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UP: ईद की नमाज सड़कों पर न पढ़ें, सरकार की गाइडलाइंस का करें पालन; मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने की अपील
Sun, 30 Mar 2025 02:39 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 30 Mar 2025 02:39 PM IST
सार
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपील की है कि ईद की नमाज सड़कों पर न पढ़ें। सरकार की गाइडलाइंस का पालन करें। मौलाना ने कहा कि इस्लाम रवादारी और इंसानियत का मजहब है, किसी को तकलीफ़ पहुंचाने का नहीं।
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Maulana Shahabuddin Razvi
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मैं तमाम ईदगाह और मस्जिद के इमामों से अपील करूंगा कि ईद की नमाज का खुसूसियत के साथ एहतमाम करें। नमाज में इस बात का ध्यान रखें कि सड़क पर नमाज ना हो।
ईदगाह और तमाम मस्जिदों में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अगर कहीं मस्जिद छोटी है और नमाजी ज्यादा आ गए। मस्जिद में जगह नहीं बचती है। ऐसी सूरत ए हाल में उसका तरीका शरीयत ने ये बताया है कि मस्जिद में इमाम बदलकर दूसरी जमात या तीसरी जमात की जा सकती है।
फिर रोड पर जमात की कोई जरूरत पेश नहीं आएगी। इसकी वजह यह है कि जब सड़क पर नमाज लोग पढ़ने लगते हैं तो एंबुलेंस ट्रैफिक और लोगों की आमद व आना जाना बंद हो जाता है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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मौलाना ने कहा कि इस्लाम रवादारी और इंसानियत का मजहब है, किसी को तकलीफ़ पहुंचाने का नहीं। मौलाना ने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर इस्लाम ने फरमाया कि अच्छा मुसलमान वह है, जिसके हाथ पैर जुबान से किसी को तकलीफ ना पहुंचे। इसलिए सड़कों पर नमाज ना पढ़ी जाए।
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ईदगाह और तमाम मस्जिदों में इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि अगर कहीं मस्जिद छोटी है और नमाजी ज्यादा आ गए। मस्जिद में जगह नहीं बचती है। ऐसी सूरत ए हाल में उसका तरीका शरीयत ने ये बताया है कि मस्जिद में इमाम बदलकर दूसरी जमात या तीसरी जमात की जा सकती है।
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फिर रोड पर जमात की कोई जरूरत पेश नहीं आएगी। इसकी वजह यह है कि जब सड़क पर नमाज लोग पढ़ने लगते हैं तो एंबुलेंस ट्रैफिक और लोगों की आमद व आना जाना बंद हो जाता है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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मौलाना ने कहा कि इस्लाम रवादारी और इंसानियत का मजहब है, किसी को तकलीफ़ पहुंचाने का नहीं। मौलाना ने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर इस्लाम ने फरमाया कि अच्छा मुसलमान वह है, जिसके हाथ पैर जुबान से किसी को तकलीफ ना पहुंचे। इसलिए सड़कों पर नमाज ना पढ़ी जाए।
'काली पट्टी बांधकर खुशी के दिन को गम में ना बदले'
मौलाना ने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हाथ पर काली पट्टी बांधने का एलान किया है। इस एलान पर भी मुसलमान अमल न करें, काली पट्टी न बांधें। क्योंकि यह दिन खुशियों का दिन है, काली पट्टी बांधकर खुशी के दिन को गम में ना बदले। अपने देश के लिए अपने परिवार के लिए खुशहाली और तरक्की की दुआ करें।
मौलाना ने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हाथ पर काली पट्टी बांधने का एलान किया है। इस एलान पर भी मुसलमान अमल न करें, काली पट्टी न बांधें। क्योंकि यह दिन खुशियों का दिन है, काली पट्टी बांधकर खुशी के दिन को गम में ना बदले। अपने देश के लिए अपने परिवार के लिए खुशहाली और तरक्की की दुआ करें।
त्योहारों से संबंधी गाइडलाइंस का करें पालन
मौलाना ने कहा कि देश के सियासी हालात सभी को मालूम है। ईद के दिन अपनी तकरीरों में राजनीतिक चीजों को मुद्दा ना बनाएं, इन मुद्दों को सियासतदानों पर छोड़ दें। अपनी तकरीरों को मुस्लिम समाज के अंदर फैल रही बुराइयों की रोकथाम पर केंद्रित रखें। सरकार द्वारा जारी की गई त्योहारों से संबंधी गाइडलाइंस का पालन करें।
मौलाना ने कहा कि देश के सियासी हालात सभी को मालूम है। ईद के दिन अपनी तकरीरों में राजनीतिक चीजों को मुद्दा ना बनाएं, इन मुद्दों को सियासतदानों पर छोड़ दें। अपनी तकरीरों को मुस्लिम समाज के अंदर फैल रही बुराइयों की रोकथाम पर केंद्रित रखें। सरकार द्वारा जारी की गई त्योहारों से संबंधी गाइडलाइंस का पालन करें।