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कैंट की मीट फैक्टरियों में 50 से ज्यादा कश्मीरी भी
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लंबे समय से कर रहे हैं नौकरी, पुलिस को न आधिकारिक सूचना दी न कभी सत्यापन कराया
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बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद सक्रिय हुई पुलिस, एडीजी ने कहा- गंभीर मसला
बरेली। कैंट इलाके में मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी से दो बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद नई परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। अब मारिया और उससे सटी रहबर मीट फैक्टरी में तमाम कश्मीरियों के नौकरी करने की खबर से पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है। खुद पुलिस यह स्वीकार कर रही है कि दोनों फैक्टरियों में 50 से ज्यादा ऐसे कश्मीरी काफी समय से काम कर रहे हैं जिनका अब तक कोई सत्यापन नहीं हुआ है।
मारिया फ्रोजन और रहबर फूड्स समेत दोनों मीट फैक्टरी नकटिया में हैं। दोनों फैक्टरियों में कश्मीरी युवकों को बतौर सिक्योरिटी गार्ड नौकरी दी गई है। इन कश्मीरियों का न सत्यापन कराया गया है न पुलिस को उनके बारे में कोई सूचना दी गई है। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से मीट फैक्टरियों में काम कर रहे कश्मीरियों ने स्लॉटर हाउस के आसपास मोहनपुर और ठिरिया गांवों में किराये पर मकान ले रखे हैं। कैंट जैसे संवेदनशील इलाके में उनकी मौजूदगी के बावजूद पुलिस के पास इन कश्मीरियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद अब दोनों फैक्टरियों का प्रबंधन भी स्वीकार कर रहा है कि उनकी फैक्टरी में कई कश्मीरी काम कर रहे हैं। रहबर फूड्स के जीएम निसार मूसा का कहना है कि कश्मीरी कर्मचारियों का वह जल्द ही सत्यापन करा लेंगे। मारिया फ्रोजन के प्रबंधक ईशान खान ने कहा कि फैक्टरी में कुछ कर्मचारी कश्मीरी हो सकते हैं। यह जानकारी नहीं है कि सिक्योरिटी कंपनी ने उनका सत्यापन कराया है या नहीं। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह के मुताबिक दोनों मीटर फैक्टरियों में करीब 50 कश्मीरियों के काम करने की सूचना उन्हें मिली है। दोनों फैक्टरी के प्रबंधन को उनका सत्यापन कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस अपने स्तर से भी छानबीन कर रही है।
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मीट फैक्टरी में काम कर रहे कश्मीरियों का पुलिस से सत्यापन न कराया जाना गंभीर मसला है। एसएसपी को इस बारे में निर्देश जारी किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी का सत्यापन कराया जाएगा। - अविनाश चंद्र, एडीजी बरेली जोन
बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी पर मीट फैक्टरी प्रबंधन भी सवालों में घिरा
बरेली। अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी दो महीने से नकटिया की मीट फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे। प्रबंधन ने फैक्टरी परिसर में ही दोनों के रहने का इंतजाम किया हुआ था। पुलिस से उनका सत्यापन भी नहीं कराया था। यूपी एटीएस के दोनों को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब फैक्टरी प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।
बरेली से आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी की गिरफ्तारी 26 जुलाई को लखनऊ में गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी मोहम्मद नूर से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर की गई। एटीएस ने नूर को बांग्लादेश और म्यांमार से मानव तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। नूर ने एटीएस को बताया था कि आले मियां उसका रिश्तेदार है जबकि अब्दुल शकूर उसके गांव का रहने वाला है। दोनों को वह अवैध तरीके से भारत लाया था। एटीएस ने आले मियां और शकूर की गिरफ्तारी मारिया फ्रोजन से दिखाई है जबकि मारिया के मैनेजर ईशान खान का कहना है कि दोनों बांग्लादेशी उनकी नहीं बल्कि रहबर फूड्स मीट फैक्टरी से गिरफ्तार किए गए हैं। मारिया अब नगर निगम के स्लॉटर हाउस को चलाती है। रहबर फूड्स से उसका कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में वह एसएसपी को भी अवगत करा चुके हैं।
तीन महीने पहले बरेली आने के बाद बनवाया पहचान पत्र और पैन कार्ड
