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विज्ञापन की कमाई की लूट और खजाना खाली
बरेली।
Updated Sat, 08 Apr 2017 01:06 AM IST
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Loot of advertising earnings and treasure down
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नगर निगम में विज्ञापन से होने वाली कमाई में बड़ा खेल है। शहर होर्डिंग से पटा है। देख कर लगता है कि नगर निगम तो मालामाल है लेकिन इसकी कमाई तो निगम के खाते में जा ही नहीं रही है। हर साल बजट में अनुमान दिया जाता है कि कमाई एक करोड़ से ऊपर जाएगी लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है। बोर्ड द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में है। पिछले साल कमेटी ने विज्ञापन आय बढ़ाने को कई कड़े निर्णय लेने का सुझाव दिया था लेकिन लागू नहीं किया गया।
होर्डिंग और यूनिपोल के लिए कोई अनुबंध एजेंसियों से नहीं होता है। जिस एजेंसी की सेटिंग हो गई उसी को जगह दे दी गई। मानक 20 गुणा 8 फिट के विज्ञापन लगाने के हैं लेकिन यह मानक भी कंपनियां नहीं मानती। एजेंसी ने निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से नगर निगम के सामने भी अवैध होर्डिंग लगा दी । जब पार्षदों ने विरोध किया तो इसे चुपके से हटवा दिया। आज तक पता ही नहीं चला कि इसे किसने और किसके कहने पर लगाया था।
कमाते है 10 हजार देते है एक हजार
जितनी भी एजेंसियां विज्ञापन का काम कर रही हैं वह 145 से 375 रुपए फुट के हिसाब से निगम को भुगतान करती हैं। इससे करीब एक माह में निगम को 1100 रुपए के आसपास ही मिल पाता है। जबकि एजेंसियां 10 गुना कमा लेती हैं। एजेंसियों से निगम के कर्मचारी भी जुड़े हैं। अगर ईमानदारी से जितनी एजेंसी है वे तय भुगतान ही कर दें तो भी निगम का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
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बोर्ड कमेटी ने यह दी थी रिपोर्ट
बोर्ड कमेटी में पार्षद दल नेता विकास शर्मा, राजेश अग्रवाल, रेहान अली और बबलू खान शामिल थे। तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त विकास सेन के नेतृत्व में कमेटी ने रिपोर्ट दी कि सालाना दो करोड़ रुपए विज्ञापन से कमाने के लिए विज्ञापन का तीन गुणा रेट, 50 हजार रुपए सिक्योरिटी और हर दो साल में 10 गुना वृद्धि का प्रस्ताव था। रेट बढ़ाकर 350 रुपए से 1200 रुपए किए गए थे और विज्ञापन लगाने वाली एजेंसियां राजी भी थीं। लेकिन बोर्ड में प्रस्ताव आने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
विज्ञापन से कमाई, एक नजर
वित्तीय वर्ष लक्ष्य कमाई
2013- 14 1 करोड़ 33 लाख
2014- 15 1 करोड़ 37.50 लाख
2015- 16 1.25 करोड़ 57 लाख
2016- 17 1.25 करोड़ 47 लाख
2017- 18 1.30 करोड़ 39 लाख
25 विज्ञापन एजेंसी
200 यूनिपोल
800 होर्डिंग
बोर्ड कमेटी की रिपोर्ट को दबाने का मकसद और क्या समझा जाए। विज्ञापन की कमाई में लूट जारी है निगम का खजाना खाली है। एजेंसी वाले मिलीभगत से विज्ञापन भुगतान नहीं करते। शहर की खूबसूरती बिगड़ रही है।
राजेश अग्रवाल, बोर्ड कमेटी के सदस्य
