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दरोगा के घर वालों ने फिर की सीबीआई जांच की मांग
बरेली
Updated Mon, 05 Oct 2015 01:13 AM IST
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फरीदपुर। पशु तस्करों की गोली के शिकार हुए दरोगा मनोज मिश्रा के घर वालों ने फिर सीबीआई जांच की मांग की है। रविवार को फरीदपुर पहुंचकर दरोगा का कमरा देखने के बाद वे डीएम से मिले और जांच पर सवाल उठाए। मोबाइल का सिम गायब होने को साजिश बताकर उन्होंने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक और सपा नेताओं की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया।
लखीमपुर खीरी के विहिप नेता संजय मिश्रा, शशीधर मिश्रा, किशन वाजपेयी के साथ मनोज मिश्रा की पत्नी, पिता और भाई रविवार को फरीदपुर कोतवाली पहुंचे। इसके बाद दरोगा के कमरे में गए। उन्हें दरोगा के मोबाइल से चिप गायब मिला। उन्होंने कहा कि दरोगा को फोन पर मिली धमकियों की रिकार्डिंग का सबूत नष्ट किया गया है। इसके बाद डीएम से मिलकर उन्होंने कहा कि वारदात के डेढ़ घंटे बाद अफसरों को सूचना दी गई। तत्काल एंबुलेंस का इंतजाम भी नहीं किया गया। यह भी कहा कि हत्या से एक दिन पहले तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सेे दरोगा की पशु तस्करी को लेकर कहासुनी हुई थी। मनोज मिश्रा ने कई बार उनके कहने के बाद भी पशु तस्करों को नहीं छोड़ा था। परिवार वालों ने परिवार को 50 लाख रुपये और पत्नी व भाई को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की।
मुखबिर से पूछताछ क्यों नहीं की
यह भी आरोप लगाया कि जिस मुखबिर की सूचना पर पुलिस फोर्स भेजी गई उसे बुलाकर पूछताछ क्यों नहीं की गई। उसे अभियुक्त भी नहीं बनाया गया।
पूर्व प्रमुख और सपा नेताओं ने भी धमकाया
परिवार वालों के मुताबिक पशु तस्करों के खिलाफ अभियान न छेड़ने के लिए सपा नेताओं और एक पूर्व ब्लाक प्रमुख ने भी दरोगा को धमकाया था। लेकिन मनोज ने ऐसा करने से मना कर दिया था। इसकी शिकायत पुलिस अफसरों से भी की गई थी।
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विहिप ने दी आंदोलन की चेतावनी
विहिप नेता संजय मिश्रा, शशीधर मिश्र आदि ने बरेली जिले के जिला मंत्री मानवेंद्र राणा के निवास पर कहा कि यदि सीबीआई जांच की संस्तुति नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मुआवजा देने में भी भेदभाव का आरोप लगाया।
ये था मामला
नौ अगस्त को फरीदपुर कोतवाली में तैनात दरोगा मनोज मिश्रा की पशु तस्करों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया था। लेकिन घर वाले पुलिस जांच पर सवाल उठा रहे हैं।
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लखीमपुर खीरी के विहिप नेता संजय मिश्रा, शशीधर मिश्रा, किशन वाजपेयी के साथ मनोज मिश्रा की पत्नी, पिता और भाई रविवार को फरीदपुर कोतवाली पहुंचे। इसके बाद दरोगा के कमरे में गए। उन्हें दरोगा के मोबाइल से चिप गायब मिला। उन्होंने कहा कि दरोगा को फोन पर मिली धमकियों की रिकार्डिंग का सबूत नष्ट किया गया है। इसके बाद डीएम से मिलकर उन्होंने कहा कि वारदात के डेढ़ घंटे बाद अफसरों को सूचना दी गई। तत्काल एंबुलेंस का इंतजाम भी नहीं किया गया। यह भी कहा कि हत्या से एक दिन पहले तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सेे दरोगा की पशु तस्करी को लेकर कहासुनी हुई थी। मनोज मिश्रा ने कई बार उनके कहने के बाद भी पशु तस्करों को नहीं छोड़ा था। परिवार वालों ने परिवार को 50 लाख रुपये और पत्नी व भाई को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की।
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मुखबिर से पूछताछ क्यों नहीं की
यह भी आरोप लगाया कि जिस मुखबिर की सूचना पर पुलिस फोर्स भेजी गई उसे बुलाकर पूछताछ क्यों नहीं की गई। उसे अभियुक्त भी नहीं बनाया गया।
पूर्व प्रमुख और सपा नेताओं ने भी धमकाया
परिवार वालों के मुताबिक पशु तस्करों के खिलाफ अभियान न छेड़ने के लिए सपा नेताओं और एक पूर्व ब्लाक प्रमुख ने भी दरोगा को धमकाया था। लेकिन मनोज ने ऐसा करने से मना कर दिया था। इसकी शिकायत पुलिस अफसरों से भी की गई थी।
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विहिप ने दी आंदोलन की चेतावनी
विहिप नेता संजय मिश्रा, शशीधर मिश्र आदि ने बरेली जिले के जिला मंत्री मानवेंद्र राणा के निवास पर कहा कि यदि सीबीआई जांच की संस्तुति नहीं की गई तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने मुआवजा देने में भी भेदभाव का आरोप लगाया।
ये था मामला
नौ अगस्त को फरीदपुर कोतवाली में तैनात दरोगा मनोज मिश्रा की पशु तस्करों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने 15 आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सभी को जेल भेज दिया था। लेकिन घर वाले पुलिस जांच पर सवाल उठा रहे हैं।