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इतना घटिया मिड डे मील खाएं कैसे.. कहते ही धुन दिया बच्चे को
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खराब खाना दिखाता छात्र।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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सिरौली। अफसरों-ठेकेदारों में जैसे-जैसे कमीशन की भूख बढ़ रही है, स्कूलों में बंटने वाला मिड डे मील उतना ही घटिया होता जा रहा है। कस्बे के जूनियर हाईस्कूल में मंगलवार को जब से हद से ज्यादा घटिया खाना परोसा गया तो सातवीं में पढ़ने वाले एक बच्चे ने उसे खाने के बजाय उल्टे सवाल पूछ लिया कि इतना घटिया दाल-चावल आखिर कैसे खाया जाए। इस पर भड़के ठेकेदार के गुर्गे ने उसे स्कूल में ही बुरी तरह धुन दिया। पिटाई से बच्चा इतनी दहशत में आया कि अपना बैग स्कूल में ही छोड़कर घर भाग गया। दूसरे बच्चों ने शिक्षकों से शिकायत की। अब अफसर जांच कराने की बात कह रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल में सातवीं में पढ़ने वाले राहिल अहमद ने बताया कि मंगलवार को मिड डे मील में सभी बच्चों को दाल-चावल परोसा गया था। चावल बेहद घटिया था और दाल भी बिलकुल पानी जैसी थी। यह खाया नहीं गया तो उसने आंवला से स्कूल में मिड डे मील पहुंचाने वाले ठेकेदार के नौकर से कह दिया कि कुछ तो ढंग का खाना लाया करो ताकि बच्चे उसे खा सकें। इतना सुनते ही नौकर ने उसे पीटना शुरू कर दिया। जैसे-तैसे वह उसके चंगुल से छूटा तो दहशत के मारे स्कूल छोड़कर घर भाग आया। इस घटना से दूसरे बच्चे भी सहम गए और उन्होंने चुपचाप घटिया मिड डे मील ही खा लिया।
बमुश्किल 15 प्रतिशत बच्चे खाते हैं मिड डे मील
स्कूलों में मिड डे मील पहुंचाने वाले ठेकेदारों ने भोजन की गुणवत्ता इतनी गिरा दी है कि बच्चे उसे खाना ही पसंद नहीं करते। बच्चों के मुताबिक चावल बेहद घटिया होते हैं और दाल में भी पानी के सिवा कुछ नहीं होता। दूध दिया जाता है तो करीब चार गुना पानी मिलाकर। स्कूल में बमुश्किल 15 प्रतिशत बच्चे ही मिड डे मील खाते हैं, वह भी मजबूरी में।
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बच्चा मुझे इस बारे में बताए बगैर ही घर चला गया। दूसरे बच्चों से मुझे घटना की जानकारी मिली है। बुधवार को पूरा ब्योरा पता करके अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - राकेश शास्त्री, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक
- बच्चे को पीटने का मामला गंभीर है। जांच कराकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विजय सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, रामनगर
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जूनियर हाईस्कूल में सातवीं में पढ़ने वाले राहिल अहमद ने बताया कि मंगलवार को मिड डे मील में सभी बच्चों को दाल-चावल परोसा गया था। चावल बेहद घटिया था और दाल भी बिलकुल पानी जैसी थी। यह खाया नहीं गया तो उसने आंवला से स्कूल में मिड डे मील पहुंचाने वाले ठेकेदार के नौकर से कह दिया कि कुछ तो ढंग का खाना लाया करो ताकि बच्चे उसे खा सकें। इतना सुनते ही नौकर ने उसे पीटना शुरू कर दिया। जैसे-तैसे वह उसके चंगुल से छूटा तो दहशत के मारे स्कूल छोड़कर घर भाग आया। इस घटना से दूसरे बच्चे भी सहम गए और उन्होंने चुपचाप घटिया मिड डे मील ही खा लिया।
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बमुश्किल 15 प्रतिशत बच्चे खाते हैं मिड डे मील
स्कूलों में मिड डे मील पहुंचाने वाले ठेकेदारों ने भोजन की गुणवत्ता इतनी गिरा दी है कि बच्चे उसे खाना ही पसंद नहीं करते। बच्चों के मुताबिक चावल बेहद घटिया होते हैं और दाल में भी पानी के सिवा कुछ नहीं होता। दूध दिया जाता है तो करीब चार गुना पानी मिलाकर। स्कूल में बमुश्किल 15 प्रतिशत बच्चे ही मिड डे मील खाते हैं, वह भी मजबूरी में।
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बच्चा मुझे इस बारे में बताए बगैर ही घर चला गया। दूसरे बच्चों से मुझे घटना की जानकारी मिली है। बुधवार को पूरा ब्योरा पता करके अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। - राकेश शास्त्री, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक
- बच्चे को पीटने का मामला गंभीर है। जांच कराकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - विजय सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी, रामनगर