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Bareilly News: इंटरनेशनल क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप के लिए हुआ मो. आकिब का चयन
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बरेली। विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति को तोड़ती नहीं, बल्कि और मजबूत बनाती हैं। इस बात को सच साबित किया है मो. आकिब अंसारी ने, जिन्होंने बचपन में पोलियो का शिकार होने के बावजूद हार नहीं मानी। इसी परिश्रम का नतीजा है कि उनका चयन श्रीलंका में होने वाली इंटरनेशनल क्लब क्रिकेट चैंपियनशिप के लिए पैरा भारतीय टीम में हुआ है।
सात साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने से आकिब का दाहिना पैर 45 प्रतिशत तक प्रभावित हो गया था। समाज के ताने और शारीरिक कठिनाइयों ने उनका रास्ता कई बार रोका, लेकिन उन्होंने अपने जज्बे और मेहनत से इस कमजोरी को अपनी ताकत बना लिया। वर्ष 2007 में खेलों की दुनिया में कदम रखने वाले आकिब ने बताया कि शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
आकिब बताते हैं कि उन्होंने खेलों की शुरुआती बुनियाद दिशा विद्यालय से रखी। यहीं पर उन्हें प्रशिक्षण मिला और क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स स्टेडियम का रुख किया और वहां सामान्य खिलाड़ियों के साथ नियमित अभ्यास करने लगे। आकिब राहुल द्रविड़ को अपना आदर्श मानते हैं। उनका सपना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करें। वह उत्तर प्रदेश की दिव्यांग टीम व बरेली पैरा क्रिकेट टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। संवाद
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सात साल की उम्र में पोलियो की चपेट में आने से आकिब का दाहिना पैर 45 प्रतिशत तक प्रभावित हो गया था। समाज के ताने और शारीरिक कठिनाइयों ने उनका रास्ता कई बार रोका, लेकिन उन्होंने अपने जज्बे और मेहनत से इस कमजोरी को अपनी ताकत बना लिया। वर्ष 2007 में खेलों की दुनिया में कदम रखने वाले आकिब ने बताया कि शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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आकिब बताते हैं कि उन्होंने खेलों की शुरुआती बुनियाद दिशा विद्यालय से रखी। यहीं पर उन्हें प्रशिक्षण मिला और क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने स्पोर्ट्स स्टेडियम का रुख किया और वहां सामान्य खिलाड़ियों के साथ नियमित अभ्यास करने लगे। आकिब राहुल द्रविड़ को अपना आदर्श मानते हैं। उनका सपना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करें। वह उत्तर प्रदेश की दिव्यांग टीम व बरेली पैरा क्रिकेट टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं। संवाद
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