यूपी: बदायूं में स्वाइन फ्लू से पीड़ित 73 वर्षीय महिला की मौत, नए दो और केस पॉजिटिव मिले
स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप ने चिंता बढ़ा दी है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित बदायूं की रहने वाली महिला की मौत हो गई। मरीज का उपचार बरेली में चल रहा था। जहां कराई गई जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
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बदायूं के बिल्सी क्षेत्र के एक गांव की 73 वर्षीय स्वाइन फ्लू पीड़ित महिला की मंगलवार को बरेली के निजी मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। जबकि नए दो मरीज और पॉजिटिव मिले हैं। उनका उपचार चल रहा है। अब तक जिले में सात केस मिल चुके हैं। स्वाइन फ्लू का संक्रमण सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
बिल्सी क्षेत्र के एक गांव निवासी 73 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद विभाग ने महिला के संपर्क में आने वाले लोगों की जानकारी जुटाने के साथ ही आवश्यक निगरानी शुरू कर दी है। महिला की 13 अगस्त को तबीयत घर में बिगड़ी तो उन्हें अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि महिला की हालत गंभीर थी। उपचार के दौरान उनकी मौत हुई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग महिला की मौत का कारण सीधे स्वाइन फ्लू को नहीं मान रहा है।
अब तक सात मरीज मिल चुके
विभाग के अनुसार निजी मेडिकल कॉलेज में महिला की मौत सेप्टिक शॉक, एनीमिया, निमोनिया के कारण बताई गई है। जिले में अब तक बिल्सी, बिसौली, आसफपुर, सहसवान और आवास विकास और माल गोदाम क्षेत्र के सात मरीज सामने आ चुके हैं। सभी अन्य जनपदों में ही पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं पर इलाज चल रहा है। इधर, एक्टिव मरीजों के स्वास्थ्य पर विभाग की नजर बनी है।
सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में महिला की मौत हुई है। यह 13 अगस्त से फेफड़ों में संक्रमण का अलीगढ़ मेडिकल में इलाज करा रही थीं। वहां से 27 अगस्त को बरेली में भर्ती हुई थीं। महिला को स्वाइन फ्लू पुष्टि हुई हैं, लेकिन मौत को कारण अन्य बीमारियां हैं।
कोरोना काल की पीपीई किट हो चुकी हैं एक्सपायर
स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरणों को लेकर विभाग की चिंता बढ़ गई है। कोविड-19 के दौरान खरीदी गई पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट एक्सपायर हो चुकी है। ऐसे में अब स्वाइन फ्लू का मरीज सामने आने पर स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर विभाग के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
विभाग ने पीपीई किट, मास्क समेत अन्य जरूरी सुरक्षा सामग्री की मांग भेजी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां तक कि जिला अस्पताल में एक वार्ड आरक्षित किया गया है। इसके अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी 20 बेड स्वाइन फ्लू के लिए आरक्षित किए गए हैं, ताकि संदिग्ध मरीज मिलने पर उसे अलग रखकर उपचार दिया जा सके।
कोरोना संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य विभाग में पीपीई किट और मास्क समेत सुरक्षा सामग्री खरीदी थी। उस समय इनका इस्तेमाल कोरोना मरीजों के उपचार और संक्रमण से बचाव के लिए किया गया था। अभी स्वास्थ्य विभाग के पास 252 पीपीई किट मौजूद है, लेकिन इनको रखते हुए सात साल से ज्यादा समय हो गया है। ऐसे में लंबे समय बाद इन किटों की वैधता समाप्त हो चुकी है। ऐसे में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने पर पुरानी किटों के भरोसे स्वास्थ्यकर्मियों मरीज को पास भेजना खतरे से खाली नहीं है।