में गिर गया था। तब पति ने उसे निकाला था। एक साल से नाला ढकने की मांग कर रहे हैं, पर कोई देखने तक नहीं आया। पार्षद ने बताया कि नाले ढकने में देरी जानलेवा हो सकती है। ब्यूरो
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हवा में तैर रहा आदेश
नगर आयुक्त ने आबादी के बीच नाले ढकने के निर्देश दिए थे, लेकिन सैदपुर हाकिंस में नर्सरी रोड पर इसका कोई असर नहीं है। अब मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी ने दो दिन में सभी नालों का निरीक्षण कर खतरनाक स्थलों पर बचाव के उपाय करने के निर्देश अभियंताओं को दिए हैं।
ये है हाल
फाल्तूनगंज में समोसे वाली गली के पास नाला दस साल से खुला है। बेनीपुर चक में रेलवे क्रॉसिंग के निकट स्थित खुला नाला भी खतरनाक है। सहसवानी टोला के सतीपुर में स्टाइलिश सैलून के बाहर नाले का मैनहोल खुला है। इसी वार्ड में पीलीभीत बाइपास से गंगासहाय के मकान तक का नाला अधूरा और खुला है। बिहारीपुर में सिटी रेलवे स्टेशन के करीब जीजीआईसी मोड़ पर नाला सफाई के लिए खोला गया था। उसे एक महीने से ढका नहीं गया। दूल्हा मियां की मजार के सामने नाला खुला पड़ा है। जसौली स्कूल के बच्चे यहीं से होकर गुजरते हैं। मालियों की पुलिया पर नाले के एक हिस्से पर स्लैब नहीं है।
पार्षदों की पहल के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
मेरे वार्ड में दो नाले खुले हैं। दो सालों में दस बार नगर निगम को लिखकर दिया, पर कार्रवाई नहीं हुई। -हरीशंकर लोधी पार्षद
मैंने एक साल में कई बार जेई से कहा कि नाले खतरनाक हैं। जेई ने कहा कि स्लैब डालेंगे, पर कुछ नहीं हुआ। - नवल किशोर मौर्य, पार्षद
मैंने एक महीने में कई बार नाले पर स्लैब डालकर ढकने की मांग की, लेकिन कोई काम नहीं हो सका। - संतोष कश्यप, पार्षद
नाला सड़क के बराबर है। बारिश के दौरान जलभराव होने पर नाला दिखता नहीं है और लोग गिरते रहते हैं। - सलीम पटवारी, पार्षद
स्कूल, अस्पताल या किसी अन्य सार्वजनिक स्थल के पास खुले नालों का निरीक्षण कराने के साथ ही बचाव के इंतजाम कराए जा रहे हैं। - संंजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त