ये शहर तो भैंसों का है, कैसे बनेगा स्मार्ट
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संजय कम्यूनिटी हाल परिसर में करीब 10 हजार मीटर तालाब में नाले का पानी भरता है। एक दशक पूर्व तालाब की पंपिंग सेट लगाकर सफाई भी कराई गई थी। इसके बाद डेयरी मालिकों ने तालाब पर कब्जा कर लिया। ये मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। डेयरी मालिक नगर निगम से मुकदमा भी हर चुके हैं। फिर भी नगर निगम डेयरी मालिकों से तालाब पर कब्जा नहीं ले पाया। अब भी डेयरी की सैकड़ों भैंसें तालाब में दिन भर तैरती हैं। पिछले दिनों मंडलायुक्त प्रमांशु यादव ने शहर के बीचोबीच स्थित इस तालाब का सौंदर्यीकरण कराने के निर्देश नगर आयुक्त को दिए थे। इसके बाद नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने मौके का निरीक्षण कर डेयरी मालिकों को तालाब खाली कराने को कहा। इस पर उनकी डेयरी मालिकों से नोकझोंक भी हो गई थी। तब से तालाब के सौंदर्यीकरण की फाइल फिलहाल ठंडे बस्ते में है। अब तालाब में रोजाना पहले से भी ज्यादा भैंसें तैरती हैं। मुकदमा हारने के बाद भी डेयरी मालिक किसी हाल में तालाब से कब्जा छोड़ने को राजी नही हैं। आंकड़ों के मुताबिक शहर में 403 डेयरियां चल रही हैं। इनमें 95 फीसदी से ज्यादा अनाधिकृत हैं। इनका नगर निगम में पंजीकरण नहीं है।