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मौलाना शहाबुद्दीन बोले: वक्फ संशोधन बिल से धर्मस्थलों को खतरा नहीं, नेताओं के बहकावे में न आएं मुसलमान

Fri, 04 Apr 2025 03:32 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 04 Apr 2025 03:32 PM IST
सार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने वक्फ संशोधन बिल का खुला समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल गरीब व कमजोर मुसलमानों के हितों के लिए हैं। इससे किसी भी धार्मिक स्थल को कोई खतरा नहीं है। 

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Maulana Shahabuddin Razvi says no threat to religious places due to Waqf Amendment Bill
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद में वक्फ संशोधन बिल पास होने पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सरकार को शुक्रिया अदा किया। साथ ही देश के तमाम नागरिकों को भी मुबारकबाद पेश की। मौलाना ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल से आम मुसलमानों का कोई नुकसान नहीं है बल्कि फायदा होगा। नुकसान उन वक्फ भू माफिया का होगा जिन लोगों ने करोड़ों की जमीनों पर कब्जा कर रखा है।

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मौलाना ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल गरीब व कमजोर मुसलमानों के हितों के लिए है। वक्फ जमीन से होने वाली आमदनी गरीब मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने में लगाई जाएगी। वो परिवार जो गरीब हैं और अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। ऐसे बच्चों की आर्थिक मदद की जाएगी। अनाथ बच्चों और विधवा महिलाओं की तरक्की के लिए काम होंगे। इससे होने वाली आमदनी वक्फ की मंशा के मुताबिक खर्च की जाएगी। स्कूल, कॉलेज, मदरसे और अनाथालय खोले जाएंगे, जिससे गरीब मुसलमानों का शिक्षा के मैदान में पिछड़ापन दूर होगा। 
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धार्मिक स्थलों को कोई खतरा नहीं- मौलाना 
शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल से धार्मिक स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों, कब्रिस्तानों, दरगाहों को कोई खतरा नहीं है। इन धार्मिक स्थलों की स्थिति जैसी है वैसी ही रहेगी। इन धार्मिक स्थलों में हुकूमत कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकती। मुसलमानों को कुछ राजनीतिक लोग अपने स्वार्थों का लाभ लेने के लिए गुमराह कर रहे हैं। मुसलमान इन राजनीतिक लोगों के बहकावे और उकसावे में न आएं। 

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मौलाना ने आगे कहा कि गत वर्षों जब सीएए आने वाला था, तब राजनीतिक लोगों ने मुसलमानों को खूब गुमराह किया। यहां तक डराया कि अगर सीएए कानून लागू हो गया तो मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं था। बीते वर्षों में कानून के लागू होने के बाद तमाम चीजें स्पष्ट हो गई कि पूरे देश में किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं छीनी गई, बल्कि नागरिकता प्रदान की गई है। 

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