UP News: बरेली में मुफ्ती सलमान अजहरी बोले- 56 इंच के सीने से कोई ताकतवर नहीं होता
बरेली में उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन कर्नाटक के अल अमान फाउंडेशन के संस्थापक मुफ्ती सलमान अजहरी ने भी तकरीर दी। उन्होंने कहा कि अमन और इस्लाम की बात जरूरी है, लेकिन खराबी को सही करना भी जरूरी है।
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हेट स्पीच के आरोप में गुजरात की जेल में आठ माह बिताने वाले कर्नाटक के अल अमान फाउंडेशन के संस्थापक मुफ्ती सलमान अजहरी ने बरेली में उर्स-ए-रजवी के मंच से कहा कि 56 इंच का सीना होने से कोई ताकतवर नहीं होता। आला हजरत दुबले-पतले थे, लेकिन जब वह कलम उठाते थे तो गुस्ताख कांपते थे। अमन और इस्लाम की बात जरूरी है, लेकिन खराबी को सही करना भी जरूरी है। एक साथ गलतियां बता दो तो लोग खिलाफ हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसमें तकलीफें और मुसीबतें आएंगी। मैं जब जेल में था तो आला हजरत का एक शेर मेरा वजीफा था। उन्होंने शेर पढ़ते हुए कहा कि 'उनके निसार कोई कैसे ही रंज में हो, जब याद आ गए हैं सब रंज भुला दिए हैं'। बीते साल उर्स के दौरान उनकी रिहाई को लेकर नौजवानों ने मांग उठाई थी। तब मंच पर मौजूद उलमा ने उनको खामोश करा दिया था। इस साल नौजवान सलमान अजहरी से मिलने के लिए बेताब दिखे।
गुस्ताखियां रोकने के लिए बने कानून
उर्स-ए-रजवी व उर्स-ए-अमीन-ए-शरीअत के आखिरी दिन ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी (आरएसी) के मुख्यालय बैतुर्रजा पर कुल की रस्म अदा की गई। सदारत कर रहे आरएसी के अध्यक्ष मौलाना अदनान रजा कादरी ने रसूल की शान में गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग उठाई।
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सुबह दस बजे मौलाना नसीम आसी ने कुरान की तिलावत की। मुफ्ती उमर रजा, मौलाना अबरार रजा, मौलाना शरीफ रजा, मौलाना सय्यद सफदर रजा ने जलसे को खिताब किया। अली रजा मियां समेत मुफ्ती आमिर जफर व अन्य लोगों ने नातो-मनकबत का नजराना पेश किया। इस मौके पर आरएसी के तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फलस्तीनी मुसलमानों के लिए की दुआ
कुल शरीफ के बाद सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने हिंदुस्तान में अमन ओ सुकून के साथ मिल्लत और फलस्तीन के मुसलमानों के लिए खुसूसी दुआ की। इसके बाद दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां ने लोगों को मुरीद किया। मुफ्ती अहसन मियां और सैयद आसिफ मियां ने पुलिस, प्रशासन, मीडिया सहित सभी लंगर कमेटियों और उर्स में शिरकत करने वाले रजाकारों का शुक्रिया अदा किया।
जिंदगी सुधारने का दिया पैगाम
तौसीफ रजा खां ने उर्स के मंच से कहा कि जिंदगी को संवारने के लिए शिक्षा, सामाजिक एकता, आपसी सहयोग, सौहार्द, खुला संवाद और नेतृत्व क्षमता जरूरी है। पढ़ने-पढ़ाने और देश को मजबूत बनाने पर जोर दिया। पांच वक्त की नमाज की ताकीद की। मसले कोर्ट-कचहरी में ले जाने के बजाय शरीयत की रोशनी में हल करने की बात कही।