बरेली पुलिस की जांच में पता चला है कि आले मियां और अब्दुल शकूर करीब तीन महीने पहले बरेली आए थे। बरेली आने के बाद ही उन्होंने अपना फर्जी पहचान पत्र और पैन कार्ड बनवाया था और फिर फैक्टरी में नौकरी करने लगे थे। दोनों फर्जीवाड़ा करके भारत में घुसे थे इसलिए किराये पर कमरा लेकर रहने के बजाय दोनों फैक्टरी परिसर में ही रहते थए। इनमें से एक पैकिंग का काम करता था और दूसरा मांस की सफाई करता था। रहबर फूड्स के जीएम निसार मूसा के मुताबिक आले मियां और अब्दुल शकूर करीब दो महीने पहले आए थे। उनके पास आधार कार्ड नहीं थे, दोनों ने कुछ दिन बाद आधार कार्ड देने को कहा था। उनकी बात पर यकीन कर उन्हें नौकरी दे दी गई थी।
खुफिया इकाइयों पर भी सवाल
बांग्लादेशी अवैध तरीके से भारत में घुसकर बरेली तक पहुंच गए और यहां आकर नौकरी करने लगे मगर खुफिया इकाइयों को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब दोनों की गिरफ्तारी के बाद सतर्क हुई खुफिया इकाइयों ने जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
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बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद सक्रिय हुई पुलिस, एडीजी ने कहा- गंभीर मसला बरेली। कैंट इलाके में मारिया फ्रोजन मीट फैक्टरी से दो बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद नई परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। अब मारिया और उससे सटी रहबर मीट फैक्टरी में तमाम कश्मीरियों के नौकरी करने की खबर से पुलिस महकमे में हलचल मची हुई है। खुद पुलिस यह स्वीकार कर रही है कि दोनों फैक्टरियों में 50 से ज्यादा ऐसे कश्मीरी काफी समय से काम कर रहे हैं जिनका अब तक कोई सत्यापन नहीं हुआ है।
मारिया फ्रोजन और रहबर फूड्स समेत दोनों मीट फैक्टरी नकटिया में हैं। दोनों फैक्टरियों में कश्मीरी युवकों को बतौर सिक्योरिटी गार्ड नौकरी दी गई है। इन कश्मीरियों का न सत्यापन कराया गया है न पुलिस को उनके बारे में कोई सूचना दी गई है। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से मीट फैक्टरियों में काम कर रहे कश्मीरियों ने स्लॉटर हाउस के आसपास मोहनपुर और ठिरिया गांवों में किराये पर मकान ले रखे हैं। कैंट जैसे संवेदनशील इलाके में उनकी मौजूदगी के बावजूद पुलिस के पास इन कश्मीरियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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बांग्लादेशियों के पकड़े जाने के बाद अब दोनों फैक्टरियों का प्रबंधन भी स्वीकार कर रहा है कि उनकी फैक्टरी में कई कश्मीरी काम कर रहे हैं। रहबर फूड्स के जीएम निसार मूसा का कहना है कि कश्मीरी कर्मचारियों का वह जल्द ही सत्यापन करा लेंगे। मारिया फ्रोजन के प्रबंधक ईशान खान ने कहा कि फैक्टरी में कुछ कर्मचारी कश्मीरी हो सकते हैं। यह जानकारी नहीं है कि सिक्योरिटी कंपनी ने उनका सत्यापन कराया है या नहीं। इंस्पेक्टर कैंट राजीव सिंह के मुताबिक दोनों मीटर फैक्टरियों में करीब 50 कश्मीरियों के काम करने की सूचना उन्हें मिली है। दोनों फैक्टरी के प्रबंधन को उनका सत्यापन कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस अपने स्तर से भी छानबीन कर रही है।
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मीट फैक्टरी में काम कर रहे कश्मीरियों का पुलिस से सत्यापन न कराया जाना गंभीर मसला है। एसएसपी को इस बारे में निर्देश जारी किए जा रहे हैं। जल्द ही सभी का सत्यापन कराया जाएगा। - अविनाश चंद्र, एडीजी बरेली जोन
बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी पर मीट फैक्टरी प्रबंधन भी सवालों में घिरा
बरेली। अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी दो महीने से नकटिया की मीट फैक्टरी में नौकरी कर रहे थे। प्रबंधन ने फैक्टरी परिसर में ही दोनों के रहने का इंतजाम किया हुआ था। पुलिस से उनका सत्यापन भी नहीं कराया था। यूपी एटीएस के दोनों को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब फैक्टरी प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।बरेली से आले मियां और अब्दुल शकूर उर्फ गनी की गिरफ्तारी 26 जुलाई को लखनऊ में गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी मोहम्मद नूर से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर की गई। एटीएस ने नूर को बांग्लादेश और म्यांमार से मानव तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया था। नूर ने एटीएस को बताया था कि आले मियां उसका रिश्तेदार है जबकि अब्दुल शकूर उसके गांव का रहने वाला है। दोनों को वह अवैध तरीके से भारत लाया था। एटीएस ने आले मियां और शकूर की गिरफ्तारी मारिया फ्रोजन से दिखाई है जबकि मारिया के मैनेजर ईशान खान का कहना है कि दोनों बांग्लादेशी उनकी नहीं बल्कि रहबर फूड्स मीट फैक्टरी से गिरफ्तार किए गए हैं। मारिया अब नगर निगम के स्लॉटर हाउस को चलाती है। रहबर फूड्स से उसका कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में वह एसएसपी को भी अवगत करा चुके हैं।