फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   maha mana madan mohan malviy

बरेली ने हाथोंहाथ लिया था महामना को

Wed, 24 Dec 2014 11:02 PM IST
बरेली
बरेली Updated Wed, 24 Dec 2014 11:02 PM IST
विज्ञापन
maha mana madan mohan malviy
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पं. मदन मोहन मालवीय का बरेली से भी गहरा नाता रहा है। हालांकि वह महज एक बार ही बरेली आए लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया। चार जून 1912 को आए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने महामना के नेतृत्व में शहर से चंदा इकट्ठा करने के लिए विशाल जुलूस निकाला था। उनके आह्वान पर बरेली की जनता ने विश्वविद्यालय निर्माण के लिए दिल खोलकर दान दिया।एक ही दिन में 65 हजार रुपये से अधिक राशि  इकट्ठा हो गए थे।
विज्ञापन

दरभंगा नरेश के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुरादाबाद होते हुए चार जून 1912 को बरेली आया था। इस प्रतिनिधिमंडल में महामना के साथ मुरादाबाद से सेठ बृजनंदन प्रसाद भी  थे।  रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत हुआ।  किला से लेकर शहामतगंज तक शहर के प्रमुख बाजारों से होते हुए एक भव्य जुलूस निकला था। पं. राधेश्याम कथा वाचक की आत्मकथा और उस समय के अंग्रेजी अखबार लीडर में जिक्र है कि किला से लेकर शहामतगंज बाजार तक दुकानदारों ने सड़क की पानी से धुलाई की थी। हर दुकानदार ने अपनी दुकान रंगबिरंगी झालरों से सजाई थी ।  मुसलमानों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। मोहम्मद असगर अली खान के नेतृत्व में मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने कोतवाली के पास स्टाल लगाकर पान, इलायची और शरबत बांटा था।
विज्ञापन

पांच जून को बाबू बलदेव प्रसाद ने सभा का आयोजन किया, जिसमें महामना ने जनता को हिंदू विश्वविद्यालय की आवश्यकता के बारे में बताया। उन्होंने सभी वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विश्वविद्यालय की रूपरेखा के बारे में चर्चा कर धन इकट्ठा करने की अपील की। अंदाजा लगाया जा सकता है जिस समय सामान्य तनख्वाह दस रुपये हुआ करती थी, बरेली शहर ने जेवर और सामान के अतिरिक्त 65 हजार रुपये से अधिक दान दिया था। मालवीय जी ने एक दिन पहले निकले जुलूस के बारे में जिक्र किया था कि उन्होंने आज तक ऐसा जुलूस नहीं देखा। छह जून को रायबहादुर दामोदर दास ने एलन क्लब में पं. राधेश्याम कथा वाचक की भजन संध्या का आयोजन किया था। इन भजनों से मिली धनराशि भी विवि को दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


पं. राधेश्याम ने दी थी पूरी रायल्टी
 पं. राधेश्याम ने अपनी आत्मकथा में जिक्र किया है कि महामना के आह्वान के बाद उन्होंने लेखन से मिली पूरी धनराशि विवि को दे दी। पं. राधेश्याम के पौत्र काशीनाथ शर्मा बताते हैं कि  इसका जिक्र है बल्कि उस समय के अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed