शिकायत करने वाले किसानों का फिर से सर्वे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहेड़ी में ओला वृष्टि से बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे को लेकर एडीएम (वित्त एंव राजस्व) के हड़काने के बाद तहसील के 160 गांवों में सर्वे का काम शुरू कराया गया है। बीते दिनों एसडीएम ने लेखपालों के साथ बैठक कर तीखे तेवर दिखाते हुए सख्त नाराजगी जताई थी।
इन गांवों में सर्वे नहीं किया गया था। जब ग्रामीण शिकायत लेकर जिला मुख्यालय पर पहुंचे तो जांच में इस बात का खुलासा हुआ। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए नाराजगी जताई थी। वहीं दूसरी ओर पांच गांवों में करीब 20 किसानों ने सर्वे न होने की शिकायत एसडीएम से की थी। इन गांवों में भी दोबारा से सर्वे कराया जा रहा है।
गेहूं का गम भूल कर मैंथा पर लगाई आस
हैडिंग
त्रस्त किसान के संग भद्दा मजाक है यह तो!
क्रासर
पांच सेंटरों में से दो पर हुई सिर्फ 35 गेहूं क्विंटल ही खरीद
मीरगंज। मीरगंज तहसील क्षेत्र में खाद्य विभाग के दो और पीसीएफ के तीन गेहूं खरीद केंद्र खुले हैं। एडीओ सहकारिता चिंतामणि ने स्वीकार किया कि सप्ताह भर पहले ही चालू हुए पीसीएफ के साधन सहकारी समिति नंदगांव केंद्र पर सिर्फ 15क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका है। फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक के पीसीएफ के एकमात्र जनक जागीर केंद्र पर भी सिर्फ 20 क्विंटल गेहूं खरीद होने की सूचना है। साधन सहकारी समिति गुलड़िया के हुरहुरी में चल रहे पीसीएफ के केंद्र पर एडीओ कोआपरेटिव ने 4 मई सोमवार तक 737.90 क्विंटल गेहूं खरीद होने का दावा किया है। उधर, तहसीलदार कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि शीशगढ़ के गुलड़िया कलां गांव में खाद्य विभाग के सेंटर पर 1300 क्विंटल और मीरगंज में इसी एजेंसी के साधन सहकारी समिति नथपुरा केंद्र पर 1350 क्विंटल गेहूं खरीद हो चुकी है।
किसानों की आम शिकायत है कि 60 रुपये प्रति क्विंटल कटौती देने पर ही सरकारी सेंटरों पर आम काश्तकार का गेहूं लिया जाता है। कटौती के लिए राजी न होने वाले किसानों को गेहूं में तमाम खामियां निकालकर लौटाया जा रहा है। हालांकि एडीओ कोआपरेटिव चिंतामणि ने सेंटरों पर किसानों से कटौती किए जाने की शिकायत को बेबुनियाद करार दिया है।
कहा: अभी तो मध्यम दर्जे का गेहूं सेंटरों पर आ रहा है, लिहाजा कटौती की नौबत ही नहीं आई है। खराब गेहूं आएगा, तो शासन के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इधर, सरकारी सेंटरों पर हीलाहवाली के चलते बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि के चलते गेहूं और दीगर फसलों की तबाही से बिलबिलाया किसान आढ़तों, मंडियों में साफ-सुथरा गेहूं भी 1250 से 1350 रुपये क्विंटल में बेचने को विवश है।
थम नहीं रहीं सर्वे, मुआवजेे की शिकायतें
तहसील प्रशासन 3.49 करोड़ रुपये का मुआवजा बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि से तबाह 9758 काश्तकारों को बांटने का दावा कर रहा है। हालांकि मीरगंज ब्लाक के मीरनगर उर्फ नौगवां, जटपुरा उर्फ मुगलपुर, धनेटा, चनेटा, फिरोजपुर, बल्लिया, फतेहगंज पश्चिमी के खिरका जगतपुर, सतुइया खास, शेरगढ़ के कुड़का, नगरिया कलां, नगरिया सोबरनी, डेलपुर समेत सैकड़ों गांवों से सर्वे में गड़बड़ी और चहेतों को ही मुआवजा बांटे जाने की शिकायतें मिली हैं।