लोकसभा चुनाव 2024: अपना गढ़ छोड़ दूसरे इलाकों में ठोंक रहे ताल, खुद और परिजन भी नहीं दे सकेंगे वोट
बरेली मंडल के पीलीभीत में मतदान हो चुका है, जबकि तीन सीटों पर तीसरे चरण में सात मई को मतदान होना है। इन सीटों पर कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जो खुद को वोट नहीं दे सकेंगे। दरअसल, ये अपने गृह क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्र से चुनावी ताल ठोंक रहे हैं।
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इस लोकसभा चुनाव में बरेली मंडल की पांचों सीटों पर ऐसे नेताओं की भरमार है, जो किसी न किसी वजह से अपने गृह क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्र से चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। सभी जीत के लिए जी जान से जुटे हैं। यही नहीं, जिन इलाकों से वे ताल ठोंक रहे हैं, वहां न वे खुद वोट डाल सकेंगे, न ही उनके परिजन। सभी प्रत्याशी अपनी जीत के दावे भी कर रहे हैं। दूसरे क्षेत्रों में इनकी मेहनत कितना रंग लाएगी, यह चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बरेली मैदान में उतरे बहेड़ी के छत्रपाल गंगवार
बहेड़ी निवासी छत्रपाल गंगवार को इस बार भाजपा ने बरेली लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। बहेड़ी कस्बा पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में आता है जहां पहले ही मतदान हो चुका है। इस लिहाज से छत्रपाल दूसरे अखाड़े में ताल ठोक रहे हैं। वह पहले बहेड़ी से विधायक व प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं पर पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के अताउर्रहमान से चुनाव हार गए थे। छत्रपाल के विरोधी उनकी राजनीति खत्म मानकर खुशी जता रहे थे पर पार्टी के फैसले के बाद वह नई ऊर्जा के साथ नया मैदान फतह करने में जुट गए हैं।
शिवपाल के लाल आदित्य बदायूं के मैदान में
बदायूं लोकसभा क्षेत्र को समाजवादी पार्टी के अभेद गढ़ के रूप में जाना जाता है। यहां से सपा सुप्रीमो रहे मुलायम सिंह यादव का विशेष जुड़ाव रहा। उन्हीं ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव को यहां स्थापित कराया। धर्मेंद्र दो बार बदायूं से जीते भी। पिछले चुनाव में स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा ने उनसे सीट छीन ली। अब कद्दावर नेता शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव यहां से ताल ठोंक रहे हैं। आदित्य मूल रूप से इटावा के सैफई के निवासी हैं। वह इफको बोर्ड के डायरेक्टर भी रहे हैं। आदित्य नई जमीन पर पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं।
आंवला में गांव, बदायूं में जीत तलाश रहे दुर्विजय
भाजपा ने अपने सामान्य कार्यकर्ता दुर्विजय शाक्य को कुछ समय पहले ब्रज प्रांत का अध्यक्ष बनाकर ताकत दी। फिर स्वामी प्रसाद फैक्टर के साथ बागी तेवर अपना रहीं संघमित्रा मौर्य की काट करने के लिए बदायूं संसदीय सीट से उनको टिकट दे दिया। आरएसएस से राजनीतिक सफर शुरू करने वाले दुर्विजय मूल रूप से बदायूं जिले के निवासी जरूर हैं पर उनका गांव ब्राह्मपुर आंवला लोकसभा क्षेत्र में आता है। कई साल से दुर्विजय बरेली की नॉर्थ एक्सटेंशन कॉलोनी में रह रहे हैं और नामांकन में भी उनका यही पता लिखा है। हालांकि, ब्रज प्रांत का पद होने के नाते दुर्विजय शाक्य का बदायूं क्षेत्र में असर होने का दावा किया जा रहा है। इसी के बूते वह जीत का दम भर रहे हैं।
