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लालफाटक ओवरब्रिज- कैंट की जमीन नहीं मिली तो बंद करना पड़ेगा काम
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बरेली। लालफाटक पर अगर कैंट बोर्ड से जल्द जमीन न मिली तो यहां निर्माणाधीन ओवरब्रिज का काम बंद हो सकता है। सेतु निगम के अधिकारियों ने इस संबंध में प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर यह बात कही है। अफसरों ने इस पत्र में कहा है कि पीडब्ल्यूडी की उन्हें जितनी जमीन मिली थी, उस पर उनका काम लगभग पूरा हो चुका है। अब आगे काम जारी रखने के लिए कैंट बोर्ड से जल्द जमीन मिलना बेहद जरूरी है।
सेतु निगम ने 2017 में 82.49 करोड़ की लागत से लालफाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया था जिसे 2020 में पूरा करने का लक्ष्य है। इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य बदायूं की तरफ से पीडब्ल्यूडी की जमीन पर शुरू हुआ था। पिछले साल दोनों रेलवे फाटक के बाद रेलवे और कैंट की सीमा के बीच पीडब्ल्यूडी की जमीन पर ओवरब्रिज का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। क्रॉसिंग पर भी रेलवे ने ओवरब्रिज बनाने की शुरूआत कर दी है। इस प्रोजेक्ट को लेकर अब पेच यह फंस रहा है कि ओवरब्रिज बनाने के लिए कैंट एरिया में भी करीब 6500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है। चूंकि यह जमीन सेना की है, इसलिए रक्षा मंत्रालय से इसकी एनओसी मिलनी अभी बाकी है। यहां बता दें कि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की तरफ से इसका प्रस्ताव काफी पहले शासन को जा चुका है, लेकिन इसकी अनुमति अभी नहीं आई है।
उधर, सेतु निगम के अधिकारियों ने एमडी को पत्र भेजा है कि सेना की जमीन अगर जल्द नहीं मिल पाती है तो मजबूरी में निर्माण कार्य बंद करना होगा। अफसरों का कहना है कि ओवरब्रिज बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी की जितनी जमीन मिली थी, उस पर काम लगभग पूरा होने को है।
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केंद्रीय मंत्री के सामने भी सेतु निगम ने उठाया था मामला
सात सितंबर को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की सर्किट हाउस में बैठक के दौरान भी सेतु निगम के अधिकारियों ने यह मामला उठाया था कि कैंट की ओर आ रही रक्षा मंत्रालय की भूमि के हस्तांतरण के लिए शासन की तरफ से जुलाई में संयुक्त सचिव रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अनुमति न आने से कैंट की तरफ से ओवरब्रिज बनाने का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
लालफाटक पर पीडब्ल्यूडी की जमीन पर काफी हद तक काम पूरा हो चुका है। अब कैंट की तरफ जल्द से जल्द काम शुरू कराए जाने की जरूरत है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय से एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
- वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम
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सेतु निगम ने 2017 में 82.49 करोड़ की लागत से लालफाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया था जिसे 2020 में पूरा करने का लक्ष्य है। इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य बदायूं की तरफ से पीडब्ल्यूडी की जमीन पर शुरू हुआ था। पिछले साल दोनों रेलवे फाटक के बाद रेलवे और कैंट की सीमा के बीच पीडब्ल्यूडी की जमीन पर ओवरब्रिज का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। क्रॉसिंग पर भी रेलवे ने ओवरब्रिज बनाने की शुरूआत कर दी है। इस प्रोजेक्ट को लेकर अब पेच यह फंस रहा है कि ओवरब्रिज बनाने के लिए कैंट एरिया में भी करीब 6500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है। चूंकि यह जमीन सेना की है, इसलिए रक्षा मंत्रालय से इसकी एनओसी मिलनी अभी बाकी है। यहां बता दें कि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की तरफ से इसका प्रस्ताव काफी पहले शासन को जा चुका है, लेकिन इसकी अनुमति अभी नहीं आई है।
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उधर, सेतु निगम के अधिकारियों ने एमडी को पत्र भेजा है कि सेना की जमीन अगर जल्द नहीं मिल पाती है तो मजबूरी में निर्माण कार्य बंद करना होगा। अफसरों का कहना है कि ओवरब्रिज बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी की जितनी जमीन मिली थी, उस पर काम लगभग पूरा होने को है।
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केंद्रीय मंत्री के सामने भी सेतु निगम ने उठाया था मामला
सात सितंबर को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की सर्किट हाउस में बैठक के दौरान भी सेतु निगम के अधिकारियों ने यह मामला उठाया था कि कैंट की ओर आ रही रक्षा मंत्रालय की भूमि के हस्तांतरण के लिए शासन की तरफ से जुलाई में संयुक्त सचिव रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अनुमति न आने से कैंट की तरफ से ओवरब्रिज बनाने का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
लालफाटक पर पीडब्ल्यूडी की जमीन पर काफी हद तक काम पूरा हो चुका है। अब कैंट की तरफ जल्द से जल्द काम शुरू कराए जाने की जरूरत है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय से एनओसी का इंतजार किया जा रहा है।
- वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम