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कई अरब की मेगा फूड परियोजना से कामगारों को दे सकेंगे रोजगार
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
छह साल से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट पर सरकार ध्यान दे तो बन जाए बात
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बरेली। कोरोना काल में रोजगार संकट को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ नई योजनाएं तैयार कर रहे हैं, लेकिन यहां बहेड़ी में कई अरब की मेगा फूड पार्क की अटकी परियोजना को पूरा करने में सरकार अगर तेजी दिखाए तो यहां सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। हालांकि पूर्व में कई अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर शासन में पैरवी भी की थी, लेकिन यह परियोजना पूरी नहीं हो पा रही है।
बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर में बीते छह सालों से मेगा फूड पार्क विकसित करने की कवायद चल रही है। इसके लिए प्रशासन ने सीलिंग की 250 एकड़ जमीन राज्य औद्योगिक विकास निगम को हैंडओवर की थी। इसके बाद यहां उद्यमियों को मुख्य मार्ग से कनेक्टविटी, पानी की सप्लाई, ड्रेनेज सिस्टम सहित दूसरी सुविधाएं दी जानी हैं, जो अब तक नहीं जा सकी हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरूआत में अधिकारियों ने काफी तेजी दिखाई थी, लेकिन उनके तबादले के साथ ही यह परियोजना ठप हो गई। हालत यह है कि यहां अब तक एक भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लग सकी हैं। उधर, इस मेगा फूड पार्क को लेकर एक गड़बड़ी और सामने आई थी। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 250 एकड़ जमीन को राज्य औद्योगिक विकास निगम को ट्रांसफर किया था। शासन की जांच में यह सामने आया है कि इसकी प्रक्रिया में अधिकारियों ने सर्किल रेट का उल्लंघन किया है। ऐसी ही तमाम अड़चनों की वजह से यह प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है, लेकिन कोरोना के संकट के बाद अगर इस योजना को लेकर सरकारी मशीनरी तेजी दिखाए तो जिले के सैकड़ों कामगारों को काम मिलने के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर में बीते छह सालों से मेगा फूड पार्क विकसित करने की कवायद चल रही है। इसके लिए प्रशासन ने सीलिंग की 250 एकड़ जमीन राज्य औद्योगिक विकास निगम को हैंडओवर की थी। इसके बाद यहां उद्यमियों को मुख्य मार्ग से कनेक्टविटी, पानी की सप्लाई, ड्रेनेज सिस्टम सहित दूसरी सुविधाएं दी जानी हैं, जो अब तक नहीं जा सकी हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर शुरूआत में अधिकारियों ने काफी तेजी दिखाई थी, लेकिन उनके तबादले के साथ ही यह परियोजना ठप हो गई। हालत यह है कि यहां अब तक एक भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं लग सकी हैं। उधर, इस मेगा फूड पार्क को लेकर एक गड़बड़ी और सामने आई थी। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 250 एकड़ जमीन को राज्य औद्योगिक विकास निगम को ट्रांसफर किया था। शासन की जांच में यह सामने आया है कि इसकी प्रक्रिया में अधिकारियों ने सर्किल रेट का उल्लंघन किया है। ऐसी ही तमाम अड़चनों की वजह से यह प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है, लेकिन कोरोना के संकट के बाद अगर इस योजना को लेकर सरकारी मशीनरी तेजी दिखाए तो जिले के सैकड़ों कामगारों को काम मिलने के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।
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परियोजना की फिर से समीक्षा की जाएगी। जहां-जहां कमियां रह गई हैं उन्हें तत्काल दूर कराकर प्रोजेक्ज शुरू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग परियोजना से लाभांवित हो सकें।- नितीश कुमार, डीएम
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