ककराला के मुस्लिम खां बदायूं में बने महावत
एक वक्त में बसपा के प्रभावशाली विधायक रहे मुस्लिम खां पर इस बार पार्टी सुप्रीमो मायावती ने फिर भरोसा जताया है। मुस्लिम खां यूं तो बदायूं जिले के निवासी हैं और बदायूं शहर में उनका घर भी है, लेकिन निर्वाचन क्षेत्र के नजरिये से देखा जाए तो वह आंवला लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले ककराला कस्बे के मूल निवासी हैं। यानी कि मुस्लिम खां व उनका परिवार ककराला में जो वोट डालेगा, वह आंवला लोकसभा के किसी प्रत्याशी के लिए होगा। मुस्लिम खां की पत्नी ककराला नगर पालिका की चेयरपर्सन भी हैं। माना जा रहा है कि सपा के वोट बैंक में सेंधमारी कर मुस्लिम खां उलटफेर कर सकते हैं।
शाहजहांपुर के जितिन ने पीलीभीत में खेला है दांव
शाहजहांपुर के मूल निवासी जितिन प्रसाद को इस बार भाजपा ने पीलीभीत से चुनाव लड़ाया है। जितिन का पीलीभीत से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है। शाहजहांपुर सीट सुरक्षित होने के बाद उन्होंने लखीमपुर की धौरहरा लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें प्रदेश का पीडब्ल्यूडी मंत्री बनाया गया था। जितिन शाहजहांपुर के चर्चित प्रसाद परिवार के वारिस हैं और इन दिनों भाजपा में ब्राह्मण चेहरे के रूप में काम कर रहे हैं। शाहजहांपुर और धौरहरा से पीलीभीत के सटे होने का फायदा जितिन को मिल सकता है।
नवाबगंज सीट से पांच बार विधायक रहे सपा के प्रभावशाली नेताओं में शुमार भगवत सरन गंगवार को सपा मुखिया ने पड़ोस की पीलीभीत लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था। पहले चरण में वहां चुनाव भी हो चुके हैं। भगवत की कुर्मी बिरादरी के वोटों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। वह सपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, पिछले दो चुनाव में उन्हें हार झेलनी पड़ी पर माना जा रहा है कि वरुण के पीलीभीत से हटने के बाद नए समीकरण में भगवत वहां करिश्मा कर सकते हैं।
शाहजहांपुर से आंवला में ताल ठोंक रहे नीरज
शाहजहांपुर की जलालाबाद विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे नीरज मौर्य वहीं के निवासी हैं। सपा ने उनको आंवला लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। नीरज मौर्य बसपा और भाजपा में भी रह चुके हैं। इस बार सपा ने उन पर भरोसा जताते हुए पिछड़े वोटों में सेंधमारी की कोशिश की है। आंवला लोकसभा क्षेत्र से नीरज मौर्य का सीधा वास्ता नहीं है पर पड़ोस की विधानसभा सीट से विधायक रहने के नाते वह स्थानीय भूगोल अच्छी तरह समझने के दावे संग मैदान में हैं। बसपा प्रत्याशी आबिद अली उन पर बाहरी प्रत्याशी होने का आरोप लगाते रहे हैं पर नीरज मौर्य के समर्थक उनको बाहरी नहीं मानते।
बड़े नेताओं की पसंद रहा है रुहेलखंड
रुहेलखंड का बरेली मंडल बड़े और बाहरी नेताओं की पसंद रहा है। यहां सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव बदायूं लोकसभा की सहसवान व गुन्नौर सीट से विधायक रह चुके हैं। मायावती भी बिल्सी विधानसभा सीट से चुनाव जीती थीं। बाहुबली डीपी यादव व उनकी पत्नी बदायूं की सहसवान व बिसौली सीट से विधायक रहे। बदायूं से पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद सांसद रह चुके हैं। शरद यादव भी यहां से सांसद बने थे। दिल्ली से आकर मेनका गांधी पीलीभीत से सांसद बनीं और बाद में उनके बेटे वरुण जीतते रहे।