विज्ञापन नियमावली के लिए बनी कमेटी ने रिपोर्ट में विज्ञापन एजेंसियों की आपत्ति के बाद कई संशोधन किए थे। टेंडर प्रक्रिया तक हटाई गई लेकिन फिर भी निगम की आय 50 से 60 फीसदी बढ़ रही थी जिस पर एजेंसियां सहमत थी। जि बैठक को मेयर पूर्ण बता रहे हैं उसी में यह प्रस्ताव भी लगा था लेकिन इस बिंदु को हटा दिया गया।
बबलू खान, बोर्ड कमेटी के सदस्य
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होर्डिंग और यूनिपोल के लिए कोई अनुबंध एजेंसियों से नहीं होता है। जिस एजेंसी की सेटिंग हो गई उसी को जगह दे दी गई। मानक 20 गुणा 8 फिट के विज्ञापन लगाने के हैं लेकिन यह मानक भी कंपनियां नहीं मानती। एजेंसी ने निगम अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से नगर निगम के सामने भी अवैध होर्डिंग लगा दी । जब पार्षदों ने विरोध किया तो इसे चुपके से हटवा दिया। आज तक पता ही नहीं चला कि इसे किसने और किसके कहने पर लगाया था।
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कमाते है 10 हजार देते है एक हजार
जितनी भी एजेंसियां विज्ञापन का काम कर रही हैं वह 145 से 375 रुपए फुट के हिसाब से निगम को भुगतान करती हैं। इससे करीब एक माह में निगम को 1100 रुपए के आसपास ही मिल पाता है। जबकि एजेंसियां 10 गुना कमा लेती हैं। एजेंसियों से निगम के कर्मचारी भी जुड़े हैं। अगर ईमानदारी से जितनी एजेंसी है वे तय भुगतान ही कर दें तो भी निगम का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
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बोर्ड कमेटी ने यह दी थी रिपोर्ट
बोर्ड कमेटी में पार्षद दल नेता विकास शर्मा, राजेश अग्रवाल, रेहान अली और बबलू खान शामिल थे। तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त विकास सेन के नेतृत्व में कमेटी ने रिपोर्ट दी कि सालाना दो करोड़ रुपए विज्ञापन से कमाने के लिए विज्ञापन का तीन गुणा रेट, 50 हजार रुपए सिक्योरिटी और हर दो साल में 10 गुना वृद्धि का प्रस्ताव था। रेट बढ़ाकर 350 रुपए से 1200 रुपए किए गए थे और विज्ञापन लगाने वाली एजेंसियां राजी भी थीं। लेकिन बोर्ड में प्रस्ताव आने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।
विज्ञापन से कमाई, एक नजर
वित्तीय वर्ष लक्ष्य कमाई
2013- 14 1 करोड़ 33 लाख
2014- 15 1 करोड़ 37.50 लाख
2015- 16 1.25 करोड़ 57 लाख
2016- 17 1.25 करोड़ 47 लाख
2017- 18 1.30 करोड़ 39 लाख
25 विज्ञापन एजेंसी
200 यूनिपोल
800 होर्डिंग
बोर्ड कमेटी की रिपोर्ट को दबाने का मकसद और क्या समझा जाए। विज्ञापन की कमाई में लूट जारी है निगम का खजाना खाली है। एजेंसी वाले मिलीभगत से विज्ञापन भुगतान नहीं करते। शहर की खूबसूरती बिगड़ रही है।
राजेश अग्रवाल, बोर्ड कमेटी के सदस्य
विज्ञापन नियमावली के लिए बनी कमेटी ने रिपोर्ट में विज्ञापन एजेंसियों की आपत्ति के बाद कई संशोधन किए थे। टेंडर प्रक्रिया तक हटाई गई लेकिन फिर भी निगम की आय 50 से 60 फीसदी बढ़ रही थी जिस पर एजेंसियां सहमत थी। जि बैठक को मेयर पूर्ण बता रहे हैं उसी में यह प्रस्ताव भी लगा था लेकिन इस बिंदु को हटा दिया गया।
बबलू खान, बोर्ड कमेटी के सदस्य