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पीली ईंट-नदी के रेत से बन रही निगम की बिल्डिंग, पार्षदों का हंगामा
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पीली ईंट-नदी के रेत से बन रही निगम की बिल्डिंग, पार्षदों का हंगामा
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। शहर में बनने वाली सड़कों और नाले-नालियों में गड़बड़-घोटालों की शिकायतें आम हैं लेकिन मंगलवार को नगर निगम की निर्माणाधीन इमारत में ही नदी का घटिया रेत और पीली ईंटें इस्तेमाल किए जाने का शोर पार्षदों ने मचा दिया। हंगामे के बाद निर्माण विभाग के एई और जेई पहुंचे तो पार्षदों के सवालों के आगे कोई जवाब नहीं दे पाए। पार्षदों ने मेयर उमेश गौतम से इस मामले में शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
नगर निगम के मौजूदा परिसर में ही 12.5 करोड़ रुपये की लागत से नए कार्यालय भवन का निर्माण किया जा रहा है। इसमें भूतल के अलावा तीन और मंजिलें होंगी। करीब 70 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। मंगलवार दोपहर नगर निगम के उपनेता छंगामल मौर्य, रईस मियां अब्बासी, मुकेश सिंघल, अकील गुड्डू, नरेश कुमार, विनोद सैनी समेत कई पार्षद यहां पहुंचे तो निर्माण स्थल पर नदी का रेत और पीली ईंटें देखकर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर निर्माण विभाग के एई मनोज गुप्ता और जेई केके रस्तोगी वहां पहुंच गए। पार्षदों ने निर्माण में लग रही ईंटों को पीली बताया तो अफसर इससे इनकार करने लगे। इस पर एक पार्षद ने दो ईंटें उठाकर आपस में टकराईं तो वे एक झटके में ही टूट गईं। इसके बाद एई कोई जवाब नहीं दे सके।
पार्षद बोले- हमारी न मानो तो मजदूर से पूछ लो कैसा घपला
पार्षदों ने दावा किया कि मौके पर नदी का रेत और पीली ईंटें देखकर उन्होंने वहीं काम कर रहे एक मजदूर से पूछताछ की तो उसने बताया कि नगर निगम भवन का निर्माण करा रहे ठेकेदार उनसे 12 कट्टा बजरफुट के साथ सिर्फ एक कट्टा सीमेंट मिलवा रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि निर्माण कार्य किस गुणवत्ता का कराया जा रहा है।
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नदी वाले रेत के ढेर
निर्माणाधीन भवन के पीछे की ओर से नदी से निकलने वाले रेत का बड़ा सा ढेर लगा है। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि बजरफुट में रेत मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि अफसर इससे इनकार करते रहे।
पार्षदों के आरोप गलत हैं, निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। नदी का रेत प्लास्टर के लिए मंगाया गया है। फिर भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
- संजय चौहान, प्रभारी चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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नगर निगम के मौजूदा परिसर में ही 12.5 करोड़ रुपये की लागत से नए कार्यालय भवन का निर्माण किया जा रहा है। इसमें भूतल के अलावा तीन और मंजिलें होंगी। करीब 70 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। मंगलवार दोपहर नगर निगम के उपनेता छंगामल मौर्य, रईस मियां अब्बासी, मुकेश सिंघल, अकील गुड्डू, नरेश कुमार, विनोद सैनी समेत कई पार्षद यहां पहुंचे तो निर्माण स्थल पर नदी का रेत और पीली ईंटें देखकर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पर निर्माण विभाग के एई मनोज गुप्ता और जेई केके रस्तोगी वहां पहुंच गए। पार्षदों ने निर्माण में लग रही ईंटों को पीली बताया तो अफसर इससे इनकार करने लगे। इस पर एक पार्षद ने दो ईंटें उठाकर आपस में टकराईं तो वे एक झटके में ही टूट गईं। इसके बाद एई कोई जवाब नहीं दे सके।
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पार्षद बोले- हमारी न मानो तो मजदूर से पूछ लो कैसा घपला
पार्षदों ने दावा किया कि मौके पर नदी का रेत और पीली ईंटें देखकर उन्होंने वहीं काम कर रहे एक मजदूर से पूछताछ की तो उसने बताया कि नगर निगम भवन का निर्माण करा रहे ठेकेदार उनसे 12 कट्टा बजरफुट के साथ सिर्फ एक कट्टा सीमेंट मिलवा रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि निर्माण कार्य किस गुणवत्ता का कराया जा रहा है।
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नदी वाले रेत के ढेर
निर्माणाधीन भवन के पीछे की ओर से नदी से निकलने वाले रेत का बड़ा सा ढेर लगा है। पार्षदों ने आरोप लगाया है कि बजरफुट में रेत मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि अफसर इससे इनकार करते रहे।
पार्षदों के आरोप गलत हैं, निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है। नदी का रेत प्लास्टर के लिए मंगाया गया है। फिर भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
- संजय चौहान, प्रभारी चीफ इंजीनियर, नगर निगम