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Mukhtar Ansari Death: शिवपाल यादव बोले- जेल में मुख्तार अंसारी की मौत के लिए प्रशासन और सरकार जिम्मेदार

Fri, 29 Mar 2024 05:22 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 29 Mar 2024 05:22 PM IST
सार

बदायूं में मीडिया वार्ता के दौरान शिवपाल सिंह यादव ने मुख्तार अंसारी की मौत पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जेल में मौत होना संदेह के घेरे में है। इसके लिए प्रशासनिक अफसरों से लेकर सरकार तक जिम्मेदार है।

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मुख्तार अंसारी की मौत पर शिवपाल यादव ने उठाया सवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार रात हार्ट अटैक (कार्डियक अरेस्ट) से मौत हो गई। इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत संदेह के घेरे में है। न्यायालय को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। बदायूं से सपा प्रत्याशी शिवपाल यादव ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में ये बातें कहीं। 

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सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने कहा कि मुख्तार अंसारी से हमारे पारिवारिक संबंध रहे हैं। आजादी की लड़ाई में मुख्तार के परिवार का बड़ा योगदान रहा है। मुख्तार अंसारी की मौत संदेह  के घेरे में है। कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
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अब्बास को जनाजे में शामिल होने की मिले अनुमति 
उन्होंने कहा कि जेल में किसी की मौत होती है तो प्रशासनिक अधिकारी से लेकर सरकार तक सबकी जिम्मेदारी है। मुख्तार अंसारी की मौत भी संदेह के घेरे में है। कोर्ट को स्वयं संज्ञान लेना लेना चाहिए। अब्बास अंसारी के पिता की मौत हुई है तो डीएम को स्वतः ही जनाजा में शामिल होने की अनुमति दे देनी चाहिए।

मुख्तार का आखिरी ऑडियो: बेहोश हो जा रहा हूं, बाबू हम ठीक से बैठ नहीं पा रहे; अब नहीं बचूंगा...
 

स्वामी प्रसाद मौर्य ने उठाए ये सवाल
राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने एक्स अकाउंट में लिखा है कि 'यह स्वाभाविक मौत नहीं हत्या की साजिश प्रतीत होती है, पहले डाक्टरों की पैनल ने अस्पताल से डिस्चार्ज किया और कुछ घंटो बाद ही उनकी मौत, पारिवारिजनों द्वारा लगाए गये हत्या की साजिश की पुष्टि करती है। अतः पूरे घटना क्रम की जांच उच्च न्यायालय की देखरेख में होना चाहिए, यहां तक कि पोस्टमार्टम भी उच्च न्यायालय के किसी जज के अभिरक्षण में ही किया जाना चाहिए, जिससे कि न्याय का गला घोंटने वालों का चेहरा बेनकाब हो सके तथा थानों, जेलों, पुलिस अभिरक्षण में साजिशन किये जा रहे इस प्रकार के हत्याओं के फैशन पर विराम लग सके।'

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