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बरेली में बंदरों ने फिर फैलाई दहाशत, बुजुर्ग को हमलाकर किया घायल

Mon, 25 Jul 2022 02:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jul 2022 02:21 AM IST
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monkey terror in meerganj
बरेली। शेरगढ़ ब्लॉक के गांव दुनका में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आठ दिन पहले एक मासूम की जान लेने के बाद रविवार सुबह फिर बंदरों के झुंड ने साठ वर्षीय बुजुर्ग छोटेलाल को हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। ग्रामीणों ने बमुश्किल उन्हें बंदरों के चंगुल से बचाया।
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दुनका निवासी साठ वर्षीय छोटेलाल राठौर सुबह घर में अकेले थे। उनकी पत्नी बुद्धो और दो बेटियां बिलासो और कुसुम मजदूरी पर मिर्च तोड़ने गईं थीं। करीब सात बजे बंदर का बच्चा उनके कमरे में घुस आया। उन्होंने उसे भगाने का प्रयास किया तो वह चीखने लगा। उसकी चीख सुनकर कई बंदर आ गए और छोटेलाल पर हमला कर दिया। उन्हें जमीन पर गिराकर बुरी तरह काटा। चीखपुकार सुनकर आसपास के लोगों ने लाठी-डंडे लेकर बंदरों के चंगुल से उन्हें बचाया।
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बच्चे की मौत के बाद भी नहीं चेते अफसर
16 जुलाई को दुनका के ही अरुण उपाध्याय उर्फ निर्देश के चार माह के बेटे कार्तिक को छत पर टहलते वक्त बंदरों का झुंड गोद से छीन ले गया था। इसके बाद दो मंजिल मकान की छत से मासूम को फेंककर मार डाला था। इस घटना के बाद से गांव में दहशत है। एक सप्ताह पहले गांव के ही अनिल कुमार के 10 वर्षीय बेटे निखिल पर हमलाकर बंदर उसके पैर का मांस नोच ले गए थे। इससे पहले गौरव की बेटी अंजली, मुनीश की बेटी सृष्टि और बेटे शुभम को बंदर हमला कर घायल कर चुके हैं। शनिवार दोपहर गांव के आसिफ बेग की बेटी चांदनी छत पर गई तो बंदरों के झुंड से उसे दौड़ा लिया। वह जान बचाकर भागी तो जीने से गिरकर घायल हो गई।
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आठ दिन से चिट्ठियों में उलझी बंदर पकड़ने की कार्रवाई
बरेली। चार महीने के बच्चे को छत से फेंककर मारने की घटना सुर्खियों में आने के बाद अफसरों ने ग्रामीणों को बंदर पकड़वाकर दूर किसी स्थान पर छुड़वाने का आश्वासन दिया था। वन विभाग की टीम भी गांव पहुंची थी।
घटना के दूसरे दिन 18 जुलाई को एसडीएम ने बीडीओ को बंदर पकड़वाने के लिए पत्र लिखा था, इसके बाद न तो ब्लॉक से कोई टीम गांव पहुंची न ही फोन पर संपर्क कर किसी से बात की। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक के अफसर सीयूजी नंबर तक नहीं उठाते हैं। रविवार को हुई घटना के बाद भी लोगों ने ब्लॉक के अफसरों को कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।
इधर, ग्राम प्रधान अफसर अहमद का कहना है कि घटना के बाद वन विभाग के दरोगा छेदालाल और डिप्टी रेंजर अजय राना गांव आए थे। ग्रामीणों ने घटना को लेकर उनसे नाराजगी जताई तो उन्होंने कहा कि बंदर पकड़ना वन विभाग का काम नहीं है। वन विभाग सिर्फ अनुमति दे सकता है। उन्होंने मथुरा की बंदर पकड़ने वाली एक टीम का नंबर भी प्रधान को दे दिया।
प्रधान ने बताया कि जब उन्होंने मथुरा की टीम से संपर्क किया तो टीम ने एक बंदर पकड़ने का पांच सौ रुपये खर्च बताया। कहा, कम से कम सौ बंदर पकड़ने का अनुबंध होने पर ही टीम आएगी। रहने-खाने का खर्च अलग से देना होगा। प्रधान ने कहा कि ग्राम पंचायत निधि में इसके लिए कोई धनराशि आवंटित नहीं है। उन्होंने भी बीडीओ से बात कर इस समस्या का हल निकालने की बात कही।

ग्रामीण बोले- बंदर पकड़वाएं वरना करेंगे आंदोलन
गांव के कमर बेग, कपिल गंगवार आदि ग्रामीणों का कहना है कि बंदर लगातार हिंसक होते जा रहे हैं। आए दिन किसी न किसी को हमला कर घायल कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यदि ऐसा ही रहा तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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